मंगलवार, 4 अक्तूबर 2016

ट्विटर : सामाजिक नेटवर्क


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ट्विटर वा चिर्विर एक मुक्त सामाजिक संजाल व सूक्ष्म चिट्ठाकारी सेवा है जो अपने उपयोगकर्ताओं को अपनी अद्यतन जानकारियां, जिन्हें ट्वीट्स वा चिर्विर वाक्य कहते हैं, एक दूसरे को भेजने और पढ़ने की सुविधा देता है। ट्वीट्स १४० अक्षरों तक के पाठ्य-आधारित पोस्ट होते हैं और लेखक के रूपरेखा पृष्ठ पर प्रदर्शित किये जाते हैं, तथा दूसरे उपयोगकर्ता अनुयायी (फॉलोअर) को भेजे जाते हैं।[5][6] प्रेषक अपने यहां उपस्थित मित्रों तक वितरण सीमित कर सकते हैं, या डिफ़ॉल्ट विकल्प में मुक्त उपयोग की अनुमति भी दे सकते हैं। उपयोगकर्ता ट्विटर वेबसाइट या लघु संदेश सेवा (SMS), या बाह्य अनुप्रयोगों के माध्यम से भी ट्विट्स भेज सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं।[7] इंटरनेट पर यह सेवा निःशुल्क है, लेकिन एस.एम.एस के उपयोग के लिए फोन सेवा प्रदाता को शुल्क देना पड़ सकता है। ट्विटर सेवा इंटरनेट पर २००६ में आरंभ की गई थी और अपने आरंभ होने के बाद टेक-सेवी उपभोक्ताओं, विशेषकर युवाओं में खासी लोकप्रिय हो चुकी है। ट्विटर कई सामाजिक नेटवर्क जालस्थलों जैसे माइस्पेस और फेसबुक पर काफी प्रसिद्ध हो चुका है।[5] ट्विटर का मुख्य कार्य होता है यह पता करना होता कि कोई निश्चित व्यक्ति किसी समय क्या कार्य कर रहा है। यह माइक्रो-ब्लॉगिंग की तरह होता है, जिस पर उपयोक्ता बिना विस्तार के अपने विचार व्यक्त कर सकता है। ऐसे ही ट्विटर पर भी मात्र १४० शब्दों में ही विचार व्यक्त हो सकते हैं।

उपयोग
ट्विटर उपयोक्ता विभिन्न तरीकों से अपना खाता अद्यतन अपडेट कर सकते हैं। वे वेब ब्राउज़र से अपना पाठ संदेश भेजकर अपना ट्विटर खाता अद्यतित कर सकते हैं और ईमेल या फेसबुक जैसे विशेष अन्तरजाल अनुप्रयोगों (वेब एप्लीकेशन्स) का भी प्रयोग कर सकते हैं। संसार भर में कई लोग एक ही घंटे में कई बार अपना ट्विटर खाता अद्यतन करते रहते हैं।[5] इस संदर्भ में कई विवाद भी उठे हैं क्योंकि कई लोग इस अत्यधिक संयोजकता (ओवरकनेक्टिविटी) को, जिस कारण उन्हें लगातार अपने बारे में ताजा सूचना देते रहनी होती है; बोझ समझने लगते हैं।[6] पिछले वर्ष से संसार के कई व्यवसायों में ट्विटर सेवा का प्रयोग ग्राहको को लगातार अद्यतन करने के लिए किया जाने लगा है। कई देशों में समाजसेवी भी इसका प्रयोग करते हैं। कई देशों की सरकारों और बड़े सरकारी संस्थानों में भी इसका अच्छा प्रयोग आरंभ हुआ है। ट्विटर समूह भी लोगों को विभिन्न आयोजनों की सूचना प्रदान करने लगा है। अमेरिका में २००८ के राष्ट्रपति चुनावों में दोनों दलों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने आम जनता तक इसके के माध्यम से अपनी पहुंच बनाई थी। माइक्रोब्लॉगिंग विख्यात हस्तियों को भी लुभा रही है। इसीलिये ब्लॉग अड्डा ने अमिताभ बच्चन के ब्लॉग के बाद विशेषकर उनके लिये माइक्रोब्लॉगिंग की सुविधा भी आरंभ की है। बीबीसी[9] व अल ज़जीरा[10] जैसे विख्यात समाचार संस्थानों से लेकर अमरीका के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बराक ओबामा[11] भी ट्विटर पर मिलते हैं।[12] हाल के समाचारों में शशि थरूर, ऋतिक रोशन, सचिन तेंदुलकर, अभिषेक बच्चन, शाहरुख खान, आदि भी साइटों पर दिखाई दिये हैं। अभी तक यह सेवा अंग्रेजी में ही उपलब्ध थी, किन्तु अब इसमें अन्य कई भाषाएं भी उपलब्ध होने लगी हैं, जैसे स्पेनिश, जापानी, जर्मन, फ्रेंच और इतालवी भाषाएं अब यहां उपलब्ध हैं।

रैंकिंग्स
ट्विटर, अलेक्सा इंटरनेट के वेब यातायात विश्लेषण के द्वारा संसार भर की सबसे लोकप्रिय वेबसाइट के रूप में २६वीं श्रेणी पर आयी है।[13] वैसे अनुमानित दैनिक उपयोक्ताओं की संख्या बदलती रहती है, क्योंकि कंपनी सक्रिय खातों की संख्या जारी नहीं करती। हालांकि, फरवरी २००९ compete.com ब्लॉग के द्वारा ट्विटर को सबसे अधिक प्रयोग किये जाने वाले सामाजिक नेटवर्क के रूप में तीसरा स्थान दिया गया।[14] इसके अनुसार मासिक नये आगंतुकों की संख्या मोटे तौर पर ६० लाख और मासिक निरीक्षण की संख्या ५ करोड़ ५० लाख है[14], हालांकि केवल ४०% उपयोगकर्ता ही बने रहते हैं। मार्च २००९ में Nielsen.com ब्लॉग ने ट्विटर को सदस्य समुदाय की श्रेणी में फरवरी २००९ के लिए सबसे तेजी से उभरती हुई साइट के रूप में क्रमित किया है। ट्विटर की मासिक वृद्धि १३८२%, ज़िम्बियो की २४०% और उसके बाद फेसबुक की वृद्धि २२८% है।


सुरक्षा
हाल के दिनों में ट्विटर पर भी कुछ असुरक्षा की खबरें देखने में आयी हैं। ट्विटर एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार फिशिंग स्कैम का शिकार हुई थी। इस कारण ट्विटर द्वारा उपयोक्ताओं को चेतावनी दी गई वे डायरेक्ट मेसेज पर आए किसी संदिग्ध लिंक को क्लिक न करें। साइबर अपराधी उपयोक्ता लोगों को झांसा देकर उनके उपयोक्ता नाम और पासवर्ड आदि की चोरी कर लेते हैं।[16] इनके द्वारा उपयोक्ता को ट्विटर पर अपने मित्रों की ओर से डायरेक्ट मेसेज के भीतर छोटा सा लिंक मिल जाता है। इस पर क्लिक करते ही उपयोक्ता एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है। यह ठीक ट्विटर के होम पेज जैसा दिखता है। यहीं पर उपयोक्ता को अपनी लॉग-इन ब्यौरे एंटर करने को कहा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्विटर के मूल पृष्ठ पर होता है। और इस प्रकार ये ब्यौरे चुरा लिये जाते हैं। एक उपयोक्ता, डेविड कैमरन ने अपने ट्विटर पर जैसे ही एंटर की कुंजी दबाई, वह खराब संदेश उनकी ट्विटर मित्र-सूची में शामिल सभी उपयोक्ताओं तक पहुंच गया। इससे यह स्कैम दुनिया भर के इंटरनेट तक पहुंच गया। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी चुराई गई सत्रारंभ जानकारी का प्रयोग शेष खातों को भी हैक करने में कर सकते हैं, या फिर इससे किसी दूर के कंप्यूटर में सहेजी जानकारी को हैक कर सकते हैं।

इससे बचने हेतु उपयोक्ताओं को अपने खाते का पासवर्ड कोई कठिन शब्द रखना चाहिये और सभी जगह एक ही का प्रयोग न करें। यदि उन्हें यह महसूस होता है कि उनके ट्विटर खाते से संदिग्ध संदेश भेजे जा रहे हैं तो अपने पासवर्ड को तुरंत बदल लें।[16] इसी तरह अपने ट्विटर खाते की सेंटिंग्स या कनेक्शन एरिया भी जांचें। यदि वहां किसी थर्ड पार्टी की ऐप्लिकेशन संदिग्ध लगती है तो खाते को एक्सेस करने की अनुमति न दें।

ट्विटर ने भी सुरक्षा कड़ी करने हेतु पासवर्ड के रूप में प्रयोग होने वाले ३७० शब्दों को निषेध कर दिया है। उनके अनुसार पासवर्ड के इन शब्दों के बारे में अनुमान लगाना सरल है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर ने '12345' और 'Password' जैसे शब्दों के पासवर्ड के रूप में प्रयोग को रोक दिया है। इनका अनुमान लगा अत्यंत सरल होता है और फिर उपयोक्ताओं की जानकारी को खतरा हो सकता है। पासवर्ड के रूप में 'पॉर्शे' और 'फेरारी' जैसी प्रसिद्ध कारों और 'चेल्सी' व 'आर्सनेल' जैसी फुटबॉल टीमों के नाम भी निषेध कर दिये हैं। इसी प्रकार विज्ञान कल्पना (साइंस फिक्शन) के कुछ शब्दों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।[17]

फेसबुक : सामाजिक नेटवर्किंग सेवा

फेसबुक



फेसबुक (अंग्रेज़ी:Facebook) इंटरनेट पर स्थित एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा है, जिसके माध्यम से इसके सदस्य अपने मित्रों, परिवार और परिचितों के साथ संपर्क रख सकते हैं। यह फेसबुक इंकॉ. नामक निजी कंपनी द्वारा संचालित है। इसके प्रयोक्ता नगर, विद्यालय, कार्यस्थल या क्षेत्र के अनुसार गठित किये हुए नेटवर्कों में शामिल हो सकते हैं और आपस में विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।[5] इसका आरंभ 2004 में हार्वर्ड के एक छात्र मार्क ज़ुकेरबर्ग ने की थी। तब इसका नाम द फेसबुक था। कॉलेज नेटवर्किग जालस्थल के रूप में आरंभ के बाद शीघ्र ही यह कॉलेज परिसर में लोकप्रिय होती चली गई। कुछ ही महीनों में यह नेटवर्क पूरे यूरोप में पहचाना जाने लगा। अगस्त 2005 में इसका नाम फेसबुक कर दिया गया। फेसबुक में अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में भी काम करने की सुविधा है।

फेसबुक ने भारत सहित 40 देशों के मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से समझौता किया है। इस करार के तहत फेसबुक की एक नई साइट का उपयोग मोबाइल पर निःशुल्क किया जा सकेगा। यह जालस्थल फेसबुक का पाठ्य संस्करण है। भारत में रिलायंस कम्युनिकेशंस और वीडियोकॉन मोबाइल पर यह सेवा प्रदान करेंगे। इसके बाद शीघ्र ही टाटा डोकोमो पर भी यह सेवा शुरू हो जाएगी। इसमें फोटो व वीडियो के अलावा फेसबुक की अन्य सभी संदेश सेवाएं मिलेंगी।[6]

फेसबुक का उपयोग करने वाले अपना एक प्रोफाइल पृष्ठ तैयार कर उस पर अपने बारे में जानकारी देते हैं। इसमें उनका नाम, छायाचित्र, जन्मतिथि और कार्यस्थल, विद्यालय और कॉलेज आदि का ब्यौरा दिया होता है। इस पृष्ठ के माध्यम से लोग अपने मित्रों और परिचितों का नाम, ईमेल आदि डालकर उन्हें ढूंढ़ सकते हैं। इसके साथ ही वे अपने मित्रों और परिचितों की एक अंतहीन श्रृंखला से भी जुड़ सकते हैं। फेसबुक के उपयोक्ता सदस्य यहां पर अपना समूह भी बना सकते हैं।[5] यह समूह उनके विद्यालय, कॉलेज या उनकी रुचि, शहर, किसी आदत और जाति का भी हो सकता है। समूह कुछ लोगों का भी हो सकता है और इसमें और लोगों को शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया जा सकता है। इसके माध्यम से किसी कार्यक्रम, संगोष्ठी या अन्य किसी अवसर के लिए सभी जानने वालों को एक साथ आमंत्रित भी किया जा सकता है।

लोग इस जालस्थल पर अपनी रुचि, राजनीतिक और धार्मिक अभिरुचि व्यक्त कर समान विचारों वाले सदस्यों को मित्र भी बना सकते हैं। इसके अलावा भी कई तरह के संपर्क आदि जोड़ सकते हैं। साइट के विकासकर्त्ता भी ऐसे कई कार्यक्रम तैयार करते रहते हैं, जिनके माध्यम से उपयोक्ता अपनी रुचियों को परिष्कृत कर सकें। फेसबुक में अपने या अपनी रुचि के चित्र फोटो लोड कर उन्हें एक दूसरे के साथ बांट भी कर सकते हैं। ये चित्र मात्र उन्हीं लोगों को दिखेंगे, जिन्हें उपयोक्ता दिखाना चाहते हैं। इसके लिये चित्रों को देखनेका अनुमति स्तर निश्चित करना होता है। चित्रों का संग्रह सुरक्षित रखने के लिए इसमें पर्याप्त जगह होती है। फेसबुक के माध्यम से समाचार, वीडियो और दूसरी संचिकाएं भी बांट सकते हैं। फेसबुक ने 2008 में अपना आवरण रूप बदला था।[5]

स्टेटस अद्यतन
फेसबुक पर उपयोक्ताओं को अपने मित्रों को यह बताने की सुविधा है कि किसी विशेष समय वे क्या कर रहे हैं या क्या सोच रहे हैं और इसे 'स्टेट्स अपडेट' करना कहा जाता है। फेसबुक और ट्विटर के आपसी सहयोग के द्वारा निकट भविष्य में फेसबुक एक ऐसा सॉफ्टवेयर जारी करेगा, जिसके माध्यम से फेसबुक पर होने वाले 'स्टेट्स अपडेट' सीधे ट्विटर पर अद्यतित हो सकेंगे। अब लोग अपने मित्रों को बहुत लघु संदेशों द्वारा यह बता सकेंगे कि वे कहाँ हैं, क्या कर रहे हैं या क्या सोच रहे हैं।[7]

ट्विटर पर १४० कैरेक्टर के 'स्टेट्स मैसेज अपडेट' को अनगिनत सदस्यों के मोबाइल और कंप्यूटरों तक भेजने की सुविधा थी, जबकि फेसबुक पर उपयोक्ताओं के लिये ये सीमा मात्र ५००० लोगों तक ही सीमित है। सदस्य ५००० लोगो तक ही अपने प्रोफाइल के साथ जोड़ सकते हैं या मित्र बना सकते हैं। फेसबुक पर किसी विशेष प्रोफाइल से लोगों के जुड़ने की संख्या सीमित होने के कारण 'स्टेट्स अपडेट' भी सीमित लोगों को ही पहुँच सकता है।

सार्वजनिक खाते
सार्वजनिक खाते (पब्लिक पेज) यानी ऐसे पेज जिन्हें हर कोई देख सकता है और लोग जान सकते हैं कि उनके आदर्श नेता, प्यारे पॉप स्टार या सामाजिक संगठन की क्या गतिविधियाँ हैं। फेसबुक के ट्विटर से जुड़ जाने के बाद अब कंपनियाँ, संगठन, सेलिब्रिटी अपने प्रशंसकों और समर्थकों से सीधे संवाद कर पाएँगे, उन्हें बता पाएँगे कि वे क्या कर रहे हैं, उनके साथ फोटो शेयर कर पाएँगे। फिलहाल यह सुविधा पब्लिक पेज प्रोफाइल वालों को ही उपलब्ध है। फेसबुक के सार्वजनिक पृष्ठ (पब्लिक पेज) बनाना हाल के दिनों में काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। पब्लिक पेज बनाने वालों में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सारकोजी और रॉक बैंड यू-२ शामिल हैं। इनके अलावा भी कई बड़ी हस्तियों, संगीतकारों, सामाजिक संगठनों, कंपनियों ने अपने खाते फेसबुक पर खोले हैं।[7] ये हस्तियां या संगठन अपने से जुड़ी बातों को अपने प्रशंसकों या समर्थकों के साथ बाँटना चाहते हैं तो आपसी संवाद के लिए फेसबुक का प्रयोग करते हैं।

प्रतिबंध
फेसबुक पर आयोजित पैगंबर मोहम्मद के आपत्तिजनक कार्टून बनाने की प्रतियोगितामें मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप के कारण पाकिस्तान के एक न्यायालय ने फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। फेसबुक पर चल रही इस कार्टून प्रतियोगिता को ईशनिंदा के कारण पाक में ३१ मई, २०१० तक प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही न्यायालय ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को निर्देश जारी किया कि वह ईशनिंदा में बनाए गए कार्टून के मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाए।[8][9]

बाद में जिस फेसबुक उपयोक्ता ने 'एवरीवन ड्रॉ मोहम्मद डे' प्रतियोगिता आयोजित की थी, उसने यह पृष्ठ हटा लिया है। इसके साथ ही उसने इस अभियान से जुड़ा ब्लॉग भी हटा लिया था।[10]

खतरा
सोश्यल नेटवर्किंग साइट फेसबुक इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों के जीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। परंतु कुछ साइबर विशेषज्ञ फेसबुक से उत्पन्न खतरों के बारे में समय समय पर आगाह करते रहते हैं। चीफ सैक्यूरिटी ऑफिसर ऑनलाइन नामक सामयिक के वरिष्ठ सम्पादक जॉन गूडचाइल्ड के अनुसार कई कम्पनियाँ अपने प्रचार के लिए फेसबुक जैसे नेटवर्किंग माध्यम का उपयोग करना चाहती है परंतु ये कम्पनियाँ ध्यान नहीं देती कि उनकी गोपनियता अभि भि अनिश्चित है। सीबीसी न्यूज़ के 'द अर्ली शॉ ऑन सैटर्डे मॉर्निंग' कार्यक्रम में गूडचाइल्ड ने फेसबुक से उत्पन्न पाँच ऐसे खतरों के बारे में बताया जिससे निजी और गोपनीय जानकारियों की गोपनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।[11] ये इस प्रकार से हैं:

डाटा बांटना: यहां दी गई जानकारी केवल घोषित मित्रों तक ही सीमित नहीं रहती है, बल्कि वह तृतीय पार्टी अनुप्रयोग विकासकर्त्ताओं (थर्ड पार्टी अप्लिकेशन डेवलपर) तक भी पहुँच रही हैं।
बदलती नीतियां: फेसबुक के हर नये संस्करण रिलीज़ होने के बाद उसकी प्राइवेसी सेटिंग बदल जाती है और वह स्वत: डिफाल्ट पर आ जाती है। प्रयोक्ता उसमें बदलाव कर सकते हैं परंतु काफी कम प्रयोक्ता इस ओर ध्यान दे पाते हैं।
मैलावेयर: फेसबुक पर प्रदर्शित विज्ञापनों की प्रामाणिकता का कोई वादा नहीं है। ये मैलावेयर हो सकते हैं और उनपर क्लिक करने से पहले उपयोक्ताओं को विवेक से काम लेना चाहिये।
पहचान उजागर: उपयोक्ताओं के मित्र जाने अनजाने उनकी पहचान और उनकी कोई गोपनीय जानकारी दूसरों से साझा कर सकते हैं।
जाली प्रोफाइल: फेसबुक पर सेलिब्रिटियों को मित्र बनाने से पूर्व उपयोक्ताओं को ये चाहिये कि पहले उनकी प्रोफाइल की अच्छी तरह से जाँच अवश्य कर लें। स्कैमरों के द्वारा जाली प्रोफाइल बनाकर लोगों तक पहुँच बनाना काफी सरल है।
फेसबुक छोड़ो अभियान

हाल ही में फेसबुक ने अपने सुरक्षा नियमों को पहले से कुछ कड़ा कर दिया है जिसके कारण इसके उपयोक्ताओं में काफी रोष दिखा है। इसके कड़े सुरक्षा नियमों से नाराज उपयोक्ताओं ने एक समूह बनाकर फेसबुक पर फेसबुक के विरुद्ध ही अभियान चला दिया है।[12] उन्होंने ने एक साइट बनाई है क्विटफेसबुकडे डॉट काम जिसपर फेसबुक उपयोक्ताओं से ३१ मई को फेसबुक छोड़ो दिवस के रूप में मनाने का आहवान किया है। इस वेबसाइट पर संदेश है कि यदि आप को लगता है कि फेसबुक आपकी स्वतंत्रता, आपके निजी डाटा और वेब के भविष्य का सम्मान नहीं करता तो आप फेसबुक छो़ड़ो अभियान में हमारा साथ दे सकते हैं। फेसबुक छोड़ना आसान नहीं है, यह इतना ही मुश्किल है जितना की धूम्रपान छोड़ना लेकिन फिर भी उपयोक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए यह करना ही पड़ेगा।[13] क्विटफेसबुकडे डॉट काम पर अब तक एक हजार से अधिक लोग ३१ मई को अपना फेसबुक खाता समाप्त करने की शपथ ले चुके हैं।

फेसबुक पर बुक
उत्तर प्रदेश के एक आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने फेसबुक पर अपने अनुभवों तथा अपने कार्यों को पृष्ठभूमि बनाते हुए हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में एक-एक पुस्तक लिखने का कार्य प्रारम्भ किया है जो बहुत शीघ्र ही प्रकाशित हो जायेंगे. अमिताभ ठाकुर द्वारा ये पुस्तकें फेसबुक संस्थापक मार्क झुकरबर्ग तथा अपने फेसबुक के साथियों को समर्पित किया गया है।

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही ब्रिटेन में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रहे हों लेकिन फ़ेसबुक द्वारा जारी एक सेंसरशिप रिपोर्ट कई सवालिया निशान खड़े करती है.
फ़ेसबुक पर पोस्ट की गई सामग्रियों में से 15,155 सामग्रियों पर भारत ने फ़ेसबुक से कहकर प्रतिबंध लगवाया.
वहीं दूसरे स्थान पर तुर्की रहा जिसने केवल 4,496 सामग्रियों के ख़िलाफ ऐसा किया.
फ़ेसबुक पर मौजूद लोगों के अकाउंट के बारे में जानकारी हासिल करने में अमरीका सबसे आगे रहा तो भारत दूसरे स्थान पर.


अमरीका ने फ़ेसबुक से 26,579 लोगों की जानकारी मांगी वहीं भारत ने 6,268 लोगों की जानकारी हासिल की.
ब्रिटेन तीसरे स्थान पर रहा, उसने 4,489 लोगों की जानकारी फ़ेसबुक से ली.
फ़ेसबुक की इस रिपोर्ट से तीन बड़े सवाल खड़े होते हैं.
जिस तरह से फ़ेसबुक पर मौजूद सामग्रियों पर प्रतिबंध लगवाया जा रहा है वो कहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम कसना तो नहीं है?
कहीं सरकार इसका प्रयोग अपने राजनीतिक विरोधियों को रोकने के लिए तो नहीं कर रही?
क्या फ़ेसबुक अपनी इंटरनेट सेवा को भारत में लॉन्च करने के लिए यहां की सरकार की कुछ ज़्यादा ही मदद तो नहीं कर रहा?

मोदी और ज़ुकरबर्गImage copyrightAFP

फ़ेसबुक के अनुसार, उनकी वेबसाइट पर मौजूद सामग्रियों पर प्रतिबंध लगवाने के लिए भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की तरफ से आवेदन किए गए थे.
उनके अनुसार, ये सभी सामग्रियां धर्म विरोधी और भड़काऊ भाषण की श्रेणी में आती थीं.
मीडियानामा के संस्थापक निखिल पाहवा कहते हैं, "दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जिस तरह की सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाया गया है उसका कोई डेटा मौजूद नहीं है."
निखिल के अनुसार, "ऐसे में हम यह अनुमान नहीं लगा सकते कि किस तरह की चीज़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है."
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनमें से कई सामग्रियां आपराधिक मामलों से भी जुड़ी थीं.


ऐसे में भारतीय एजेंसियों ने फ़ेसबुक से बहुत ही मूलभूत जानकारियां मांगी जैसे कि सब्सक्राइबर जानकारी, आईपी एड्रेस, अकाउंट कंटेंट या लोग क्या पोस्ट कर रहे हैं.
हालांकि यह भी कहा गया है कि फ़ेसबुक इस तरह का कोई भी फैसला लेने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि क्या वह सामग्री स्थानीय कानून का उल्लंघन कर भी रही है या नहीं.
अगर ऐसा पाया जाता है तो उस पर उस देश में प्रतिबंध लगा दिया जाता है.
निखिल कहते हैं, "एक नागरिक के तौर पर हमें यह जानकारी होनी चाहिए कि किस हद तक सामग्रियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. हम सभी को यह अधिकार है, केवल सरकार को नहीं."
वो कहते हैं, "यह फ़ेसबुक की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वो ऐसी सामग्रियों और आवेदन के बारे में जानकारी साझा करे."

Image copyrightGETTY

इतनी बड़ी संख्या में आवेदन करना सरकारी मशीनरी द्वारा लोगों की असहमति को दबाने का ज़रिया बन सकता है.
यह वैसा ही होगा जैसे धारा 66ए का बड़ी तादात में ग़लत इस्तेमाल कर राज़्य सरकारें किसी को भी गिरफ़्तार कर लेती थीं.
जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को बीच में दखल देकर इस धारा को ख़त्म करना पड़ा.
सरकार भले ही दावे कर रही हो कि वो यह प्रतिबंध धर्म विरोधी और भड़काऊ भाषणों को रोकने के लिए लगवा रही है लेकिन दुर्भाग्यवश ज़मीनी तौर पर उसकी कथनी और करनी में बहुत ही फर्क नज़र आ रहा है.
जैसा कि हमें इस साल की शुरुआत में देखने को मिला, उत्तर प्रदेश में एक छात्र ने समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान के बारे में कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया.
जिसके बाद खान ने उसके ख़िलाफ एफआईआर दर्ज कराई और छात्र को 15 दिन के लिए जेल हो गई.

Image captionसंस्कृति मंत्री महेश शर्मा

हाल ही में संपन्न हुए बिहार चुनाव में भी हमने देखा कि भाजपा नेताओं की तरफ से कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं थीं.
दादरी मामले में भी संस्कृति मंत्री महेश शर्मा और भाजपा विधायक संगीत सोम की तरफ से कई मूर्खतापूर्ण टिप्पणियां की गईं जिसका चौतरफा विरोध हुआ लेकिन उनके ख़िलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई.
ऐसे में इस आशंका को नहीं नकारा जा सकता कि सरकार केवल उनके ख़िलाफ ही कार्रवाई करेगी जो उनकी समीक्षा करेगा.
इस पर पाहवा कहते हैं कि फ़ेसबुक पर जिन सामग्रियों पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है उसके बारे में और अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए. इससे लोगों में उन्हें समझने में और अधिक आसानी होगी.
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