शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

केजरीवााल से मांगा सबूत : दिल्ली पुलिस ने फोन टेपिंग मामले में



झूठे आरेाप लगाना इनके पाखण्ड का हिस्सा है।देश के पीएम पर झूठे आरोप लगाने में इन्हे गिरफतार करना चाहिये ।क्यों कि इनके झूठ से देश की इज्जत पर दाग लगता हे। देश की हंसी उडाई जाती है।

- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा जिला कोटा 


फोन टेपिंग मामले में दिल्ली पुलिस ने केजरीवााल से मांगा सबूत

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने न्यायधीशों के कथित फोन टेपिंग मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से सबूत मांगे है। दिल्ली के पुलिस आयुक्त आलोक कुमार वर्मा ने केजरीवाल को इस बारे में बाकायदा एक पत्र लिखा है और कहा है कि वह अपने उस बयान का सबूत दें कि जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि न्यायधीशों के फोन टेप किए जा रहे हैं।

केजरीवाल ने दिया जवाब
केजरीवाल ने इसके जवाब में कहा है कि वह उनसे सबूत मांगने की बजाए इस बारे में गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) से संपर्क करें तो ज्यादा बेहतर होगा। उन्होंने कहा आईबी सबके फोन टेप करती है। मेरी भी करती है, लेकिन जजों के फोन टेप करना गलत है। उन्हें ब्लैकमेल किया जा सकता है और इसका सीधा असर न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है। दिल्ली उच्च न्यायालय की स्थापना के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर गत सोमवार को केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की मौजूदगी में कहा था मैंने उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों को यह बात करते सुना है कि फोन पर बात मत किया करो, हमारे फोन टेप हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस अब उनके इस बयान के सबूत मांग रही है।  

पुलिस ने केजरीवाल से कहा है कि वह उन सूत्रों का खुलासा करें जिसके आधार पर उन्होंने फोन टेपिंग का आरेाप लगाया है। पुलिस आयुक्त ने इस बारे में आज केजरीवाल को भेजे पत्र में लिखा है ‘‘हाईकोर्ट की 50 वीं सालगिरह पर आपने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि जजों के फोन टेप किए जा रहे हैं। ‘कुछ मीडिया रिपोट््र्स के मुताबिक, ऐसा आपने कुछ जजों को बात करते हुए सुना था। जैसा कि आपको मालूम है कि फोन टेपिंग एक गंभीर मामला है। तब तक इसकी मंजूरी नहीं मिलती है, जब तक कोई बड़ा अधिकारी कानूनी तौर पर इसकी सिफारिश न कर दे। इसलिए इस बारे में आपका जिक्र करना गंभीर चिंता का विषय है। आप हमें फोन टेपिंग की किसी घटना के बारे में बताएं, जिसके हवाले से आपने इसका जिक्र अपने भाषण में किया।‘’

केजरीवाल ने 31 अक्टूबर के कार्यक्रम में यह भी कहा था कि वह नहीं जानते कि फोन टपिंग मामले में कितनी सच्चाई है लेकिन अगर ऐसा हो रहा है तो यह न्यायपालिका के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस अवसर पर अदालतों में खाली पदों और उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम व्यवस्था की सिफारिशों को लागू करने में देरी पर भी सवाल उठाए थे। केजरीवाल ने जिस दिन यह आरोप लगाया था उसी समय वहां मौजूद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद गृहमंत्रालय ने भी इस बारे में मीडिया में आयी खबरों का खंडन करते हुए बाकायदा एक बयान जारी करके कहा था कि इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है।

विदेश से पैसा नहीं ले पाएंगे : 11,000 से अधिक एनजीओ की मान्यता रद्द



सरकार ने 11,000 से अधिक एनजीओ की मान्यता रद्द की

भाषा की रिपोर्ट, अंतिम अपडेट: शुक्रवार नवम्बर 4, 2016

नई दिल्‍ली: सरकार ने 11,000 से अधिक एनजीओ की मान्यता समाप्त कर दी है. ये एनजीओ जून के अंत तक अपने पंजीकरण का नवीकरण कराने में विफल रहे थे. मान्यता समाप्त होने से ये एनजीओ विदेश से धन प्राप्त नहीं कर सकेंगे.

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने उन 11,319 संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है जिन्होंने इस साल 30 जून तक एफसीआरए के तहत पंजीकरण के नवीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. ‘उनके पंजीकरण की वैधता एक नवंबर, 2016 से समाप्त मानी जाएगी.’

इस सूची में करीब 50 अनाथालय, सैकड़ों स्कूल और संस्थान जैसे भारतीय सांख्यिकी संस्थान और समाज के वंचित बच्चों के लिए काम करने वाले प्रतिष्ठित एनजीओ शामिल हैं.

   वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय ने 10,000 गैर सरकारी संगठनों के एफसीआरए पंजीकरण इसलिए रद्द किए थे क्योंकि इन्होंने लगातार तीन वर्षों के अपने सालाना रिटर्न दाखिल नहीं किए थे. इनमें से कई एनजीओ निष्क्रिय थे या किसी भी मामले में एफसीआरए पंजीकरण नहीं चाहते थे.

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मोदी सरकार ने 11 हजार एनजीओ की मान्यता रद्द की

अभय शर्मा
एफसीआरए के तहत पंजीकरण रद्द होने के बाद अब ये एनजीओ विदेश से पैसा नहीं ले पाएंगे

मोदी सरकार ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत 11 हजार गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की मान्यता रद्द कर दी है. खबरों के मुताबिक ये सभी संगठन सरकार द्वारा तय की गई तारीख तक अपने पंजीकरण का नवीकरण नहीं करा पाए थे.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि उन एनजीओ का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है जिन्होंने इस साल 30 जून तक एफसीआरए के तहत पंजीकरण के नवीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मंत्रालय के अनुसार अब इनके पंजीकरण की वैधता एक नवंबर, 2016 से समाप्त मानी जाएगी. एफसीआरए के तहत पंजीकरण की वैधता समाप्त होने के बाद ये एनजीओ विदेश से धन प्राप्त नहीं कर सकेंगे.

गृह मंत्रालय ने इस साल मार्च में सभी एनजीओ के एफसीआरए पंजीकरण की वैधता 31 अक्टूबर 2016 तक बढ़ा दी थी. लेकिन उसने इन सभी से कहा था कि वे 30 जून तक 2016 अपने पंजीकरण का नवीकरण करा लें. बताया जाता है कि 11,319 संगठन नवीकरण कराने में विफल रहे जिनमें करीब 50 अनाथालय और सैकड़ों स्कूल भी शामिल हैं.
पिछले साल भी गृह मंत्रालय ने करीब 10 हजार ऐसे गैर सरकारी संगठनों के एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए थे जिन्होंने बीते तीन वर्षों के अपने सालाना रिटर्न दाखिल नहीं किए थे.