शनिवार, 5 नवंबर 2016

दो धरनों में दो कथित आत्महत्यायें : जांच कराओ राजनैतिक हत्याओं की आशंका




*   धारा 306 के तहत किसी व्यक्ति के लिए ऐसे हालात पैदा कर  दबाव डालना या मजबूर करना, जिससे वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाए। यह गैर जमानती धारा है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की सजा जुर्माना हो सकता है। साथ ही इस केस की सुनवाई केवल सेशन कोर्ट या उससे ऊपर की अदालत में हो सकती है।

अपराध के लिए उकसाने , खुदकुशी के लिए उकसाने , आपराधिक षड्यंत्र  सहित अनेकों अपराधों का युग्म महसूस हो रहा हे इस लिए  उच्चस्तरीय जाँच हो । जाँच अधिकारी इस स्तर का हो जो कांग्रेस राजकुमार और केजरीवाल से भय नहीं खाये ।

कोई विवाहिता सुसराल में आत्महत्या कर लेती हे तो पुलिस सुसराल पक्ष के अनगिनित लोगों को अपराधी मान  कर मुकदमा दर्ज कर लेती  है । फिर धरना आयोजकों को कैसे बक्सा जा सकता है । प्रत्येक सह भागी की जिम्मेवारी उनकी हे ।

** जांच कराओ राजनैतिक हत्याओं की आशंका है:- दिल्ली में दो धरनों में दो कथित आत्म हत्यायें !! मामले को तूल देनें और सरकार पर अत्याधिक दवाब बनानें के मकसद से !! यह मीडिया मनेजमेंट का तरीका है। मगर इसमें आपराधिकता स्पष्टतौर पर झलक रही हे। यदि कोई भी षड़यंत्र है तो आत्महत्या नहीं हत्या का मामला बनता है। - अरविन्द सिसोदिया, कोटा, राजस्थान ।


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सच्चाई :
*क्या सैनिक आत्महत्या करते है?*🔴
*रामकिशन की कहानी*
1. रामकिशन 2004 में सेना से सेवानिवृत्त हो कर स्थानीय राजनीती में उतरे और कांग्रेस नेताओं से नज़दीकियों की बदौलत सरपंच बने।
2. 2004 से कांग्रेस शासन में उनकी पेंशन मात्र 13000 रूपये थी जो की मोदी सरकार में OROP के लागू होने के बाद 28000 हो गयी थी।
3. कांग्रेस से नजदीकी की बदौलत ही उन्हें सन् 2005 और 2008 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया, उन्हें ये पुरस्कार ODF (Open Defection Free) यानि गांव के हर घर में शौचालय बनवाने और खुले में शौच को पूर्ण रूप से बंद करने के कारण मिला।
4. सन् 2015 में सर्कार के पास एक शिकायत आयी की राम किशन द्वारा किये गए दावे झूठे हैं और ऐसे में उन से पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए।
5. सर्कार ने जब जांच की तो पाया कि महज़ 15% घरों में ही शौचालय बनाये गए थे, जिबकी दावा 100% घरों में शौचालय बनाने का किया गया था जो की सिर्फ कागज़ों पर था हकीकत में नहीं।
6. जांच आगे बढ़ी तो पाया गया रामकिशन द्वारा फ़र्ज़ी बिलों का भुगतान किया गया है, इस पर सन् 2016 में सर्कार ने रामकिशन को आरोपी बनाया।
7. रामकिशन अब सर्कार को गुमराह करने, सरकारी खजाने को नुकसान पहुचाने, धोखाधड़ी करने, कूट रचित दस्तावेज़ तैयार करने के आरोपी बन चुके थे, ऐसे में उनका बचना लगभग असंभव था?
8. रामकिशन ने ये घोटाला अकेले नहीं किया था बल्कि अपने बाकि के राजनितिक साथियों के साथ मिल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था। जब उन सब को लगा की अब हम सब फंस जायेंगे तो उन्होंने रामकिशन को ये सुझाव दिया कि तुम ज़हर खाने का नाटक करो, हम सब तुम्हे बचा लेंगे (जैसा गजेंद्र को आश्वासन दिया गया था) लेकिन वे नेता और उनके हाईकमान रामकिशन को ख़त्म कर उस केस को बंद करना चाहते थे जिसकी वजह से उनकी गर्दन फंस गयी थी?
_क्या कोई सैनिक आत्महत्या कर सकता है? कौन थे वो लोग जो रामकिशन के साथ थे और फ़ोन पर पीछे से रामकिशन को बता रहे थे की क्या बोलना है? वो लोग किस राजनैतिक पार्टी के सदस्य या नेता है? क्या वो सब भी इस घोटाले में शामिल थे? तो क्या रामकिशन की हत्या में बड़े नेता भी शामिल हैं? क्या इन्ही बड़े नेताओं ने अपना नाम बचाने के लिए रामकिशन की बलि दे दी और उसे मौत के घाट उतार दिया?_
_एक सवाल ही मन में क्या कोई सैनिक आत्महत्या कर सकता है? *सैनिक तो अंतिम दम तक लड़ने वाले होते है।* फिर भी अगर कोई सैनिक आत्महत्या किया तो वो असली सैनिक नही होगा या फिर कोई राज है।_
और एक सच्चाई :----
1. रामकिशन ग्रेवाल ने सिर्फ 6 साल सेना की नौकरी की और निकल गया, फिर 24 साल DCS सर्विस की । 6 साल की नौकरी पर पेंशन के हकदार नही होते। फिर भी OROP में जो प्रॉब्लम थी वो उसके बैंक खाते की प्रॉब्लम थी ।
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2. रामकिशन बामला गाँव का सरपंच था। गाँव के शौचालय बनाने के नाम पर इसने लाखों रूपये का घोटाला किया। इसके खिलाफ जांच बैठायी गयी है ।
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3. इसने 31 Oct को रक्षा मंत्री जी को पत्र लिखा और एक दिन बाद ही तथाकथित आत्महत्या कर ली ।
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4. पोलिटिकल स्क्रिप्ट के तहत, उसके खाने में celphos नामक जहर मिलाया गया और मौत को आत्महत्या करार कर दी गई, और फिर इस पर राजनीती शुरू कर दी गई !
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5. बैंक खाते में कुछ टेक्निकल प्रोब्लेेम की वजह से इसको OROP के 28000 की जगह 23000 रु /महीने मिल रहा था ... कोई आदमी यह मुद्दे पर आत्महत्या नहीं कर सकता । जो लोग उनकी मौत पर राजनीती कर रहे है, वहीँ लोगों ने उसका प्री प्लान्ड मर्डर किया होगा !
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आमआदमीपार्टी और कोंग्रेस राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, पहले एक किसान गजेंद्र को भी इसी तरह मरवा दिया था और अब इसको भी मरवा दिया ।
और रही बात OROP की, तो 40 साल से पेंडिंग OROP सुविधा को सिर्फ मोदी सरकार ने ही लागू किया है । ये जो OROP का 28000 या 23000 आ रहा है वो सिर्फ मोदी सरकार ने लागू किया है , वरना पहले किसी भी सरकार ने OROP के नाम पर 1 रु भी नही दिया । आए बड़े राजनीती करने !
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1. रामकिशन ग्रेवाल ने सिर्फ 6 साल सेना की नौकरी की और निकल गया, फिर 24 साल DCS सर्विस की । 6 साल की नौकरी पर पेंशन के हकदार नही होते।  फिर भी OROP में जो प्रॉब्लम थी वो उसके बैंक खाते की प्रॉब्लम थी ।
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2. रामकिशन बामला गाँव का सरपंच था। गाँव के शौचालय बनाने के नाम पर इसने लाखों रूपये का घोटाला किया। इसके खिलाफ जांच बैठायी गयी है ।
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3. इसने 31 Oct को रक्षा मंत्री जी को पत्र लिखा और एक दिन बाद ही तथाकथित आत्महत्या कर ली ।
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4. पोलिटिकल स्क्रिप्ट के तहत, उसके खाने में celphos नामक जहर मिलाया गया और मौत को आत्महत्या करार कर दी गई, और फिर इस पर राजनीती शुरू कर दी गई !
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5.  जो लोग उनकी मौत पर राजनीती कर रहे है, वहीँ लोगों ने उसका प्री प्लान्ड मर्डर किया होगा !
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आम आदमी पार्टी और कोंग्रेस राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, पहले एक किसान गजेंद्र सिंह  को भी इसी तरह मरवा दिया था और अब इसको भी मरवा दिया ।

और रही बात OROP की, तो 40 साल से पेंडिंग OROP सुविधा को सिर्फ मोदी सरकार ने ही लागू किया है । ये जो OROP का 28000 या 23000 आ रहा है वो सिर्फ मोदी सरकार ने लागू किया है , वरना पहले किसी भी सरकार ने OROP के नाम पर 1 रु भी नही दिया ।

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किसान गजेंद्र सिंह के परिजनों का सीएम केजरीवाल पर हमला दिल्ली में आप की रैली में खुदकुशी करने वाले किसान गजेंद्र सिंह के परिवार ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है...

किसान गजेंद्र सिंह के परिजनों का सीएम केजरीवाल पर हमला
Posted on: November 04, 2016 IBNKHABAR.COM
नई दिल्ली। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की रैली में खुदकुशी करने वाले किसान गजेंद्र सिंह के परिवार ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। गजेंद्र सिंह के भाई विजेंद्र सिंह ने कहा है कि रामकिशन ग्रेवाल को एक करोड़ की आर्थिक मदद का दिल्ली सरकार ने ऐलान किया लेकिन गजेंद्र सिंह के परिवार को दिल्ली सरकार ने आर्थिक मदद नहीं की, जो पार्टी की रैली के दौरान ही पेड़ पर फंदे पर झूल गया था।
अप्रैल 2015 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर ही आप की किसान रैली में पार्टी नेता मंच से भाषण दे रहे थे जब मंच से कुछ ही दूरी पर किसान गजेंद्र सिंह ने पेड़ पर चढ़कर आत्महत्या कर ली थी। गजेंद्र ने आत्महत्या करने से पहले इसकी धमकी भी दी थी लेकिन किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। अब दिल्ली सरकार के रवैये को लेकर गजेंद्र के परिवार का दर्द बाहर आया है।

दिल्ली के जंतर मंतर पर रिटायर्ड फौजी रामकिशन ने बीते मंगलवार को जहर खाकर खुदकुशी कर ली है। वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर एक पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल ने मंगलवार रात आत्महत्या कर ली। रामकिशन सोमवार को साथियों के साथ छठे और सातवें वेतन आयोग के मुताबिक बढ़ी हुई पेंशन की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे। 



पुलिस मुठभैड़ और आन्तरिक सुरक्षा - पवन जैन






भोपाल एनकाउन्टर पर मप्र पुलिस के जबांज और विलक्षण प्रतिभा के धनी आईपीएस अधिकारी श्री पवन जैन ने क्या शानदार लिखा है। आप भी पढिए : -

पुलिस मुठभैड़ और आन्तरिक सुरक्षा

  - पवन जैन

    आजकल मध्यप्रदेश की जेल में प्रहरी की जघन्य हत्या कर  फरार हुए 8 अपराधियों की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर तमाम मीडिया, जनवादी संगठनों, राजनेताआें, राष्ट्रवादी और  मौका परस्तों द्वारा घटना के तथ्यों की मनचाही विवेचना कर निष्कर्ष पर पहुंचने की होड़ मची हुई है।निन्दा, आलोचना, दोषारोपण, तोहमत और  कालिख लगाने के लिये पुलिस से बेहतर लक्ष्य कोई दूसरा नहीं हो सकता है।यूं तो पानी, बिजली, सड़क, भ्रष्टाचार,मंहगाई, बेरोजगारी, तमाम समस्याएं हैं, जुलूस, धरने,आंदोलन और प्रदर्शन के लिये, पुलिस न तो इन समस्याआें के कारण में है और न समाधान में, इतना जरूर है कि जब भी इन प्रदर्शनों में जमा भीड़ बेकाबू होती है और हिंसा, तोड़-फोड़ तथा आगजनी पर उतारू हो जाती है तो कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये पुलिस को कमान संभालनी पड़ती है।  हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिये पुलिस को कभी लाठी, कभी अश्रु गैस और कभी गोलीबारी का सहारा लेना पड़ता है। मूल समस्याएं तो उतर जाती हैं लोगों के दिमाग से और पुलिस की ज्यादती जांच का मुद्दा बन जाती है। समस्याआें से ध्यान हटाने का और पुलिस के सिर कालिख पोतने का यह नुस्खा, जो अग्रेजों ने हिन्दुस्तान में आजमाया था, कमोवेश आज भी जारी है।चूक किसी की भी हो, खामियाज़ा पुलिस को ही भुगतना पड़ता है।

भोपाल में भी जेल प्रहरी की निर्मम हत्या कर केन्द्रीय जेल की ऊंची दीवारें फलांग कर फरार हुए इन दुर्दांत अतातायियों  को पकड़ने की जिम्मेदारी भी दीपावली की उस रात  थकी-हारी पुलिस की ही थी। जघन्य अपराध के आदी इन क्रूर हत्यारों को पकड़ने में पुलिस ने कोई कोताही नहीं बरती और कुछ घण्टों में ही  उन्हें धराशायी भी कर दिया। अब सवाल यह है कि अपराधी असली थे और पुलिस भी असली तो फिर मुठभेड़ फर्जी कैसे हो सकती है?जहां जान का आसान्न खतरा हो, वहां क्या पुलिस समुचित बल का प्रयोग भी नहीं कर सकती? जब इस  देश में एक  कानून का तंत्र, लोकतांत्रिक  व्यवस्थाएं, मानव अधिकार के संगठन और स्वतंत्र न्यायपालिका है तो हर कोई अपना निर्णय क्यों सुना रहा है?

पुलिस हमारी आन्तरिक सुरक्षा की पहली दीवार है। आतंकवाद हो या नक्सलवाद, कानून व्यवस्था की चुनौती हो या आपदा की कोई तीज त्यौहार हो या साम्प्रदायिक तनाव, ऐसी तमाम विषम परिस्थितियों की पहली  मार पुलिस ही झेलती है। पिछले 60 सालों में 35000 से ज्यादा  पुलिस के जवानों ने मादरे-वतन  की राह में कर्तव्य की बलवेदी पर   बलिदान किया है - कवि नीरज जी के शब्दों में-
  ’’जली हैं आग में जब जब भी शहर की सड़कें,
       मेरे ही पांव के छालों ने तब नमी की है।’’

पुलिस मुठभेड़ की राष्ट्रव्यापी बहस के तमाम कानूनी पहलू भी हैं। एक संत से सवाल किया गया कि समाज में ऋषि, मुनियों और संतों की जरूरत कब तक है ? तो उन्होंने जवाब दिया कि जब तक दुर्जन और पापी लोग समाज में हैं।  निश्चित रूप से वह एक आदर्श समाज होगा, जहां पुलिस न हो, अपराध न हो, समस्याएं न हों, लेकिन जब तक समाज में अपराधी हैं, तब तक पुलिस की जरूरत भी रहेगी।  मुठभेड़ पर जैसे चाहे, अनचाहे, मनचाहे सवाल कीजिए,  पर आन्तरिक सुरक्षा की पहली दीवार को ध्वस्त करने की कोशिश मत कीजिये।

लेखक मप्र के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं मप्र आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं
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हमारे हर देवी देवता के पास शस्त्र जरूर हैं ! जो सन्देश देते हैं कि शैतान का वध करना व्यवस्था निमार्ण के लिए जरुरी है !! सेना का पुलिस का सरकार का काम व्यवस्था निर्माण करना है ! शैतानी ताकतें किसी भी रूप में हों, उन्होंने कोई भी मुखोटा क्योँ न लगा रखा हो ! उन्हें उनके किये का  दण्ड बेहिचक दिया जाना चाहिए !!
- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा , कोटा , राजस्थान । 
9509559131 
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:: आयी जानकारी ::

इन आतंकियों ने खंडवा में भी किसी सिपाही का गला काटा था??
इन्होंने भोपाल जेल में भी प्रधान आरक्षक शहीद रामशंकर का गला काटा??
ये पहले भी जेल से भागे थे क्या??
आतंकियों के मानवाधिकारों की व्यापक चिंता करने वाले विद्वानों को इन बिंदुओं पर भी थोड़ा प्रकाश नहीं डालना चाहिए क्या??
😡😡😡😡😡
लीजिये प्रस्तुत है उन मासूम और महान आतंकवादियों की जीवनी।
भोपाल जेल से फरार हुए जिन आठों आतंकियों को एनकाउंटर में मारा गया उन पर बम ब्लास्ट, बम बनाने, बैंक डकैती, मर्डर और युवाओं को जेहादी बनाने के आरोप थे। कितने खतरनाक थे आठों आतंकी…
अब्दुल मजीद
- मजीद उज्जैन के महिदपुर का एक इलेक्ट्रीशियन था। वह रॉड बम बनाने में माहिर था।
- बाद में वह सिमी की स्लीपर सेल का मेंबर बन गया। कई तरह के बम को तैयार करने और उनकी सप्लाई में शामिल हो गया।
- 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया। इस ऑपरेशन में पुलिस को विस्फोटक से भरे पांच ड्रम और जिलेटिन की रॉड मिली थीं।
- 2013 में महाराष्ट्र के सोलापुर से बम बरामद हुए थे। जांच में पता चला कि इन्हें मजीद ने ही तैयार किया था।
मेहबूब गुड्डू
- खंडवा का रहने वाला था। अबू फैजल का करीबी था। अबू खुद को मध्य प्रदेश सिमी का चीफ बताता था।
- गुड्डू 2009 के एक ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी था। उसने स्टेट एटीएस के कॉन्स्टेबल सीताराम यादव, एक बैंक मैनेजर और एक वकील का कत्ल किया था।
- वह 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का भी आरोपी था। उस पर 2011 में रतलाम में एक एटीएस कॉन्स्टेबल के मर्डर में शामिल होने का भी आरोप था।
- खंडवा जेल से फरार होने के बाद गुड्डू एक आईईडी बनाते समय झुलस गया था।
- गुड्डू को उसकी मां नजमा बी और तीन दूसरे साथियों के साथ फरवरी 2016 में उड़ीसा के राउरकेला से गिरफ्तार किया गया था।
जाकिर हुसैन
- जाकिर हुसैन उर्फ विक्की डॉन उर्फ विनय कुमार खंडवा में सैल्स टैक्स कॉलोनी के पास झुग्गीबस्ती का रहने वाला था।
- सिमी के कॉन्टेक्ट में होने की वजह से पहली बार उसे 2008 में पकड़ा गया। उस पर 2008 से 2011 के बीच देवास, इटारसी और कटनी में बैंक डकैती का आरोप था।
- 2010 में भोपाल की मणप्पुरम गोल्ड फाइनेंस कंपनी में हुई डकैती में भी वह शामिल था। इस कंपनी से 12 किलो सोना लूटा गया था।
- मध्य प्रदेश एटीएस ने उसे सिमी के कुछ और मेंबर्स के साथ 2011 में गिरफ्तार किया था। यह सिमी के उन आतंकियों में शामिल था, जो खंडवा जेल से 2013 में फरार हुए थे।
- हुसैन पर 2014 में तेलंगाना में एसबीआई की करीमनगर ब्रांच से 46 लाख रुपए लूटने का भी आरोप था। उसे भी राउरकेला से ही पकड़ा गया था।
अमजद खान
- अमजद खान उर्फ पप्पू उर्फ उमर चीरा खदान खंडवा का रहने वाला था। अमजद और शेख मेहबूब पर बीजेपी के काउंसलर प्रमोद तिवारी पर जानलेवा हमला करने का आरोप था।
- 27 साल के अमजद को मणप्पुरम फाइनेंस में हुई लूट के मामले में जून 2011 में गिरफ्तार किया गया था।
- अमजद 2008 से 2011 के बीच मध्य प्रदेश में हुईं कुछ बैंक डकैतियों में भी शामिल था। खंडवा जेल से फरार हुए सात आतंकियों में अमजद भी शामिल था।
- उसे भी राउरकेला से गिरफ्तार किया गया था।
मोहम्मद अकील खिलजी
- खंडवा का रहने वाला था। 2012 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से गिरफ्तार किया गया था।
- 2011 में खिलजी के घर से सिमी के 10 आतंकी पकड़े गए थे। आरोप है कि वे बीजेपी और आरएसएस के नामी नेताओं के कत्ल का प्लान बना रहे थे।
- खिलजी पर खंडवा में सिमी का बेस बनाने का आरोप था।
मोहम्मद खालिद अहमद
- खालिद महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का रहने वाला था। दिसंबर 2013 में उसे अबू फैजल के साथ मध्य प्रदेश में बड़वानी जिले के सेंधवा से गिरफ्तार किया गया था। अबू फैजल खंडवा जेल से फरार आतंकियों का मुखिया था।
- मध्य प्रदेश एटीएस की पूछताछ में खालिद ने कबूल किया था कि उसने उस समय के केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और उनकी बेटी के कत्ल का प्लान बनाया था।
मोहम्मद सालिक
- सालिक का एक भाई पहले पुलिस कॉन्स्टेबल था। सालिक खंडवा के गुलशन नगर का रहने वाला था और सिमी का कट्टर आतंकी था।
- 2011 में पुलिस ने खंडवा की गुलमोहर कॉलोनी के एक मकान पर छापा मारा तब सालिक फरार हो गया था।
- 2013 में जब सिमी आतंकी खंडवा जेल से फरार हुए तो दाे साल छुपे रहने के बाद सालिक उनके साथ हो लिया।
- सालिक को भी राउरकेला से फरवरी में गिरफ्तार किया गया था।
मुजीब शेख
- मुजीब शेख आतंकी गुट इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से भी जुड़ा था।
- उसे सिमी और आईएम के सात आतंकियों के साथ जून 2011 में जबलपुर से गिरफ्तार किया गया था।
- बाद में पता चला कि वह 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट करने वालों में मुजीब शामिल था।
- उसने सूरत में बम लगाए थे और जिहादी एक्टिविटीज के लिए युवाओं को ट्रेनिंग दी थी।
सिमी बन गया था इंडियन मुजाहिदीन
- इंडियन मुजाहिदीन को सिमी और पाकिस्तानी टेरेरिस्ट ग्रुप लश्कर का मुखौटा माना जाता है।
- कहा जाता है कि सिमी पर बैन लगने के बाद इसके मेंबर्स ने इंडियन मुजाहिदीन नाम से नया गुट बना लिया था।
- इन्वेस्टिगेटर्स मानते हैं कि आईएम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारों पर चलता है। अब यह सिमी से भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।
- जून 2010 में भारत ने आईएम पर बैन लगा दिया। अक्टूबर 2010 में न्यूजीलैंड ने आईएम को टेरोरिस्ट ग्रुप डिक्लियर किया। 2011 में अमेरिका ने उसे फॉरेन टेरोरिस्ट ग्रुप की लिस्ट में शामिल किया।
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दिग्विजयसिंह ने कहा मोदी को युद्ध का सौदागर!

राहुल गांधी ने कहा मोदी को खून का दलाल! और फिर अखिलेश यादव ने किया बयान का समर्थन!

केजरीवाल ने सेना व पीएम से माँगे सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत!

संजय निरुपम ने कहा सर्जिकल स्ट्राइक फ़र्जी है!

आज से 2500 साल पहले चाणक्य ने बिलकुल सही कहा था, "जब गद्दारों की टोली में हाहाकार हो तो समझ लो देश का राजा चरित्रवान और प्रतिभा संपन्न है और राष्ट्र प्रगति पथ पर अग्रसर है!"

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