सोमवार, 14 नवंबर 2016

नोट बंदी : पुनर्निर्माण



काले धन की नसबंदी 

अंशुमान तिवारी @anshuman1tiwari
नई दिल्ली, 12 नवम्बर 2016 |


कुछ फैसलों का फैसला समय पर छोड़ देना चाहिए 2016 में एक औसत पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी मानेगा कि छोटा परिवार सुखी होता है लेकिन '70 के दशक के शुरुआती वर्षों में जब इंदिरा और संजय गांधी नसबंदी थोप रहे थे, तब तस्वीर शायद नोट बंद होने की अफरातफरी जैसी ही रही होगी. इतिहास ने इंदिरा-संजय को खलनायक दर्ज किया लेकिन परिवार नियोजन जरूरी माना गया. काला धन रोकने के लिए अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए विकलांग बना देने के फैसले पर अंतिम निर्णय तो समय को देना है लेकिन फिलहाल यह फैसला बिखराव और अराजकता से भरपूर है, हालांकि इसी कोलाहल में पुनर्निर्माण के संकेत भी मिल जाते हैं.

फिलहाल भारत किसी वित्तीय आपदा या बैंकों की तबाही से प्रभावित देश (हाल में ग्रीस) की तरह नजर आने लगा है, जहां बैंक व एटीएम बंद हैं, लंबी कतारे हैं और लोग सीमित मात्रा में नकद लेने और खर्च करने को मजबूर हैं. ऐसे मुल्क में जहां बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था नकदी पर चलती हो, 50 फीसदी वयस्क लोगों का बैंकों से कोई लेना-देना न हो और बड़े नोट नकद विनिमय में 80 फीसदी का हिस्सा रखते हों वहां सबसे ज्यादा इस्तेमाल वाले नोटों को कुछ समय के लिए अचानक बंद करना विध्वंस ही होगा न! खास तौर पर तब जबकि रिजर्व बैंक की नोट मुद्रण क्षमताएं सीमित और आयातित साधनों पर निर्भर हैं.

वैसे इस अफरातफरी का कुल किस्सा यह है कि सरकार को नए डिजाइन के नोट जारी करने थे. नकली नोट रोकने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय सहमतियों के तहत रिजर्व बैंक ने सुरक्षित डिजाइन (ब्लीड लाइंस, नंबर छापने का नया तरीका) की मंजूरी लेकर तकनीक जुटाने का काम पिछले साल के अंत तक पूरा कर लिया था. नए नोटों को रिजर्व बैंक के नए गवर्नर (राजन के बाद) के हस्ताक्षर के साथ नवंबर 2016 में जारी किया जाना था. इसमें 2,000 रु. का नया नोट भी था. इसी क्रम में नकली नोटों में पाकिस्तानी हाथ होने की पुष्टि के बाद सरकार ने करेंसी को सुरक्षित बनाने की तकनीक व साजो-सामान को लेकर आयात पर निर्भरता तीन साल में 50 फीसदी घटाने का निर्णय भी किया था.

नए डिजाइन के नोट जारी करने के लिए पुरानी करेंसी को बंद (डिमॉनेटाइज) नहीं किया जाता, बस नए नोट क्रमश: सिस्टम में उतार दिए जाते हैं. लेकिन सरकार ने नोट बंद कर दिए, जिसके कई नतीजों का अंदाज उसे खुद भी नहीं था.

मुसीबतों का हिसाब-किताब 

1. बड़े नोट बंद होने से कुल नकदी (16 लाख करोड़ रु.) में लगभग 14 लाख करोड़ रु. कम हो गए यानी कि एक झटके में अधिकांश मांग को रोककर सरकार ने तात्कालिक मंदी को न्योता दे दिया. करेंसी की आपूर्ति सामान्य होने में लंबा वक्त लगता है, इसलिए मंदी व बेकारी से उबरने में और ज्यादा वक्त लगेगा.
2. कोई भी देश सामान्य स्थिति में अपनी करेंसी (लीगल टेंडर) के इस्तेमाल पर शर्तें नहीं लगाता, मसलन, दवा खरीद सकते हैं पर रोटी नहीं. यह करेंसी संचालन के सिद्धांत के खिलाफ है. ऐसा तभी होता है जब देश की साख डूब रही हो. इसलिए विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया कमजोर हुआ है.
3. करेंसी का प्रबंधन और निर्णय रिजर्व बैंक करता है, इस फैसले से रिजर्व बैंक की स्वायत्तता बाधित हुई है.

इस फैसले के तरीके और तैयारियों को बेशक बिसूरिए लेकिन काले धन की ताकत को कमतर मत आंकिए. देखा नहीं कि घोषणा के बाद लोगों को बमुश्किल दो घंटे मिले थे लेकिन उसी दौरान सोने की दुकानों पर कतारें लग गईं. नोट बंद होने के बावजूद हवाला बाजार में अभूतपूर्व ऊंची कीमतों पर सोने और डॉलर के सौदे होते रहे, जिन्हें रोकने के लिए आयकर विभाग को छापेमारी करनी पड़ी.
काले धन को रोकने की ताजा कोशिशों का रिकॉर्ड बहुत सफल नहीं रहा है. बैंकों, प्रॉपर्टी व ज्यूलरी पर नकद लेन-देन में पैन नंबर की अनिवार्यता से बैंकों में जमा कम हो गया और बाजार में नकदी बढ़ गई. काला धन घोषणा माफी स्कीमें बहुत उत्साही नतीजे लेकर नहीं आईं. अंतत: सरकार ने अप्रत्याशित विकल्प का इस्तेमाल किया, जिससे करीब तीन लाख करोड़ रु. की काली नकदी खत्म होने का अनुमान है. इसके साथ ही नए नोट लेने के लिए नकदी लेकर बैंक जा रहे लोगों पर आयकर विभाग की निगरानी हमेशा रहेगी.
बहरहाल, एटीएम पर धक्के खाने और पैसे होते हुए उधार पर सब्जी लेने के दर्द के बावजूद इस फैसले से उठी गर्द के पार देखने की कोशिश भी करनी चाहिए, जहां पुनर्निर्माण की उम्मीद दिखती है.

यह रही पुनर्निर्माण की सूची 

1. बैंकों के लिए पहले आफत, फिर राहत है. फैसला लागू होने के बाद बैंक संचालन शुरू होने के पहले दो दिन में अकेले स्टेट बैंक में ही 55,000 करोड़ रु. जमा हुए, जबकि पूरी एक तिमाही में स्टेट बैंक का कुल जमा 76,000 करोड़ रु. होता है.
2. बकाया कर्जों से कराहते बैंकों के पास डिपॉजिट लौटेंगे और पूंजी की कमी पूरी करेंगे. सरकार की चिंता घटेगी और ब्याज दरें कम होने की उम्मीदें बंधेंगी.
3. प्रॉपर्टी, नकदी और काले धन का गढ़ है. वहां कीमतें औसतन 30 फीसदी टूट सकती हैं. सस्ता कर्ज और सस्ती प्रॉपर्टी वास्तविक ग्राहकों को मकानों के करीब लाकर मांग का पहिया फिर से घुमा सकते हैं.

लेकिन ध्यान रखिए, वित्तीय मामलों में ध्वंस तेज और निर्माण धीमा होता है, इसलिए राजनैतिक-आर्थिक कीमत चुकानी होगी.
फिर भी अगर तकलीफ है तो मोदी सरकार से यह सवाल पूछकर अपनी खीझ मिटाइए:
 नकद राजनैतिक चंदे पर पूर्ण पाबंदी कब तक लगेगी?
 बड़े नोट आने के बाद नकदी लेन-देन की सीमा तय करने में देरी तो नहीं होगी?
सोने की खरीद-जमाखोरी को कैसे रोकेंगे?
खेती की कमाई के जरिए काले धन की धुलाई रोकने की क्या योजना है?

विपक्ष को अपनी ऊर्जा उत्तर प्रदेश व पंजाब के चुनावों का लिए बचानी चाहिए, क्योंकि अगर यहां बीजेपी भारी धन बल और भव्य प्रचार के साथ उतरी तो फिर मान लीजिएगा भारत के राजनेता आम लोगों की कीमत पर किसी भी तरह की सियासत कर सकते हैं.

जरूरी सेवाओं में 24 नवम्बर तक चलेंगे 500-1000 के नोट





अब जरूरी सेवाओं में 24 नवम्बर तक चलेंगे 500-1000 के नोट, ATM से कैश निकालने की लिमिट भी बढ़ी 

aajtak.in [Edited By: अंजलि कर्मकार, नई दिल्ली, 14 नवम्बर 2016 |

      500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने पुराने नोटों की वैधता 10 दिन और बढ़ा दी है. अब अस्पतालों, मेट्रो स्टेशनों, शमशान घाट, दवा की दुकानों, पेट्रोल पंपों में 24 नवंबर तक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट स्वीकार किए जाएंगे.

समीक्षा बैठक में लिया गया फैसला
एएनआई की खबर के मुताबिक, रविवार को पीएम मोदी ने नोटबंदी के बाद आर्थिक मामलों पर समीक्षा बैठक बुलाई थी. इसके बाद ये फैसला लिया गया. समीक्षा बैठक के बाद आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि सभी अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर 500 और 1000 के पुराने नोट चलने की समय सीमा 14 नवंबर से बढ़ाकर 24 नंवबर तक कर दी गई है.

24 नवंबर तक सभी नेशनल टोल फ्री
शक्तिकांत दास ने बताया कि देश के सभी टोल पर 24 नवंबर तक कोई टैक्स भी नहीं लिया जाएगा. बिजली और पानी के बिल जैसे केंद्र सरकार, राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले सभी बिलों का भुगतान 24 नवंबर तक 500 और 1000 के पुराने नोटों से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. आरबीआई के पास पर्याप्त कैश है.

अब एटीएम से रोजाना निकलेंगे 2500 रुपये
500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद नकदी की समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत देते हुए सरकार ने रविवार को एटीएम से धनराशि निकासी की सीमा बढ़ाने का फैसला किया. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अब एटीएम से हर रोज निकासी की सीमा 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है.


बैंक में पुराने नोट बदलने की सीमा भी बढ़ी
वहीं, बैंक काउंटर से पुराने नोटों से नए नोटों को बदलने की सीमा 4,000 रुपये से बढ़ाकर 4,500 रुपये कर दी गई है. वित्त मंत्रालय ने कहा, 'बैंकों को एटीएम से रोजाना निकासी की सीमा बढ़ाकर 2,500 रुपये करने का निर्देश दिया गया है. जबकि बैंक काउंटर से प्रति हफ्ते अधिकतम निकासी की सीमा 20,000 रुपये से बढ़ाकर 24,000 रुपये कर दी गई है. बैंक से प्रतिदिन 10,000 रुपये निकासी की सीमा को हटा दिया गया है.

सीनियर सिटीजन और विकलांगों के लिए होगी अलग लाइन
साथ ही बैंकों को वरिष्ठ नागरिकों और विकलांगों के लिए अलग कतारों की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है. नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंकों के खुलने के चौथे दिन रविवार को भी देशभर में लाखों लोग अमान्य हो चुके नोट बदलवाने, पैसे जमा करवाने और नकद निकासी के लिए बैंकों और एटीएम बूथों पर टूट पड़े.

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चॉपर से शुरू हुई बैंकों को कैश की सप्‍लाई, 
जरूरी सेवाओं के लिए अभी 24 तक चलते रहेंगे बड़े नोट 

अशोक सिंघल [Edited by: लव रघुवंशी] @ashokasinghal2
नई दिल्ली, 14 नवम्बर 2016 |


वित्त सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि रविवार को प्रधानमंत्री ने एक बैठक ली, जिसमें कैश की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि एयर टिकट, रेल टिकट में भी अब पुराने नोट चलेंगे. पोस्ट ऑफिस की शाखाओं में कैश सप्लाई बढ़ाई जाएगी. एटीएम की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. साथ ही देशभर में सभी एयरपोर्ट पर 21 नवंबर तक पार्किंग चार्ज नहीं लेने का आदेश दिया गया है.

वित्त सचिव ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कैश उपलब्धता बढ़ाई जाएगी. रिजर्व बैंक टास्क फोर्स बनाया जाएगा. लोगों की परेशानी दूर करने के लिए हेलिकॉप्टर सेवा की भी मदद ली जा रही है. आरबीआई ने दूर दराज के इलाकों में हेलिकॉप्टर से कैश भेजने की व्यवस्था की है. झारखंड के शहर बोकारो में हेलिकॉप्टर से कैश भेजा गया. RBI ने इसके लिए वायु सेना के हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया.

1. ग्रामीण इलाकों में कैश की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी.

2. रिजर्व बैंक टास्क फोर्स बनाएगा.

3. माइक्रो एटीएम की संख्या बढ़ाई जाएगी.

4. एटीएम की तरह ही काम करेंगे माइक्रो एटीएम.

5. बैंकों और डाकघरों में कैश बढ़ाया जाएगा.

6. जरूरी सेवाओं के लिए अभी पुराने नोट चलेंगे.

7. बैंक की कैश सीमा बढ़ाई जाएगी.

8. कल से एटीएम से निकलेंगे 2000 के नोट.

9. बैंक से हफ्ते में 24 हजार निकाला जा सकता है.

10. एक्सचेंज की सीमा 4500 की गई.

11. दिव्यांगों, बुजुर्गों के लिए होगी अलग लाइन.

12. पेंशनर्स 15 जनवरी तक दे सकेंगे लाइफ सर्टिफिकेट.

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घोटाला करने वाले ही , मोदी जी के खिलाफ हो रहे हैं एकजुट !








भाजपा ने विपक्ष पर बोला हमला,
कहा- घोटाला करने वाले मोदी के खिलाफ हो रहे हैं एकजुट

ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 14 Nov 2016

कालाधन के खिलाफ अभियान के नाम पर मोदी सरकार के 500 और 1000 के नोट को प्रचलन से हटाने के कारण लोगों को हो समस्या पर विपक्ष के हमले पर भाजपा ने पलटवार किया है। पार्टी ने कहा है कि अपने शासनकाल में जम कर घोटाला करने वाले दलों के नेताओं को कालाधन, हवाला रैकेट और आतंकवाद के खिलाफ छेड़े गए मोदी सरकार का अभियान रास नहीं आ रहा।

पार्टी प्रवक्ता सिद्घार्थ नाथ सिंह ने दावा किया कि मोदी सरकार के इस फैसले से विपक्ष बुरी तरह हिल गया है। यही कारण है कि इस फैसले को लोगों से मिल रहे भरपूर समर्थन की अनदेखी कर विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अनाप शनाप आरोप लगा रहा है।

सिंह ने कहा कि विरोध करने वाले वही लोग हैं जिनके शासनकाल में कई घपलों के जरिए जनता की गाढ़ी कमाई लूट ली गई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि दरअसल उन्हें नारद घोटाला मामले की चिंता सता रही है। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का निर्णय देशहित में है। यह निर्णय आतंकवाद, कालाधन धन रखने वालों और हवाला रैकेट चलाने वालों के खिलाफ है। लोग सच्चाई समझ रहे हैं, इसलिए खुल कर इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। विपक्ष इस फैसले को मिल रहे जनसमर्थन से बौखला कर राजनीति कर रहा है। इस दौरान सिंह ने जल्द ही लोगों को हो रही परेशानी दूर होने की उम्मीद जताई।

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नोटबंदी पर सरकार नहीं करेगी सरेंडर, पीएम बोले- देश हमारे साथ, विपक्ष रणनीति में जुटा कालेधन के खिलाफ मुहिम को अंजाम तक पहुंचाएंगे

aajtak.in [Edited By: अमित दुबे] नई दिल्ली, 14 नवम्बर 2016 |

मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट पर पाबंदी के बाद से ही विपक्ष ने हमलावार रुख अपना लिया है. तमाम पार्टियां अब इस मुद्दे को लेकर सरकार को संसद में घेरने की तैयारी में है. वहीं सरकार ने पलटवार के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है.

खबरों की मानें तो नोटबंदी पर विपक्ष के तेवरों के आगे सरकार खुद सरेंडर नहीं करेगी. सूत्रों के मुताबिक संसदीय कमेटी बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि देश की जनता हमारे साथ है. हालांकि सर्वदलीय बैठक में सरकार सभी पर विपक्ष को चर्चा का भरोसा दिया और कहा कि उसे विपक्ष से उम्मीद है कि सदन में उनका पूरा सहयोग मिलेगा.

संसदीय कमेटी बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अगर विपक्ष हावी होने की कोशिश करेगा तो उन्हें जवाब दिया जाएगा. वहीं पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के पास कोई बड़ा मुद्दा नहीं है इसलिए वो संसद की शीलकालीन सत्र में नोटबंदी, OROP और सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा.

इस बीच केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि पीएम मोदी के फैसले के साथ पूरा देश खड़ा है. चाहे वो सीमा पर आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा हो या फिर कालेधन पर लगामे लगाने के लिए 500 और 1000 के नोट पर बैन का फैसला. नायडू ने बताया इन दोनों मुद्दों पर एनडीए के घटक दलों ने भी पीएम मोदी को अपना पूरा समर्थन दिया. वहीं केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि विपक्ष जितना चाहे शोर मचा ले कालेधन के खिलाफ मुहिम को अंजाम तक पहुंचाएंगे.

विपक्ष सरकार के खिलाफ एकजुट
दरअसल नोटबंदी को लेकर विपक्ष अब संसद में सरकार को घेरने की तैयारी में है. इस को ध्यान में रखते हुए शीलकालीन सत्र से पहले तमाम दलों ने बैठक की. बैठक में कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, जेडीयू, जेएमएम समेत वामदल के तमाम बड़े नेता शामिल हुए. खबरों की मानें तो विपक्ष का कहना है कि सरकार ने बिना तैयारी नोट पर पाबंदी लगा दी है. विपक्ष की मांग है कि जनता की परेशानी को देखते हुए मोदी सरकार को नोटबंदी पर अपना फैसला वापस लेना चाहिए.

विपक्ष का आरोप है कि सरकार के इस कदम पूरे देश में हाहाकार मचा है और लोग बेहद परेशान हैं. इसले अलावा सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सरकार ने जवाब मांगने की तैयारी में हैं विपक्षी पार्टियां. सरकार पर संसद पर दबाव बनाने की रणनीति को लेकर मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी मुलाकात करेंगी.

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