शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

नोटबंदी पर विरोधी इसलिए दुखी क्योंकि उन्हें वक्त नहीं मिला : पीएम मोदी




नोटबंदी पर विरोधी इसलिए दुखी क्योंकि उन्हें वक्त नहीं मिला : पीएम मोदी
 November 25, 2016

नई दिल्‍ली : नोटबंदी के मुद्दे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फिर अपनी राय रखी और इस फैसले के आलोचकों को करारा जवाब दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो लोग सरकार पर नोटबंदी के लिए तैयारी नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं, वे खुद इस कदम के लिए तैयार नहीं थे। पीएम ने मनमोहन सिंह के आरोपों पर भी पलटवार किया।
संविधान दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नोटबंदी के फैसले की आलोचना करने वालों को जमकर आड़े हाथों लिया। बता दें कि गुरुवार को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि जनता के पैसे की संगठित लूट हो रही है। नोटबंदी का फैसला बिना पूरी तैयारी के लिया गया।
नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सरकार पर हमला तेज किये जाने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इन लोगों को 72 घंटे का वक्त मिल जाता तो वे प्रशंसा करते। यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों को अमान्य करने के फैसले की बहुत कम आलोचना हुई है। उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ लोग अब भी आलोचना कर रहे हैं कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की। मेरा मानना है कि मुद्दा यह नहीं है कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की थी। बल्कि मुझे लगता है कि ऐसे लोगों को इस बात की पीड़ा है कि सरकार ने उन्हें किसी तैयारी का मौका नहीं दिया। मोदी ने कहा कि अगर इन लोगों को तैयारी करने के लिए 72 घंटे मिल जाते तो वे तारीफ करते कि मोदी जैसा कोई नहीं है।

नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा कि इस फैसले की आलोचना करने वालों को इस बात की पीड़ा है कि उन्‍हें समय नहीं दिया गया। आलोचना करने वाले कह रहे हैं कि इस फैसले को लेने से पहले पूरी तैयारी नहीं की गई। अगर उन्‍हें 72 घंटे का वक्‍त देते तो वो मेरी वाहवाही करते। विरोधी इसलिए दुखी हैं क्‍योंकि उन्‍हें समय नहीं मिला। यदि नोटबंदी का फैसला अचानक नहीं लेता तो लोग अपना कालाधन बदल लेते। हमने भ्रष्‍टाचारियों को तैयारियों का मौका नहीं दिया। ऐसे में अब
विपक्ष नोटबंदी की आलोचना कर रहा है। इस समय कालेधन और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ देश लड़ाई लड़ रहा है। कालेधन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि आपकी पाई-पाई पर आपका पूरा हक है। हर किसी को उसके पैसे का पूरा अधिकार है।
उन्‍होंने नोटबंदी के फैसले की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे नगरपालिकाओं को रिकार्ड टैक्‍स मिला। नगरपालिकाओं को टैक्‍स के तौर पर करोड़ों रुपये मिले हैं। नोटबंदी का सबसे ज्‍यादा फायद नगरपालिकाओं को मिला है, नोटबैन से नगरपालिकाएं मालामाल हो गईं हैं।
पीएम ने कहा कि देश के विकास के लिए डिजिटल करेंसी जरूरी है। इस समय कुछ वक्‍त की दिक्‍कत है लेकिन हमें कैशलेश इकोनॉमी की तरफ बढ़ना होगा। डिजिटल करेंसी की ओर जाने की जरूरत है। साथ ही करेंसी में ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए। देश बहुत बड़ा है और दिक्‍कतों को मिल जुलकर खत्‍म करना है। हम सब मिलकर सामाजिक बुराइयों को दूर करें। आज देश का हर नागरिक सिपाही की तरह लड़ रहा है। आम आदमी भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ सैनिक बन चुका है। भ्रष्टाचार को लेकर भारत की स्थिति अक्सर खराब बताई जाती है, हमें इसमें सुधार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल में कानूनों और संविधान का दुरुपयोग करने वालों ने देश को भ्रष्टाचार में डुबो दिया है। वैश्विक भ्रष्टाचार सर्वेक्षणों में भारत का नाम प्रमुखता से आने को गर्व नहीं करने की बात बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का नाम उंचा करने के लिए कुछ फैसले लेने होंगे। प्रधानमंत्री के ये बयान कल राज्यसभा में नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमले की पृष्ठभूमि में आये हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल उच्च सदन में कहा था कि सरकार का यह कदम ‘संगठित और कानूनी लूट-खसोट’ है।
डिजिटल लेनदेन पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सभी को अपने धन का इस्तेमाल करने का अधिकार है और कोई उन्हें नहीं रोकता। यह जरूरी नहीं है कि आपके पास नकदी हो क्योंकि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके भी लेनदेन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल से खरीदारी करना व्हाट्सएप संदेश भेजने की तरह ही आसान है। मोदी ने कहा कि हमें पारदर्शिता लाने के लिए ट्रांजेक्शन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि करीब 500 शहर छोटी सी अवधि में यह काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक नोटबंदी के बाद नगर निगमों ने 13000 करोड़ रुपये का कर एकत्रित किया है। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ शहरों के नगर निगमों के बारे में जानकारी मिली है। पहले वे 3000 से 3500 करोड़ रुपये कर वसूलते थे और आठ नवंबर के बाद उन्होंने 13000 करोड़ रुपये कर वसूली की है। इस पैसे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण और बिजली आपूर्ति जैसे विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। मोदी दो पुस्तकों के विमोचन के मौके पर संबोधित कर रहे थे। इनमें ‘अपडेटेड एडिशन ऑफ कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ और ‘मेकिंग ऑफ द कांस्टीट्यूशन’ हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के अनेक अनुच्छेदों के बारे में केवल जानकारी रखने के बजाय ‘संविधान की भावना’ से जुड़े रहना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने युवा पीढ़ी के संविधान और उसके आदर्शों से जुड़ाव होने के महत्व पर भी जोर दिया।
इससे पहले, पीएम मोदी ने संविधान दिवस पर दो पुस्‍तकों का विमोचन किया। 'भारत का संविधान' के नए संस्‍करण का विमोचन किया। उन्‍होंने कहा कि अधिकारों के लिए संविधान का दुरुपयोग न करें। छात्रों को संविधान की प्रस्‍तावना पढ़ाई जाए। सामान्‍य जीवन में संविधान का स्‍थान बने। संविधान के निर्माण में बाबा साहब अंबेडकर ने हमारे लिए महान काम किया है। 

इन दिनों भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ देश लड़ाई लड़ रहा है - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


भारत का आम नागरिक भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक सिपाही बन गया है: प्रधानमंत्री
November 25, 2016

It is because of 26th November that we celebrate 26th January as our Republic Day: PM Modi

Every person has the right to spend his or her money and no one can stop them in doing so: PM Modi

Due to demonetisation a few people were facing the heat as they didn’t get time to prepare: PM Modi

The common citizen of India has become a soldier against corruption and black money: PM




आदरणीय सुमित्रा जी एवं उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव

26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में मनाना 2015 से प्रारंभ किया| कल्पना ये है कि हमारी नई पीढ़ी इस सविंधान के साथ उसकी प्रक्रिया के साथ उसके उद्देश्‍यों के साथ कनेक्‍ट रहनी चाहिए | ऐसा न हो कि सब कुछ चलता है लेकिन कैसे चलता है पता ही न हो| और ऐसी चीजों का एक निरंतर पुन: स्‍मरण आवश्‍यक होता है | जो मूल तत्‍वों का बार बार स्‍मरण करते हैं तो तत्‍कालीन समय के संदर्भ में करते हैं।

जिस विषय का अर्थ आज से 40 साल पहले होता होगा हो सकता है उसी बात का अर्थ दस साल के बाद अलग रूप में दिखेगा एक progressive format होता है लेकिन वो तब होता है जब इन मूलभूत चीजों के साथ हम हर चीज को कसते रहेगें, तौलते रहेंगें। हमारे स्कूल कॉलेजो के सभी बालकों को संविधान का preamble कम से कम साल में एक बार सामूहिक रूप से उसका पठन हो, उद्घोष हो, व्याख्या हो इससे लाभ ये होगा कि संविधान के महात्मय का सामान्‍य जीवन में एक स्‍थान बनेगा | बहुत कम देशों के जीवन में ऐसी घटना शायद घटती है कि जिसमें संविधान का उल्‍लेख बार-बार आता है लेकिन भारत एक देश ऐसा है कि जहां जब-जब हम संविधान का स्‍मरण करते हैं हमें डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर का पुण्य स्मरण साथ-साथ याद आता है यानि बाबा साहेब और संविधान| संविधान यानि बाबा साहेब, बाबा साहेब यानि संविधान| ऐसी जीवन की सिद्धि किसी भी व्यक्ति के जीवन में असंभव है जो बाबा साहेब अम्बडेकर के जीवन में हम आज अनुभव कर रहे हैं बाबा साहेब ने नहीं कहा था| उनके कालखंड में शायद किसी ने इतना recognize भी नहीं किया होगा लेकिन जैसे समय बीतता गया हम सबको लग रहा है कि कितना महान काम हम लोगों के लिए हो रहा है|

संविधान, समय ऐसा बदला है कि संविधान में तो हर कोई अपने अधिकार ढूंढता रहता है अपने अधिकारों को और अधिक हवा भरने का भी प्रयास करता है | बड़े चतुर लोग संविधान को ही आधार बनाकर के अधिकार का दुरूपयोग करने की हद तक भी कभी-कभी सीमांए लांघ देते हैं| इससे एक anarchy पैदा होती है और बाबा साहेब अम्बेडकर grammar of anarchy की बात करते थे| ये हम सबका दायित्व होता है नागरिक हो , शासन व्यवस्था हो सरकार हो, शासन व्यवस्था के भिन्‍न-भिन्‍न अंग हों। हर एक के बीच तालमेल बिठाने का सबसे बड़ा अगर source है तो हमारा संविधान है| Lubrication करने की ताकत भी है तो संविधान में हैं, रक्षा करने की ताकत है तो वो संविधान में है और इसलिए इन संविधान की आत्‍मा के साथ हमारा जुड़ना बहुत जरूरी है, सिर्फ धाराओं के साथ जुड़ने से बात चलती नहीं है | Spirit of the constitution और इसलिए आज उसकी प्रोसेस की जो किताब निकली है वो शायद spirit of the constitution के लिए उस एक पन्ने को खोलने के लिए शायद हमें काम आ सकता है तो मैं इसका भी स्वागत करता हूं|

ये बात सही है कि देश आजाद हुआ कर्तव्य भावना की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति के बाद| देश का हर नागरिक आजादी के आंदोलन को अपना कर्तव्य मानता है| देश आजाद होने तक कर्तव्य का भाव इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा था जो बेमिसाल था और शताब्दी से भी ज्‍यादा अधिक समय तक वो भाव लोग जीते थे। लेकिन आजादी के तुरंत बाद उस ऊंचाई से अचानक हम ऐसे नीचे आए कि कर्तव्‍य का सारा भाव अधिकार में परिवर्तित हो गया और अघिकार, हक, मेरा क्या इसने इस प्रकार से जीवन को ग्रथित कर लिया कि कर्तव्य का लोप होता चला जा रहा है |

हम संविधान के माध्यम से कर्तव्‍य और अधिकार का संतुलन कैसे बिठाए देश के सामने चुनौती है| और उस दिशा में इस प्रकार के प्रयत्नों से रास्‍ते खोजे जा रहे हैं| हम 26 जनवरी बड़े गर्व के साथ मनाते हैं लेकिन हम न भूलें कि 26 नवंबर के बिना 26 जनवरी अधूरी है | 26 जनवरी की ताकत 26 नवंबर में है और इसलिए इस 26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में नई पीढ़ी के लिए विशेष रूप से उसका पुण्‍य स्मरण करते हुए उसकी बारिकियों को जानने का प्रयास अलग-अलग जगह पर अलग-अलग काम हो करते रहना चाहिए|

ऑनलाइन काम्पीटिशन हो कभी संविधान पर बालकों के लिए essay writing competition हो| यही चीजें हैं आखिरकर लोगों को इसके साथ जोड़ती है| इन दिनों भ्रष्टाचार, काला धन उसके खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई है देश लड़ रहा है देश का सामान्य नागरिक इस लड़ाई का सिपाही बना है | उसको लगता है कि सत्तर साल तक इसी कानूनों नियमों का दुरूपयोग करने वालों ने देश को भ्रष्टाचार में डुबो दिया है | संविधान कानून का दुरूपयोग करके किया है | इस सरकार के इस निर्णय के संबंध में बहुत कम आलोचना हो रही है लेकिन कुछ लोगों की आलोचना क्या है, आलेचना ये है कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की।

मैं समझता हूं कि मुद्दा ये नहीं है कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की। ऐसे लोगों की पीड़ा इस बात की है कि सरकार ने किसी को तैयारी करने का समय नहीं दिया। दुख इस बात का है अगर उनको एक 72 घंटे भी तैयारी के मिल जाते तो तो वाह-वाह मोदी जैसा कोई नहीं, कितना बड़ा अहम कदम उठाया है और इसलिए फिर भी इतना बड़ा देश है निर्णय बहुत बड़ा है देश का उज्‍जवल भविष्‍य देखनें वालो से इतनी अपेक्षा है कि आइए हम सब मिलकर के सामान्‍य मानवीय की कठिनाइयों को दूर करें| इस महायज्ञ में सफल होकर के विश्‍व के सामने भारत को एक ताकतवर देश के रूप में हम उभारें, सारा देश, सारी दुनिया जब सर्वे होता है भ्रष्‍टाचार की कतार में बहुत अग्रिम पंक्ति में भारत का नाम नजर आता है, भारत को नीचा देखना पड़ता है। हमने गर्व से माथा ऊंचा करना है और इसलिए फैसले लेने होते हैं और फैसलों को अनुपालन करके सिद्धियां भी प्राप्‍त करनी होती हैँ और मैं निमंत्रण देता हूं सभी राजनीतिक दलों को सामाजिक संस्‍थाओं को, मीडिया को दूसरा डिजिटल करेंसी हर किसी को उसके पैसों का हक है, हर किसी को उसके पैसों को उपयोग करने का हक है कोई रोकता नहीं है लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार नोट हाथ में हो तभी उपयोग हो आज व्‍यवस्‍थाएं बहुत उपलब्‍ध है| आप अपने मोबाइल फोन से भी अपने सारे रुपये जहां खर्च करने हैं कर सकते हो, आपके पाई-पाई पर आपका हक है मैं इस माध्‍यम से जब संविधान की चर्चा हो रही है संविधान इन व्‍यवस्‍थाओं को विरक्षक है।

मैं देशवासियों से और खासकर के समाज का नेतृत्‍व करने वाले हर शख्‍स से मैं मीडिया से आग्रह करता हूं जिस देश के पास पैंसठ प्रतिशत नौजवान हो 35 से कम उम्र के नौजवान हो, जिस देश में 100 करोड़ से ज्‍यादा मोबाइल फोन हो जिस देश में अब टेक्‍नोलॉजी मोबाइल फोन से भी कारोबार करने के लिए सुविधा उपलब्‍ध हो सभी बैंक की अपनी एप हो तो हम क्‍यों न लोगों को प्रेरित करें, लोगों को प्रशिक्षित करें और ये कोई कठिन काम नहीं है जब आज हम व्‍हाटपअप कहां सीखने गये थे कि किसी इंजीनियर कॉलेज में जाकर के आइटी कॉलेज में जाकर के अनपढ़ भी अनपढ़ आदमी को मालूम है कि व्‍हॉटसअप कैसे देखना है व्‍हॉटसअप कैसे फॉरवर्ड करना है जितनी सरलता से व्‍हॉटसअप फॉरवर्ड होता है उतनी ही सरलता से हम शॉपिंग भी कर सकते हैं अपने मोबाइल फोन से| देश का उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए हमने ट्रांसपेरेंसी लाने की आवश्‍यकता है, डिजिटल करेंसी की ओर जाने की आवश्‍यकता है और हिन्‍दुस्‍तान की 500 शहर, 500 शहर अगर एक हफ्ते में अगर चाहे तो इस काम को कर सकते हैं। आपको हैरानी होगी 8 नवंबर के इस निर्णय के परिणाम का सबसे बड़ा फायदा किसने उठाया मैंने कल हिसाब लिया |कुछ नगरपालिका, महानगरपालिकाओं का बहुत कम ईनी-गिनी पलिका, महानगरपालिका | कोई 40-50 का मुझे बताया गया | पहले तीन साढे तीन हजार करोड़ टेक्‍स आता था 8 नवंबर के बाद 13 हजार करोड़ उनके खजाने में जमा हो गया| ये पैसा किसके काम आएगा उस गांव में गरीब बस्‍ती में कहीं रास्‍ते बनेंगे, कहीं बिजली लगेगी कहीं पानी के नल लगेंगे एक समाज जीवन में क्रांति की दिशा में काम कर रहा है| और इसलिए राजनीति के ऊपर भी समाज जिनके बहुत काम करने होते हैं संविधान हमें वो प्ररेणा देता है| संविधान हमें हमारी विरासतों को संभालने की जिम्‍मेदारी देता है| लिखा हुआ है उसमें हमारी महान विरासतों को संभालना ये हमारी जिम्‍मेदारी है|

आइए हम सब मिलकर के बाबा साहेब अम्‍बेडकर ने जो महान कार्य किया है उसके शब्‍दों को और भावों को पीढ़ी दर पीढ़ी समयानुकूल संदर्भ में हम उसको जीके सीखें, जीना सीखें, जीकर के दिखाएं और देश को हर पल नई ताकत, नई ऊर्जा देते रहे|

मैं सुमित्रा जी का हद्य से अभिनंदन करता हूं इस बार पार्लियामेंट नहीं थी 26 तारीख को छुट्टी थी फिर भी उन्‍होंने इस संविधान दिवस के महात्‍मय को बरकरार रखने के लिए इतना बड़ा प्रकल्‍प किया| स्‍टेट में भी उसका initiative लिया गया, स्‍कूल कॉलेज में initiative लिया गया और धीरे-धीरे करके ये भी एक महत्‍वपूर्ण अवसर के रूप में बनेगा ये विश्‍वास है हमें इस समय मुझे आने का अवसर मिला मेरे समय की कठिनाई के कारण आपको भी जरा जल्‍दी-जल्‍दी आना पड़ा इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं|
बहुत-बहुत धन्‍यवाद

'सिंधु का पानी पाक नहीं पंजाब को मिलेगा' - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी




'सिंधु का पानी पाक नहीं पंजाब को मिलेगा'
http://www.bbc.com/hindi/india-38104046



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पंजाब के बठिंडा में एक रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर 'तीखा हमला' किया.

मोदी ने कहा, "सिंधु नदी का जो बूंद-बूंद पानी पाकिस्तान चला जाता है वह पंजाब को मिलेगा. यह पानी पंजाब को मिल जाएगा तो यहां की मिट्टी सोना उगलेगी. कोई कारण नहीं है कि हम अपने हक़ का इस्तेमाल न करें और हमारे किसान पानी के लिए तड़पते रहें."
मोदी ने कहा, "पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राइक से जो जख़्म मिला है, वो उससे उबर नहीं पाएगा."
उन्होंने पाकिस्तानी जनता से 'आग्रह' किया कि वे अपने शासकों से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कहें. नरेंद्र मोदी के भाषण की छह अहम बातें.
1. सिंधु नदी का जो बूंद-बूंद पानी पाकिस्तान चला जाता है वह पंजाब को मिलेगा. यह पानी पंजाब को मिल जाएगा तो यहां की मिट्टी सोना उगलेगी.
2. कोई कारण नहीं है कि हम अपने हक का इस्तेमाल न करें और हमारे किसान पानी के लिए तड़पते रहें
3. पेशावर में स्कूल पर हमला हुआ तो सभी भारतीय दुखी थे. पाकिस्तानी जनता अपने शासकों से कहे कि वह भ्रष्टाचार से लड़े.
4. सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को गहरी चोट लगी है. वह इस झटके से उबर नहीं पाएगा.
5. जब हमारे जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक की तो सीमा पर हड़कंप मच गया.
6. पाकिस्तान को पता है कि हमारी आर्मी की ताकत क्या है.
सिंधु जल संधि को दो देशों के बीच जल विवाद पर एक सफल अंतरराष्ट्रीय उदाहरण बताया जाता है. 56 साल पहले भारत और पाकिस्तान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. दोनों देशों के बीच दो युद्धों और एक सीमित युद्ध कारगिल और हज़ारों दिक्क़तों के बावजूद ये संधि कायम है. विरोध के स्वर उठते रहे लेकिन संधि पर असर नहीं पड़ा.
एक बार फिर कयास लग रहे हैं कि क्या भारत, सिंधु जल समझौता रद्द कर सकता है? बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने किया है इस संधि के तमाम पहलुओं का आकलन
भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में इस साल सितंबर में हुए चरमपंथी हमले के बाद से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है. हमले के बाद विदेश मंत्रालय प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था, "आखिरकार किसी भी समझौते के लिए दोनो पक्षों में सद्भाव और सहयोग की ज़रूरत होती है."
सिंधु बेसिन ट्रीटी पर 1993 से 2011 तक पाकिस्तान के कमिश्नर रहे जमात अली शाह की राय हैं, "इस समझौते के नियमों के मुताबिक कोई भी एकतरफ़ा तौर पर इस संधि को रद्द नहीं कर सकता है या बदल नहीं सकता है. दोनो देश मिलकर इस संधि में बदलाव कर सकते हैं या एक नया समझौता बना सकते हैं."
उधर पानी को लेकर वैश्विक झगड़ों पर किताब लिख चुके ब्रह्म चेल्लानी ने समाचार पत्र 'हिंदू' में लिखा, "भारत विएना समझौते के लॉ ऑफ़ ट्रीटीज़ की धारा 62 के अंतर्गत इस आधार पर संधि से पीछे हट सकता है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों का इस्तेमाल उसके खिलाफ़ कर रहा है. अंततराष्ट्रीय न्यायालय ने कहा है कि अगर मूलभूत स्थितियों में परिवर्तन हो तो किसी संधि को रद्द किया जा सकता है."

सिंधु नदी का इलाका करीब 11.2 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. ये इलाका पाकिस्तान (47 प्रतिशत), भारत (39 प्रतिशत), चीन (8 प्रतिशत) और अफ़गानिस्तान (6 प्रतिशत) में है.
एक आंकड़े के मुताबिक करीब 30 करोड़ लोग सिंधु नदी के आसपास के इलाकों में रहते हैं.
सिंधु जल संधि के पीछे की कहानी.
अमरीका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर इस समझौते की पीछे की कहानी है. ऐरॉन वोल्फ़ औऱ जोशुआ न्यूटन अपनी केस स्टडी में बताते हैं कि ये झगड़ा 1947 में भारत के बंटवारे के पहले से ही शुरू हो गया था, खासकर पंजाब और सिंध प्रांतों के बीच.
1947 में भारत और पाकिस्तान के इंजीनियर मिले और उन्होंने पाकिस्तान की तरफ़ आने वाली दो प्रमुख नहरों को लेकर एक 'स्टैंडस्टिल समझौते' पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार पाकिस्तान को लगातार पानी मिलता रहा. ये समझौता 31 मार्च 1948 तक लागू था.
जमात अली शाह के अनुसार 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ ज़मीन पर हालात खराब हो गए.
भारत के इस कदम के कई कारण बताए गए जिसमें एक था कि भारत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहता था. बाद में हुए समझौते के बाद भारत पानी की आपूर्ति जारी रखने पर राज़ी हो गया.
स्टडी के मुताबिक 1951 में प्रधानमंत्री नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल को भारत बुलाया. लिलियंथल पाकिस्तान भी गए और वापस अमरीका लौटकर उन्होंने सिंधु नदी के बंटवारे पर एक लेख लिखा.
ये लेख विश्व बैंक प्रमुख और लिलियंथल के दोस्त डेविड ब्लैक ने भी पढ़ा और ब्लैक ने भारत और पाकिस्तान के प्रमुखों से इस बारे में संपर्क किया. और फिर शुरू हुआ दोनो पक्षों के बीच बैठकों का सिलसिला.
ये बैठकें करीब एक दशक तक चलीं और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी समझौते पर हस्ताक्षर हुए.

सिंधु जल समझौते की प्रमुख बातें.
1. समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया. सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया.
2. समझौते के मुताबिक पूर्वी नदियों का पानी, कुछ अपवादों को छोड़े दें, तो भारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है. पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए होगा लेकिन समझौते के भीतर कुछ इन नदियों के पानी के कुछ सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया, जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी. अनुबंध में बैठक,साइट इंस्पेक्शन आदि का प्रावधान है.
3. समझौते के अंतर्गत एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना की गई. इसमें दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था. ये कमिश्नर हर कुछ वक्त में एक दूसरे से मिलेंगे और किसी भी परेशानी पर बात करेंगे.
4. अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी डिज़ाइन पर आपत्ति है तो दूसरा देश उसका जवाब देगा, दोनो पक्षों की बैठकें होंगी. अगर आयोग समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पाता है तो सरकारें उसे सुलझाने की कोशिश करेंगी.
5. इसके अलावा समझौते में विवादों का हल ढूंढने के लिए तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता सुझाया गया है.
संधि पर राजनीति.
भारत में एक वर्ग की राय है कि इस समझौते से भारत को आर्थिक नुकसान हो रहा है. जम्मू कश्मीर सरकार के मुताबिक इस संधि के कारण राज्य को हर साल करोड़ों का आर्थिक नुकसान हो रहा है.

संधि पर पुनर्विचार के लिए विधानसभा में साल 2003 में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था. दिल्ली में एक सोच ये भी है पाकिस्तान इस संधि के प्रस्तावों का इस्तेमाल कश्मीर में गुस्सा भड़काने के लिए कर रहा है.
विश्लेषक ब्रह्म चेल्लानी ने अख़बार 'हिंदू' में लिखा, "भारत ने 1960 में ये सोचकर पाकिस्तान के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए कि उसे जल के बदले शांति मिलेगी लेकिन संधि के अमल में आने के पांच साल बाद ही पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर 1965 में हमला कर दिया."
वो कहते हैं कि चीन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बड़े डैम बना रहा है, पाकिस्तान भारत की छोटी परियोजनाओं पर आपत्तियां उठा रहा है.
चेल्लानी कहते हैं कि बड़े देश अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की बात नहीं करते या फिर ट्राइब्युनल का आदेश नहीं मानते जैसा कि चीन ने साउथ चाइन सी पर ट्राइब्युनल के आदेश के बारे में किया.
उधर जमात अली शाह का दावा है कि पाकिस्तान ने इस संधि को लेकर बहुत कुर्बानियां दी हैं.
वो कहते हैं, "जब भारत से ऐसी बातें उठती हैं तो उसका क्या मतलब है? क्या भारत पाकिस्तान का पानी रोक देगा, पाकिस्तान के हिस्से का पानी अपनी नदियों में डाल लेगा? ऐसा करने के लिए योजनाएं रातों-रात नहीं बनतीं. इसकी प्लानिंग होगी और उसके बाद पानी रोकना शुरू होगा. ऐसा होना नामुमकिन बात है."