शनिवार, 26 नवंबर 2016

नोटबंदी : फैसला राष्ट्रीय हित में : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ




नोटबंदी पर मोदी सरकार को मिला आरएसएस का समर्थन, कहा - फैसला राष्ट्रीय हित में
भाषा की रिपोर्ट, अंतिम अपडेट: शनिवार नवम्बर 26, 2016

नई दिल्ली: नोटबंदी के फैसले को उचित ठहराते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शुक्रवार को कहा कि यह पारदर्शी मौद्रिक चलन शुरू करने के 'ईमानदार इरादे' के साथ राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम है जिससे देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित होगी और इसमें तेजी आएगी.

आरएसएस के संचार विभाग के प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि देश में सभी राष्ट्रविरोधी, अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियां अचानक ठहर सी गई प्रतीत होती हैं तथा नतीजतन एक लंबे समय बाद कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति बहाल हुई है.

उन्होंने कहा कि यह जाहिर है कि लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि देश में वित्तीय सुदृढ़ता और जवाबदेही की दिशा में यह एक सख्त कदम है और इसका मकसद अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और जीवंत बनाना है.

वैद्य ने कहा कि नोटबंदी का सरकार का फैसला राष्ट्रीय हित में है. उन्होंने कहा कि इसका असर हर जगह महसूस किया जा रहा है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे देश में पारदर्शिता लाने में सरकार को सहयोग करें.

' नोटबंदी का मोदी का कदम बहुत ही साहसिक है। '- चीन की सरकारी मीडिया



नोटबंदी: भारत के 'जुए' से सबक सीखेगा चीन, 
मोदी के कदम को बताया बहुत साहसिक

पीटीआई | Updated: Nov 26, 2016

पेइचिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को 'बहुत साहसिक' कदम बताते हुए चीन की सरकारी मीडिया ने कहा कि भ्रष्टाचार पर इसके असर से चीन सबक लेगा। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार नोटबंदी चाहे सफल हो या असफल लेकिन इससे एक उदाहरण पेश किया गया है और चीन भ्रष्टाचार पर इसके प्रभावों से जरूर सबक लेगा।

सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' में छपे संपादकीय में लिखा है, ' नोटबंदी का मोदी का कदम बहुत ही साहसिक है। अगर चीन में 50 या 100 युआन के नोट बंद कर दिए जाएं तो, चीन में क्या होगा हम इसके बारे में अभी कल्पना नहीं कर सकते हैं। मोदी ने करंसी रिफॉर्म पर फैसला लेकर एक जुआ खेला है।' गौरतलब है कि 100 युआन चीन की सबसे बड़ी करंसी है।

पत्र आगे लिखता है, 'नोटबंदी की खबर को पूरी तरह गुप्त रखा गया था ताकि इसे लागू करने में कोई दिक्कत नहीं हो। नोटबंदी का यह फैसला ब्लैक मनी को खिलाफ है। हालांकि मोदी इसे लागू करने से पहले दुविधा में थे।'

संपादकीय मे लिखा है, ' भारत में लगभग 90 फीसदी लेन-देन कैश में होता है। देश में कुल कैश का 85 फीसदी नोट 500 और 1000 रुपये के रूप में थे। सरकार के इस फैसले से आम जनता को रोजाना जिंदगी में काफी दिक्कतें भी हुई हैं। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे 'संगठित लूट' तक करार दे दिया।' अखबार लिखता है, 'नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है। लेकिन इसको बढ़ावा देने वाले सामाजिक और राजनीतिक मसले का समाधान मुश्किल है।'

संपादकीय के अनुसार, ' मोदी का नोटबंदी का फैसला एक जुआ है। इसे लागू करने से लेकर आम जनता की बर्दाश्त करने की क्षमता की परख होनी है। उम्मीद है कि इसके फायदे अन्य दूसरी चीजों के असर को कम करने में सफल होगी।' अखबार साथ ही लिखता है कि लोकतंत्र में इस तरह के साहसिक कदम की जगह बहुत कम होती है। नोटबंदी चाहे सफल हो या असफल लेकिन यह एक उदाहरण जरूर पेश करेगा।

अखबार लिखता है, 'सुधार हमेशा से मुश्किल रहा है। मोदी का नोटबंदी का फैसला सही सोच के साथ आया है। लेकिन, इसकी सफलता व्यवस्था और समाज के सहयोग पर निर्भर करती है।' अखबार लिखता है कि चीन में भी पिछले 40 सालों से सुधार का क्रम जारी है। इसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अखबार के मुताबिक ' इसकी सफलता आम जनता के व्यापक समर्थन से ही संभव होती है।'

अनलिमिटेड धन जमा करने पर लगेगा 50 प्रतिशत टैक्स लग सकता है




अनलिमिटेड धन जमा करने पर लगेगा 50 प्रतिशत टैक्स, चार साल की होगी रोक

By haribhoomi.com | Nov 26, 2016

     नई दिल्ली. सरकार संसद के मौजूदा सत्र में कर कानून में संशोधन लाने की योजना बना रही है। इसके तहत नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक घोषित बेहिसाब जमा बैंक राशि पर न्यूनतम 50 प्रतिशत कर लग सकता है। इसके अलावा शेष राशि के आधे हिस्से के निकासी पर चार साल की पाबंदी (लाक इन) होगी।  हालांकि अगर करदाता स्वेच्छा से बेहिसाब राशि के बारे में घोषणा नहीं करता है तो उच्च दर से 90 प्रतिशत कर लगेगा।

        मंत्रिमंडल ने शुक्रवार रात आयकर कानून में संशोधन की जो मंजूरी दी है, उसके तहत पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट निर्धारित सीमा से अधिक जमा करने के बारे में अगर आयकर अधिकारियों के समक्ष घोषणा की जाती है तो उस पर 50 प्रतिशत कर लग सकता है।
       उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार शेष राशि का आधा हिस्सा या मूल जमा का 25 प्रतिशत को चार साल तक निकालने की अनुमति नहीं होगी। उसने बताया कि अगर इस प्रकार के जमा के बारे में घोषणा नहीं की जाती है और उसका पता कर अधिकारियों को चलता है तो कुल 90 प्रतिशत कर और जुर्माना लगाया जाएगा।
    सरकार ने नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से 30 दिसंबर यानी 50 दिन में पुराने नोट जमा करने या उसे नई मुद्रा में बदलने की अनुमति दी है। जहां तक रुपये बदलने की बात है, इसे पहले पहले 2,000 रुपये प्रति व्यक्ति सीमित किया गया और अब इसे वापस ले लिया गया है। वहीं पुराने नोट में कितनी भी राशि बैंक खातों में जमा की जा सकती है।
       सूत्रों ने कहा कि इससे केवल दो सप्ताह में खासकर शून्य खाते वाले जनधन खातों में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए हैं। इससे इन खातों को काले धन के सफेद करने में उपयोग को लेकर आशंका बढ़ी है।
        कर अधिकारियों ने 10 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच 2.5 लाख रुपये से अधिक बेहिसाब जमा पर कर और उस पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाने की बात की थी। बाद में यह महसूस किया गया कि इस प्रकार की बातों के पीछे कोई कानूनी आधार नहीं है।
     इस खामी को दूर करने के लिये ऐसा समझा जाता है कि मंत्रिमंडल ने आयकर कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी। इसके तहत एक उपबंध जोड़ा जाएगा जो मोहलत अवधि के दौरान बेहिसाब आय पर कर लगाने का प्रस्ताव करता है।
          सरकार की संसद के मौजूदा सत्र में मंजूरी के लिये संशोधन लाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार नोटबंदी कालाधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है लेकिन अगर बेहिसाब आय बेनामी जमा के जरिये व्यवस्था में आती है तो मकसद पूरा नहीं होगा। ऐसे में इस पर कर बेईमान लोगों को दंडित करने का तरीका है।

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सावधान !  बेहिसाब राशि की घोषणा पर 50% टैक्स,रूकेगी निकासी

Published : शुक्रवार, 25 नवम्बर 2016

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक जमा की गई बेहिसाब राशि के बारे में अगर कर अधिकारियों के समक्ष घोषणा की जाती है तो उस पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा, चार साल के लिए पैसे की निकासी पर रोक (लाक-इन अवधि) होगी।

अगर घोषणा नहीं की जाती है और कर अधिकारी इसे खोज निकालते हैं तो 60 प्रतिशत टैक्स लगेगा और निकासी पर लंबे समय के लिये रोक होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार रात जो कैबिनेट बैठक हुई,उसमें इस प्रस्ताव पर विचार किया गया। सरकार इसे प्रभाव में लाने के लिये संसद के मौजूदा सत्र में ही आयकर कानून में संशोधन करेगी।

सूत्रों ने कहा कि सरकार नोटबंदी की घोषणा इस बात को लेकर गंभीर है कि 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक 50 दिन की अवधि में सभी बेहिसाब धन बैंक खातों में जमा हो।