मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

जीवट की जयललिता

जीवट की जयललिता 
- अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा राजस्थान 9414180151 
जयललिता जीवट का नाम है, अपराजेय संघर्ष का नाम है,सम्पूर्ण समपर्ण का नाम है , जिसे कदम कदम पर स्वार्थी तत्वों ने छलनी किया मगर वह हारी नहीं उस शख्सियत का नाम है।  और सबसे महत्वपूर्ण यह कि उन्होने भूखों के लिये, गरीवों के लिये, बंचितों के लिये, पिछडों के लिये, वह सब कुछ किया जो आने वाली कई सदियों तक मिशाल रहेगा । में उन्हे शत शत नमन करता हूं।  ओर कबीर के इस दोहे को उन्हे समर्पित करता हूं -                      
]                                 कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये | 
ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये ||



जयललिता
J. Jayalalithaa Biography in Hindi

http://hindi.culturalindia.net/j-jayalalitha.html

जन्म: 24 फरवरी 1948, मैसूर, भारत

कार्य क्षेत्र: पूर्व अभिनेत्री, राजनेता

जयललिता जयराम ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) की महासचिव तथा तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री हैं। वे उन कुछ ख़ास भूतपूर्व प्रतिष्ठित सुपरस्टार्स में से हैं जिन्होंने न सिर्फ सिनेमा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा अर्जित किया बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में भी महत्वपूर्ण रहे हैं। राजनीति में प्रवेश से पहले वे एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ फिल्मों के साथ-साथ एक हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी काम किया है।

सन 1989 में तमिल नाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता बनने वाली वे प्रथम महिला थीं। वर्तमान समय में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीती में जयललिता का ठोस नियंत्रण है। सन 1991 में वे पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। सन 2011 में जनता ने तीसरी बार जयललिता को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री चुना। उन्होंने राज्य में कई कल्याणकारी परियोजनाए शुरू की। अपने शुरूआती कार्यकाल में जयललिता ने जल संग्रहण परियोजना और औद्योगिक क्षेत्र के विकास की योजनाओं जैसे विकास के कार्य किए।

अपने फ़िल्मी कैरियर में उन्होंने सन 1965 से सन 1972 के दौर में ज्यादातर फिल्में एम.जी. रामचंद्रन के साथ की और सन 1982 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भी एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ की। सन 1984 में उन्हें तमिलनाडु से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। सन 1987 में रामचंद्रन के निधन के बाद जयललिता ने खुद को एम.जी. रामचंद्रन का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

अपने राजनैतिक जीवन में जयललिता भ्रष्टाचार के मामलों में विवादों में भी रहीं। भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें कोर्ट से सजा भी हो चुकी है।

प्रारंभिक जीवन
कोमलवल्ली, जिन्हें हम जयललिता के नाम से भी जानते है, का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर में वेदावल्ली और जयराम के घर हुआ था। उनके परिवार का सम्बन्ध मैसूर के राजसी  खानदान से रहा है। उनके दादाजी मैसूर दरबार में शाही चिकित्सक थे और उन्होंने अपने परिवारजनो के नाम के प्रारंभ में ‘जय’ शब्द लगाना प्रचलित किया ताकि लोगों को यह ज्ञात हो कि उनका सामाजिक सम्बन्ध मैसूर के राजा जयचमारराजेंद्र वोडेयार से है। जयललिता जब मात्र दो वर्ष की थीं तब उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद वे अपनी माता और नाना-नानी के साथ रहने बंगलुरु आ गयीं। बंगलुरु में जयललिता ने कुछ साल तक बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल में पढाई की और फिर उनकी माता जी फिल्मो में नसीब आजमाने चेन्नई चली गयीं। चेन्नई आने के बाद उन्होंने चर्च पार्क प्रेजेंटेशन कान्वेंट और स्टेला मारिस कोलेज के शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही जयललिता तेजस्वी विद्यार्थी थी और वे कानून की पढाई करना चाहती थी लेकिन नसीब में कुछ और ही लिखा था। परिवार की आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी माताजी ने उन्हें फिल्मो में काम करने का सुझाव दिया। महज 15 साल की आयु में जयललिता ने अपने आप को प्रमुख अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर लिया।


फ़िल्मी कैरियर
जयललिता ने अपने अभिनय की शुरुआत शंकर वी गिरी की अंग्रेजी फिल्म “अपिस्टल” से की थी पर इस फिल्म से उन्हें कोई पहचान नहीं मिली। सन 1964 में जयललिता की पहली कन्नड़ फिल्म ‘चिन्नाडा गोम्बे’ प्रदर्शित हुई। इस फिल्म की विवेचको ने काफी सराहना की और जनता ने भी इसे बेहद पसंद किया। एक साल के बाद उन्होंने तमिल फिल्म ‘वेंनिरा अडाई’ में काम किया और उसके तुरंत बाद उन्होंने तेलुगु सिनेमा में भी प्रवेश किया। अगले कुछ सालों में तमिल फिल्मो में अपने प्रभावशाली अभिनय के कारण वे एक प्रतिष्ठित कलाकार बन गयीं। सिनेमा के परदे पर एम.जी. रामचंद्रन के साथ उनकी जोड़ी काफी सफल रही और दर्शको ने भी इस जोड़ी को बेहद पसंद किया। उनके फ़िल्मी सफ़र के आखिरी वर्षो में उन्होंने जयशंकर, रविचंद्रन और शिवाजी गणेशन जैसे नामी अभिनेताओ के साथ भी काम किया। सन 1968 में उन्होंने हिंदी फिल्म ‘इज्ज़त’ में काम किया जिसमें धर्मेन्द्र मुख्य अभिनेता थे। 1980 के दशक में उनका फ़िल्मी करिअर थोड़ा धीमा हो गया। उनकी आखिरी फिल्म थी ‘नाधियाई ठेडी वन्धा कदल’ जिसके बाद उन्होंने राजनीति से जुड़ने का फैसला किया।


राजनैतिक जीवन
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (ए.आई.ए.डी.एम.के.) के संस्थापक एम्. जी. रामचंद्रन ने उन्हें प्रचार सचिव नियुक्त किया और चार वर्ष बाद सन 1984 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया। कुछ ही समय में वे ए.आई.ए.डी.एम.के. की एक सक्रिय सदस्य बन गयीं। उन्हें एम.जी.आर. का राजनैतिक साथी माना जाने लगा और प्रसार माध्यमो में भी उन्हें ए.आई.ए.डी.एम.के. के उत्तराधिकारी के रूप में दिखाया गया। जब एम.जी. रामचंद्रन मुख्यमंत्री बने तो जयललिता को पार्टी के महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी। उनकी मृत्यु के बाद कुछ सदस्यों ने जानकी रामचंद्रन को ए.आई.ए.डी.एम.के. का उत्तराधिकारी बनाना चाहा और इस कारण से ए.आई.ए.डी.एम.के. दो हिस्सों में बट गया। एक गुट जयललिता को समर्थन दे रहा था और दूसरा गुट जानकी रामचंद्रन को। सन 1988 में पार्टी को भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत निष्काषित कर दिया गया। सन 1989 में ए.आई.ए.डी.एम.के. फिर से संगठित हो गया और जयललिता को पार्टी का प्रमुख बनाया गया। उसके पश्चात भ्रष्टाचार के कई आरोपों और विवादों के बावजूद जयललिता ने 1991, 2002 और 2011 में विधानसभा चुनाव जीते।

राजनैतिक जीवन के दौरान जयललिता पर सरकारी पूंजी के गबन, गैर कानूनी ढंग से भूमि अधिग्रहण और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। उन्हें ‘आय से अधिक संपत्ति’ के एक मामले में 27 सितम्बर 2014 को सजा भी हुई और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा पर कर्णाटक उच्च न्यायालय ने 11 मई 2015 को बरी कर दिया जिसके बाद वे पुनः तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गयीं।

पुरुस्कार

फिल्म  ‘पत्तिकादा पत्तानमा’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तामिल अभिनेत्री का पुरस्कार
फिल्म ‘श्री कृष्णा सत्या’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तेलुगु अभिनेत्री का पुरस्कार
फिल्म ‘सुर्यकंथी’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ तामिल अभिनेत्री का पुरस्कार
तमिल नाडू  सरकार की ओर से कलैममानी पुरस्कार
मद्रास विश्व विद्यालय की तरफ से साहित्य में मानद डॉक्टरेट की उपाधि
डॉ एमजीआर मेडिकल विश्व विद्यालय, तमिल नाडू ने विज्ञान में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की
तमिल नाडू कृषि विश्व विद्यालय ने विज्ञान में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की
भार्थिदासन विश्व विद्यालय ने साहित्य में डॉक्टर की उपाधि दी
डॉ आंबेडकर कानून विश्व विद्यालय ने कानून में मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्रम)

 1948: मैसूर में २४ फरवरी को जयललिता का जन्म

1961: एपिस्टल फिल्म से फ़िल्मी करियर की शुरुआत

1964: पहली बार कन्नड़ फिल्म में पदार्पण

1965: जयललिता ने अपने तमिल फिल्म करिएर की शुरुआत की

1972: फिल्म ‘पत्तिकादा पत्तानमा’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार

1980: एमजीआर के द्वारा प्रचार सचिव चुनी गई

1984: राज्यसभा में नामांकन

1989: विधानसभा चुनाव में जीत

1991: पहली बार मुख्यमंत्री बनी

2002: जयललिता दूसरी बार विधान सभा चुनाव जीती

2011: विधान सभा चुनाव जीतकर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं

2016 : निधन
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जयललिता  से सिमी ग्रेवाल का  इंटरव्यू


नई दिल्ली:
अपने राजनीतिक करियर के दौरान जयललिता बहुत कम बार किसी के सवालों से मुखातिब हुईं थी. हालांकि, सिमी ग्रेवाल उनसे ये मौका चुरा पाने में कामयाब रहीं. साल 1999 में सिमी ग्रेवाल के मशहूर टॉक शो में जयललिता ने अपनी जिंदगी उन पलों, घटनाओं और यादों को समेटा और लोगों के सामने रखा.

आइए जानें उस इंटरव्यू से मिली जयललिता की ज़िंदगी की वो यादें जो आज भी हर कोई जानना चाहेगा

सिमी: आपके चेहरे पर डर, गुस्सा और किसी भी तरह के इमोशन नजर क्यों नहीं आते? एक इंसान के चेहरे पर ऐसा ऐसा होना लाजमी है!जयललिता: जी हां बिलकुल, मैं सब की तरह एक इंसान ही हूं. मैंने भी अपनी जिंदगी में इन तमाम तहर के भावनाओं का अनुभव किया है, मगर जब आप एक लीडर होते हैं तब आपको उन इमोशन्स को कंट्रोल करना सीखना चाहिए. आपको सीखना चाहिए कि आप कैसे अपने इमोशन को लोगों के सामने जाहिर नहीं करें.सिमी: आपको क्या लगता है पॉलीटिक्स ने आपको एक ऐसा इंसान बनने पर मजबूर कर दिया?जयललिता: जी बिलकुल, मैं बिलकुल भी ऐसी नहीं थी. शुरुआती दौर में मैं बहुत शर्मीली थी. अजनबी लोगों से मिलने से डरती थी. मैं उन लोगों में खुद को शुमार करती थी जो लाइमलाइट से नफरत करते हैं.सिमी: आपका पहला क्रश कौन था?जयललिता: मैं जब छोटी थी तब क्रिकेट का टेस्ट मैच देखने जाया करती थी. उस वक्त मैं नारी कॉन्ट्रैक्टर (क्रिकेट खिलाड़ी) को पसंद करती थी. इसके बाद मुझे शम्मी कपूर पर भी बहुत ज्यादा क्रश था. मगर हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई.सिमी: आपके पसंदीदा गाने और फिल्म कौन हैं?जयललिता: मेरी पसंदीदा फिल्म्स में शम्मी कपूर की फिल्म ‘जंगली’ है. उस फिल्म का ‘याहू…’ सॉन्ग मुझे काफी अच्छा लगता है. इसके अलावा फिल्म ‘दो आखें बारह हाथ’ का सॉन्ग ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘आ जा सनम मधुर चांदनी से हम’ भी काफी पसंद है.सिमी: आपने अपनी जिंदगी में 125 से भी ज्यादा फिल्में की हैं. आज के दौर में आप उस वक्त को कैसे देखती हैं?जयललिता: मैं अपने वक्त में साउथ की नंबर 1 स्टार थी और काफी सक्सेसफुल भी थी. मगर मैंने किसी भी चीज को करने का निर्णय लिया है, फिर चाहे मैं उसे पसंद करूं या नहीं, मैं खुद को उस के लिए पूरी तरह से लगा देती हूं. इसके बावजूद भी मैं अपने फिल्मी करियर को नापंसद करती थी जिस वक्त मैं बुलंदियों पर थी.सिमी: आपकी जिंदगी तब बदल गई जब एमजीआर आपकी जिंदगी में आए. आपने उनके साथ 28 फिल्में कीं. फिर आप पॉलीटिक्स में आईं. क्या आपको उनसे प्यार हो गया था?जयललिता: मैं सोचती हूं कि उन (एमजीआर) से मिलने के बाद हर कोई प्यार करने लगेगा. वो काफी केयरिंग थे. मेरी मां के मरने के बाद उन्होंने मेरी मां की तरह मुझे संभाला. इसलिए वो मेरे लिए सबकुछ थे. मेरे मां-पिता, दोस्त, फिलॉसफर, गाइड सब कुछ थे.सिमी: आपने शादी क्यों नहीं की?जयललिता: मैं शादी करना चहती थी. लेकिन ऐसा जरूरी भी तो नहीं कि सब को हर कुछ मिल जाए. मैंने अपनी जिंदगी में बहुत से टूटते रिश्ते देखे. इसके बावजूद मुझे ऐसा कोई मिला नहीं जिस से मैं शादी कर सकूं. शादी नहीं करने का फैसला में मेरी जिंदगी का एक अहम फैसला था.


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साड़ी से लेकर नगीना तक हरे रंग का ही पहनती थीं जयललिता!


भाषा First published: December 6, 2016,

चेन्नई। उनकी आत्मा ने भले ही उनकी देह छोड़ दी, लेकिन अपने प्रिय हरे रंग से उनका नाता तब भी नहीं टूटा क्योंकि अंतिम सफर के समय भी जयललिता अपने पसंदीदा हरे रंग की साड़ी में थीं। जयललिता को हरा रंग बहुत पसंद था और वह हर महत्वपूर्ण मौके पर इस रंग का लिबास तो पहनती ही थीं, उनके आसपास की हर चीज में हरा रंग शामिल होता था।
उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए आज तड़के जब उनके निवास पोएस गार्डन से उनका पार्थिव शरीर राजाजी हॉल ले जाया गया तो वह एक बार फिर अपनी ट्रेडमार्क हरी साड़ी में थीं, जिसका बोर्डर लाल था। विधानसभा चुनाव में विजयी होने के बाद जब जयललिता ने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो भी उन्होंने हरी साड़ी पहनी थी।
इसी तरह जब उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय से आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में बरी होने के उपरांत पिछले साल 23 मई को पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तब भी वह हरे रंग की साड़ी पहने थीं। अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं के अनुसार हरा रंग जयललिता के लिए भाग्यशाली था और उन्हें बेहद पसंद था।

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटने के बाद जब वह सत्ता में लौटी थीं तब वह करीब आठ महीने में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने के दौरान भी वह अपने इसी पसंदीदा रंग की साड़ी पहने हुए थीं।

जब उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय के सेंटेनरी ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब मंच के पीछे चमकीले हरे रंग की पृष्ठभूमि थी। राज्यपाल के रोसैया ने उन्हें जो गुलदस्ता भेंट किया उसमें भी बाहरी आवरण हरे रंग का था। पिछले साल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने हरे रंग की कलम से दस्तखत किए थे और उनकी अंगूठी में हरे रंग का नगीना जड़ा था।

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MGR की समाधि के पास 'अम्मा' का अंतिम संस्कार, 

मरीना बीच पर लाखों लोग उमड़े



News18India.com
First published: December 6, 2016,

चेन्नई। 74 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का चेन्नई में निधन हो गया। सोमवार रात 11:30 बजे जयललिता ने आखिरी सांस ली। जयललिता के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। जयललिता के पार्थिव शरीर को चेन्नई के राजाजी हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
शाम 6 बजे मरीना बीच पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने करिश्माई नेता की आखिरी झलक पाने के लिए लाखों की तादाद में लोग उमड़ पड़े हैं। सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। आज पीएम नरेंद्र मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे।

- शाम छह बजे धार्मिक संस्कार पूरे होने के बाद जयललिता के पार्थिव शरीर वाले चंदन की लकड़ी से निर्मित ताबूत को पारंपरिक बंदूकों की सलामी के बीच उनके अंतिम प्रवास के स्थान में नीचे उतारा गया। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोग ‘अम्मा वझगा’ (अम्मा अमर रहें) के नारे लगा रहे थे।
-तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की अंतिम यात्रा के लिए आर्मी ट्रक एवं गन कैरिज वाहन पर 40 श्रमिकों ने 10 घंटे की मेहनत के बाद दो टन से अधिक फूल लगाकर इसे जनाजे के लिए तैयार किया। फूल दो तरह के थे। पहला सजावटी फूल जैसे शतावरी और गुलबहार और दूसरा, गुलाब एवं सफेद गेंदा जैसे पारंपरिक फूल।

-जयललिता की पुरानी विश्वासपात्र शशिकला नटराजन एवं अन्नाद्रमुक प्रमुख के भतीजे दीपक ने एम जी रामचंद्रन के स्मारक स्थल पर जयललिता का अंतिम संस्कार किया। इसमें फूलों की पंखुड़ियां छिड़कना और चंदन की लकड़ियां डालना शामिल था। इसके बाद ताबूत को नीचे किया गया। यह अंतिम संस्कार के आखिरी रस्मों के समापन का प्रतीक था।
-जयललिता का अंतिम संस्कार एमजीआर की समाधि के पास किया गया। शशिकला के पूरी की अंतिम संस्कार की रस्म।

-जयललिता का अंतिम संस्कार किया गया। शोक में डूबे अम्मा समर्थक। -जयललिता की करीबी शशिकला कर रहीं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया।

-राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चेन्नई में जयललिता को दी श्रद्धांजलि। -मरीना बीच पहुंचा जयललिता का पार्थिव शरीर। MGR की समाधि के पास राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार। -'अम्मा' को अंतिम विदाई देने के लिए चेन्नई की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब।

 तकनीकी दिक्कतों के चलते राष्ट्रपति को चेन्नई ले जा रहा इंडियन एयरफोर्स का विमान रास्ते से लौटा।  अब वह दोबारा विमान से चेन्नई रवाना हो रहे हैं। # पीएम नरेंद्र मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचे। राजाजी हॉल में रखा गया है जयललिता का पार्थिव शरीर। कई और नेताओं के भी आने का कार्यक्रम। # सुपरस्टार रजनीकांत ने भी राजाजी हॉल पहुंचकर जयललिता को दी श्रद्धांजलि। #  संसद में जयललिता को श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही उनके सम्मान में दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। दोनों ही सदनों में सदस्यों ने कुल पल मौन रखकर जयललिता को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद उनके सम्मान में बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने जयललिता के निधन की जानकारी दी। अध्यक्ष ने कहा कि सेल्वी जे जयललिता का निधन कल पांच दिसंबर 2016 को चेन्नई में 68 वर्ष की आयु में हो गया। जयललिता छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं और तमिलनाडु विधानसभा की सात बार विधायक रहीं। वह तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की पहली महिला नेता थीं।

# सुमित्रा महाजन ने कहा- उन्होंने तमिलनाडु के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने वहां की महिलाओँ के लिए बहुत काम किया है। वो एक ऐसी नेता रही हैं जो लोगों के दिलों में रही हैं ऐसा नेता मिलना दुर्लभ है। मैं उनको अपनी तरह से श्रद्धांजलि देती हूं।# चेन्नई- एमजीआर मेमोरियल मरीना बीच पर जयललिता के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। सुरक्षा के भारी बंदोबस्त।   #जयललिता के पार्थिव शरीर को आज सुबह उनके आवास पोएस गार्डन से राजाजी हॉल ले जाया गया, जहां हजारों समर्थक अपनी ‘पुराची थलैवी अम्मा’ (क्रांतिकारी नेता अम्मा) को अंतिम विदाई देने के लिए कतार में खड़े हैं। जयललिता का पार्थिव शरीर उनकी पसंदीदा हरे रंग की साड़ी में लिपटा हुआ है। छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता का पार्थिव शरीर शीशे के बक्से में रखा गया है। यह बक्सा राजाजी हॉल की सीढ़ियों पर रखा गया है और सेना के चार जवानों ने उसे राष्ट्रीय ध्वज से ढक दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और उनके सहयोगी मंत्रिमंडलीय सहयोगियों, सांसदों, विधायकों और राज्य के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने दिवंगत मुख्यमंत्री को सबसे पहले श्रद्धांजलि दी। #जयललिता के निधन पर तमिलनाडु में 7 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 1 दन का शोक घोषित किया है। उत्तराखंड, कर्नाटक और बिहार सरकार ने भी एक दिन का शोक घोषित किया है। पीएम समेत तमाम दलों के नेता ने जयललिता के निधन को भारतीय राजनीति की अपूरणीय क्षति बताया। # तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद चेन्नई में जनजीवन की रफ्तार धीमी है। सुबह से शहर की सड़कें वीरान रहीं और भोजनालयों सहित दुकानें भी बंद रहीं। ऑटोरिक्शा सहित सार्वजनिक परिवहन सेवा सड़कों से नदारद रहीं, जबकि कुछ निजी वाहनों को शहर के विभिन्न हिस्सों में चलते देखा गया। पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण स्थलों पर कड़ी निगरानी बरत रहे हैं। बीती शाम से शहर में और राज्य के अन्य कई हिस्सों में करीब करीब पूर्णत: बंद जैसी स्थिति है। शहर में हर सुबह आमतौर पर यहां चाय की दुकानों पर गहमागहमी बनी रहती है और बेहतर कारोबार होता है। आज चाय की दुकानें भी बंद हैं। कुछ जगहों पर चाय बेचने वालों को घूम घूमकर चाय बेचते देखा गया। होटल भी बंद रहे।

#आज पीएम मोदी भी जयललिता को श्रद्धांजलि देने चेन्नई पहुंचेंगे। वह दोपहर 12 बजे जयललिता को श्रद्धांजलि देंगे।  इसके अलावा दूसरे दलों के नेता भी चेन्नई पहुंचेंगे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी चेन्नई पहुंचेंगे। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री वेंंकैया नायडू पहले से ही चेन्नई में हैं। 22 सितंबर से थीं भर्ती -- बता दें कि 22 सितंबर को बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 4 दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने के बाद से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार वो जिंदगी से जंग हार गईं।

2 दिन पहले जयललिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद से हजारों समर्थक अपोलो अस्पताल के बाहर खड़े थे। क्या महिलाएं, क्या बुजुर्ग सभी भगवान से दुआ कर रहे थे कि अम्मा हमेशा की तरह हाथ जोड़े और मुस्कराते हुए अस्पताल से बाहर निकलें, लेकिन शायद होनी को ये मंजूर नहीं था। अम्मा के निधन की खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर नेताओं सहित हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोग नम आंखों से अम्मा की आखिरी झलक पाने चाहते थे, जिसके चलते अस्पताल से बाहर निकलती हर गाड़ी के अंदर झांकने की कोशिश भी कर रहे थे। इस दौरान मजबूरन सुरक्षाकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए लाठियां भी भांजनी पड़ी। हर सियासी दल अम्मा जैसे करिश्माई नेता को खोने के दुख से अछूता नहीं दिखा। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जयललिता के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया। जयललिता के निधन पर हार्दिक संवेदनाएं,  वो भारत की लोकप्रिय नेताओं में से एक थीं।

जयललिता के निधन से आहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा कि जयललिता के निधन पर बहुत दुखी हूं।
उनके बाद भारतीय राजनीति में आए खालीपन को भरना आसान नहीं होगा।

जयललिता के निधन के बाद पूरे राज्य में शौक की लहर है। जिसके बाद तमिलनाडु में 7 दिन का राजकीय शौक का ऐलान किया गया। इसके अलावा राज्य में स्कूल-कॉलेजों में भी 3 दिन की छुट्टी घोषित की गई। यहीं नहीं बिहार और उत्तराखंड सरकार ने भी 1-1 दिन का शौक घोषित किया है।