शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

नोटबंदी के फैसले ने आतंकियों, नक्सलियों की कमर तोड़ दी



नोटबंदी के फैसले ने तोड़ दी आतंकियों, नक्सलियों की कमर

टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated: Nov 16, 2016

हाइलाइट्स
• नोटबंदी के बाद कश्‍मीर में हवाला के जरिए आतंकियों और अलगाववादियों तक पहुंचने वाले पैसे में काफी कमी आई है।
• देश भर में फैले नक्सलियों ने बड़ी करंसी के रूप में जो पैसा जमा कर रखा था, वह अब बेकार हो चुका है।
• नक्सलियों ने यह पैसा लेवी और फिरौती के रूप में जमा किया था।

भारती जैन, नई दिल्‍ली
500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर बैन लगाकर मोदी सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर के आतंकवादियों और देश भर में फैले नक्‍सलियों की कमर तोड़ दी है। एक तरफ जहां कश्‍मीर में हवाला के जरिए आतंकियों और अलगाववादियों तक पहुंचने वाले पैसे में काफी कमी आई है वहीं नक्‍सलियों ने बड़ी करंसी के रूप में जो पैसा जमा कर रखा था, वह अब बेकार हो चुका है।

सूत्रों ने बताया कि कश्‍मीर में आतंकियों और अलगाववादियों तक हवाला के जरिए जो पैसा पहुंचता था, वह ज्‍यादातर 500 और 1000 रुपये के नोटों में होता था। अब पुराने नोटों पर बैन लगने के बाद इस फंडिंग में काफी कमी आई है। उधर, देश के कई राज्‍यों में फैले माओवादी समूह, खासकर बिहार और झारखंड के माओवादियों ने फिरौती के जरिए जो मोटी रकम जमा कर रखी थी, उसे भुनाने में अब उनके पसीने छूट रहे हैं।

जम्‍मू-कश्‍मीर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाले एक इंटेलिजेंस अधिकारी ने बताया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर बैन लगने के बाद हवाला चैनल के जरिए आने वाले पैसे का स्रोत सूख गया है। अब जबकि हिंसा और प्रदर्शनों को फंड करने के लिए पैसा नहीं है, इन कामों को अंजाम देने वाले चुपचाप बैठे हुए हैं। हिंसक प्रदर्शन करवाने या पत्‍थरबाजी को फंड करने के लिए उनके पास पैसा नहीं है।

एक सूत्र ने कहा कि किसी भी आतंकी ऑपरेशन या भीड़ द्वारा प्रदर्शन कराने के लिए पैसे की जरूरत होती है, और यह हवाला के जरिए आता है। सूत्र ने कहा, 'यह गौर करने वाली बात है कि घाटी में 8 नवंबर के बाद से कोई भी बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है।'

सुरक्षा से जुड़े एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'हालांकि, ऐसा होने की एक वजह यह भी है नोटबंदी से पहले ही घाटी में हालात आंशिक तौर पर ही सही, सामान्‍य हो गए थे। इससे यह भी पता चलता है कि आतंकवादियों को अपनी हरकतों को अंजाम देने में काफी परेशानी आ रही है।' अधिकारी ने कहा कि सुरक्षाबल आतंकवादी गतिविधियों में आई कमी का फायदा उठा सकते हैं। इस दौरान वे घाटी में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा, 'सबसे पहले आतंकी समूहों के संसाधन पाने के रास्‍ते बंद कर दो और जब तक वे कोई और रास्‍ता ढूंढे, उनका खात्‍मा कर दो।'

खुफिया जानकारियों के मुताबिक, नोटबंदी की वजह से माओवादियों पर जबर्दस्‍त असर पड़ा है। उनकी फंडिंग का रास्‍ता बंद हो गया है। बिहार और झारखंड स्थित सीपीआई (माओवादी) नेताओं के बीच जो बातचीत पकड़ी गई है, उससे पता चलता है कि उन्‍हें ढेर लगाकर रखे गए अपने कैश को खो देने का डर है। यह कैश लेवी और फिरौती के जरिए हासिल हुआ है। इस बीच, सरकारी एजेंसियों ने नक्‍सल प्रभावित इलाकों में पैसे के फ्लो पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। इस तरह की खुफिया जानकारियां हैं कि माओवादी बैंक या कैश वैन्‍स को निशाना बना सकते हैं ताकि अपनी भरपाई कर सकें।

सर्वे में ज्यादातर लोग नोटबंदी फैसले के साथ, एक महीना बाद भी




नोटबंदी का एक महीना : 

एनबीटी-सीवोटर सर्वे में ज्यादातर लोग फैसले के साथ

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Dec 9, 2016

नई दिल्‍ली
8 नवंबर 2016 को लागू किए गए नोटबंदी के फैसले का एक महीना पूरा होने के बाद भी कैश कमी की समस्या से जूझ रहे लोग इस फैसले के समर्थन में हैं। ज्‍यादातर लोगों का कहना है कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के बैन होने से उन पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा है और इससे जो दिक्कतें हो रही हैं, वह कालेधन के खिलाफ लड़ाई में काफी छोटी हैं। ये बातें सामने आई हैं एनबीटी-सीवोटर की तरफ से किए गए सर्वे में।

नोटबंदी से ज्यादा दिक्कत नहीं
जब सर्वे में लोगों से पूछा गया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बैन होना, उनके लिए कितनी बड़ी मुसीबत है तो ज्यादातर लोगों ने कहा कि इससे उन पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। शहरों में रहने वाले 51 प्रतिशत लोगों ने माना कि इससे कोई दिक्कत नहीं हुई है। अर्द्धशहरी इलाकों के 44 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों के 42 प्रतिशत लोगों की भी यही राय थी। दूसरी तरफ, शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण इलाकों के क्रमश: 13 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 13 प्रतिशत लोगों ने माना कि इस फैसले ने उन पर जबर्दस्त प्रभाव डाला है।

इनकम ग्रुप के लिहाज से बात करें तो लोअर इनकम ग्रुप के 51 प्रतिशत, मिडल इनकम ग्रुप के 43 प्रतिशत और हाइअर इनकम ग्रुप के 47 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे कोई परेशानी नहीं हुई है। वहीं लोअर इनकम ग्रुप के 14 प्रतिशत, मिडल इनकम ग्रुप के 10 प्रतिशत और हाइअर इनकम ग्रुप के 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से उन पर ऐसा प्रभाव पड़ा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

कालेधन के खिलाफ लड़ाई और नोटबंदी
नोटबंदी के फैसले और कालेधन के खिलाफ लड़ाई में इससे होने वाले फायदे के बारे में जब लोगों की राय मांगी गई तो ज्यादातर ने सकारात्मक बात कही। अधिकतर लोगों ने कहा कि ब्‍लैक मनी के खिलाफ लड़ाई में नोटबंदी से जो दिक्‍कत हो रही है, वह कुछ भी नहीं है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो शहरों में रहने वाले 85 प्रतिशत लोगों ने माना कि जितनी दिक्‍कत हो रही है उसे कालेधन के खिलाफ लड़ाई में आराम से सहा जा सकता है। अर्द्धशहरी इलाकों के 89 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों के 79 प्रतिशत लोगों की भी यही राय थी। दूसरी तरफ, शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण इलाकों के क्रमश: 13 प्रतिशत, 9 प्रतिशत और 16 प्रतिशत लोगों का जवाब ना में रहा।