शनिवार, 24 दिसंबर 2016

देश मोदी जी के साथ : सब ठीक कर देंगे : ऑनलाइल पोल





59 फीसदी लोगों ने माना, मोदी 50 दिनों में सब ठीक कर देंगे: ऑनलाइल पोल
इकनॉमिक टाइम्स | Updated: Dec 23, 2016
नई दिल्ली
नोटबंदी के फैसले के बाद अधिकतर लोगों को लगता है कि पीएम मोदी 50 दिन के भीतर सब ठीक कर देंगे। इकनॉमिकटाइम्स डॉट कॉम के ट्विटर हैंडल पर हुए एक पोल में आधे से अधिक लोगों ने पीएम के पक्ष में वोटिंग की है। दरअसल पीएम ने नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों से कहा था कि उन्हें केवल 50 दिन चाहिए, सारी समस्याएं ठीक कर दी जाएंगी।

अब पीएम के इस 50 दिन के वादे को पूरा होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। नोटबंदी के फैसले के मुताबिक 30 दिसंबर तक 500, 1000 रुपये के पुराने नोटों को बदलने की समय सीमा रखी गई है। इस बीच इकनॉमिकटाइम्स डॉट कॉम ने लोगों का मूड भांपने के लिए ट्विटर पर एक पोल किया। इस पोल के परिणाम मोदी सरकार के राहत देने के साथ-साथ चिंतित करने वाले भी हैं।


पोल में लोगों से पूछा गया था कि क्या नरेंद्र मोदी 50 दिनों में कैश की समस्या खत्म करने के अपने वादे को पूरा कर पाएंगे? इस सवाल के जवाब में 59 फीसदी लोगों ने माना कि पीएम अपना वादा पूरा करेंगे। 30 फीसदी लोगों का कहना है कि पीएम वादा पूरा नहीं कर पाएंगे, जबकि 11 फीसदी लोग किसी निर्णय पर पहुंचते नहीं दिखाई दिए।

पोल के रिजल्ट से साफ है कि फिलहाल लोगों को भरोसा है कि पीएम समस्या का समाधान ढूंढ निकालेंगे। आने वाले दिनों में अगर दिक्कतें खत्म नहीं हुईं तो नकारात्मक वोटिंग करने वालों का प्रतिशत बढ़ भी सकता है। नोटबंदी के फैसले के 45 दिन बीत जाने के बावजूद कैश संबंधित समस्या खत्म नहीं हुई है।
इस बीच विपक्षी दल भी लगातार सरकार पर हमलावर हैं। नोटबंदी के बाद कैश के लिए लाइन में लगे लोगों की मौत को लेकर संसद से सड़क तक सरकार को घेरने की कवायद लगातार चल रही है। नोटबंदी ने सर्कुलेशन में मौजूद 87 फीसदी करंसी को अचानक से बैंकों में वापस डाल दिया। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि ऐसी स्थिति में पैदा हुए संकट से निपटने में कुछेक महीने और भी लग सकते हैं।

'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी




'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में 10 बड़ी बातें
ABP News > India News > Wednesday, 24 December 2014

नई दिल्ली: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित

वाजपेयी के नेतृत्व की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि वे एनडीए सरकार के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर-कॉग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए. उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे. कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की.

यहां आपको बताते हैं  अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में दस बड़ी बातें-
1. वाजपेयी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक है और 1968 से 1973 तक वह उसके अध्यक्ष भी रहे थे. राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे. वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया.

2. अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालिया में हुआ था. अटल बिहारी वाजपेयी की पढ़ाई-लिखाई कानपुर में हुई. वे अपने कॉलेज के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे. वाजपेयी ने राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कानपुर के एक कॉलेज से किया. एलएलबी बीच में ही छोड़कर वाजपेयी राजनीति में पूरी तरह सक्रीय हो गए. राजनीति में उनका पहला कदम अगस्त 1942 में रखा गया, जब उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया.

3. 1951 में वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे. उन्होंने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे.

4. 1957 से 1977 तक (जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे. 1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे.

5. 1977 में पहली बार वाजपेयी गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने. मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया. अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था.

6. 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की. 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे. दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए. 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.

7. अटल बिहारी वाजपेयी अब तक नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं. वे सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी.

8. परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये. 1998 में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया.

9. अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं. ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है. वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं. उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे.

10. अटल बिहारी वाजपेयी 1992 में पद्म विभूषण सम्मान, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार और 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं.