शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में : पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस के एक नए युग की शुरुआत - अमित शाह 


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा रांची, झारखंड में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय का लोकार्पण और प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु

शुक्रवार, 15 सितम्बर 2017


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा रांची, झारखंड में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय का लोकार्पण और प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने रिफॉर्म्स से भी दो कदम आगे बढ़ कर ट्रांसफॉर्मेशन अर्थात सम्पूर्ण परिवर्तन की दिशा में देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है ***********
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने देश से परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति को ख़त्म करके पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस के एक नए युग की शुरुआत की है *********** 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार ने झारखंड को शेयर इन सेन्ट्रल टैक्स में 42,847 करोड़ रुपये राशि आवंटित की जबकि 14वें वित्त आयोग में मोदी सरकार ने झारखंड के 1,24,408 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है जो 13वें वित्त आयोग के मुकाबले लगभग तीन गुनी अधिक है ***********
शेयर इन सेन्ट्रल टैक्स, ग्रांट-इन ऐड, लोकल बॉडीज ग्रांट और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड आदि के फंड को मिला दिया जाए तो मोदी सरकार ने कांग्रेस की यूपीए सरकार के 55,253 करोड़ की तुलना में झारखंड को 1,43,345 करोड़ रुपये दिया है ***********
रघुबर दास जी के नेतृत्व में झारखंड की भाजपा सरकार राज्य के विकास के लिए अहर्निश काम कर रही है ***********
झारखंड के विकास की गति पूरी दुनिया देख रही है। भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में स्थिरता एवं पारदर्शिता के साथ-साथ एक निर्णायक सरकार देने का काम किया है ***********
गरीबी उन्मूलन, जीडीपी ग्रोथ, स्वास्थ्य, साक्षरता, ग्रामीण विकास, कृषि विकास, बिजली उत्पादन एवं वितरण और बच्चों एवं माताओं की मृत्यु दर में कमी - इन सभी क्षेत्रों में भाजपा की सरकारें पहले स्थान पर हैं ***********
देश के जिन-जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां विकास तेज गति से आगे बढ़ा है। हमने विकास को विकास की पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है ***********
भारतीय जनता पार्टी में नेता अपनी निष्ठा, देश के लिए काम करने की लगन, परिश्रम, मेधा और परफॉरमेंस के आधार पर बनते हैं, यही कारण है कि यहाँ एक बूथ कार्यकर्ता भी पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है और एक गरीब का बेटा व पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता देश का प्रधानमंत्री ***********
आज देश में लगभग 1650 छोटी-बड़ी पार्टियों में से सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके अंदर आतंरिक लोकतंत्र बचा हुआ है ***********
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से हुई थी, भारत को फिर से विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित कर देश के खोये हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए हुई थी ***********
भारतीय जनता पार्टी ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए कटिबद्ध है, कुछ ही समय में हम इस विधेयक को राज्य सभा से पारित करा कर ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता देने का कार्य पूरा कर लेंगे ***********
दुनिया में विरले ही ऐसे होते हैं जो देश एवं समाज के लिए अनवरत काम करते रहने के वाबजूद किसी प्रकार के यश की कामना नहीं रखते और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एक ऐसे ही व्यक्तित्व थे *********** भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के नाते मेरे सम्पूर्ण जीवन और आने वाले जीवन में भी सबसे बड़े गौरव की बात यह है कि मैं उस पार्टी का अध्यक्ष हूँ जिस पार्टी के अध्यक्ष कभी पंडित दीनदयाल उपाध्याय थे ***********
पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय देश की राजनीति को आगे ले जाने और राजनीति को निर्मल रखने में एक बहुत बड़ा साधन सिद्ध होने वाला है ***********
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज रिप्स ऑडिटोरियम, रांची (झारखंड) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय का लोकार्पण किया. उन्होंने इस अवसर पर आयोजित प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन को भी संबोधित किया और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा, सिद्धांतों और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की। विदित हो कि श्री शाह देश के सभी राज्यों में कुल 110 दिनों के अपने विस्तृत प्रवास कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय दौरे पर अभी झारखंड में हैं। इससे पहले रांची पहुँचने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का भव्य स्वागत किया गया। तत्पपश्चात् श्री शाह ने बिरसा चौक पर मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने वाले शौर्य और पराक्रम के परिचायक "भगवान बिरसा मुंडा जी" को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात् उन्होंने 15 सिंतबर से 02 अक्टूबर तक चलने वाले "स्वच्छता पखवाड़ा" अभियान का शुभारंभ किया और वहां उपस्थित लोगों के साथ स्वच्छता की शपथ भी ली। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय, राँची में परम श्रद्धेय डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया में विरले ही ऐसे होते हैं जो देश एवं समाज के लिए अनवरत काम करते रहने के वाबजूद किसी प्रकार के यश की कामना नहीं रखते और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एक ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए अपने लिए कुछ भी किये बगैर पंडित दीनदयाल जी ने हमेशा देश के लिए सोचा। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन के आधार पर देश की राजनीति कैसे चल सकती है, लोकतंत्र को हमारे मूल विचारों के साथ कैसे समाहित किया जा सकता है, एक राजनीतिक दल को राष्ट्र के उत्थान का माध्यम कैसे बनाया जा सकता है और संगठन के आधार पर एक राजनीतिक दल को कैसे चलाया जा सकता है - इसे अल्प समय में ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने चरितार्थ करके दिखाया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के नाते मेरे सम्पूर्ण जीवन और आने वाले जीवन में भी सबसे बड़े गौरव की बात यह है कि मैं उस पार्टी का अध्यक्ष हूँ जिस पार्टी के अध्यक्ष कभी पंडित दीनदयाल उपाध्याय थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और देश की 18 राज्य सरकारों ने सरकार के स्तर पर और भारतीय जनता पार्टी ने संगठन स्तर पर इस वर्ष को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, केंद्र सरकार इस जन्मशताब्दी वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। उन्होंने कहा कि यह हम सबका दायित्व है कि आने वाले अनेक पीढ़ियों तक हमारी राजनीति सुदृढ़ रहे, इसके लिए न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हर व्यक्ति को पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय देश की राजनीति को आगे ले जाने और राजनीति को निर्मल रखने में एक बहुत बड़ा साधन सिद्ध होने वाला है। उन्होंने इस वांड्मय को लोगों तक पहुंचाने के लिए श्री महेश चन्द्र शर्मा एवं उनकी पूरी टीम को ह्रदय से साधुवाद दिया। श्री शाह ने कहा कि बहुपक्षीय लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली में किसी भी पार्टी का मूल्यांकन तीन विषयों के आधार पर हो सकता है - पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र, पार्टी का सिद्धांत और सत्ता में आने पर सरकार की कार्यपद्धति। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश की जनता को इन आधारभूत मापदंडों पर राजनीतिक पार्टियों का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज देश में लगभग 1650 छोटी-बड़ी पार्टियों में से सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके अंदर आतंरिक लोकतंत्र बचा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के अंदर ही लोकतंत्र नहीं है तो वह देश का भला नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि देश की अधिकतर पार्टियों में सबको पता है कि उसका अगला अध्यक्ष कौन होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा, जेएमएम का अगला अध्यक्ष कौन होगा, यह सबको पता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी का अगला लक्ष्य कौन होगा, यह किसी को मालूम नहीं है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में अध्यक्ष वंश, जाति अथवा धर्म के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में नेता अपनी निष्ठा, देश के लिए काम करने की लगन, परिश्रम, मेधा और परफॉरमेंस के आधार पर बनते हैं, यही कारण है कि यहाँ एक बूथ कार्यकर्ता भी पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है और एक गरीब का बेटा व पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता देश का प्रधानमंत्री। उन्होंने कहा कि देश में कई सारी पार्टियाँ हैं जो परिवारवाद और जातिवाद के आधार पर ही चल रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं देश की जनता का भी आह्वान करना चाहूँगा कि वे भी ऐसे दलों को चुनें जहां आंतरिक लोकतंत्र हो। श्री शाह ने कहा कि पार्टी के मूल्यांकन का दूसरा महत्वपूर्ण मापदंड है - पार्टी का सिद्धांत। उन्होंने कहा कि जो पार्टियां सिद्धांतों के आधार पर नहीं चलती हैं, वे देश का भला नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय जन संघ की स्थापना ही सिद्धांतों के आधार पर देश को एक वैकल्पिक नीति देने के लिए हुई थी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि नेहरू जी के नेतृत्व में जब देश की विकास नीति, कृषि नीति, विदेश नीति, अर्थ नीति, रक्षा नीति और शिक्षा नीति का निर्माण हो रहा था तब डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित कई राष्ट्र मनीषियों को लगा कि नेहरू सरकार देश के लिए जो नीतियाँ बना रही है, उन नीतियों के रास्ते पर यदि यह देश चलता रहा तो पीछे मुड़ने का भी रास्ता नहीं मिलेगा, तब उन लोगों ने एक ऐसी वैकल्पिक नीति को राष्ट्र के सामने रखने का साहस किया जिसमें देश की मिट्टी की सुगंध हो, उससे पाश्चात्य विचारों की बू न आती हो और जो नीतियाँ देश को विकास के पथ पर गतिशील करने में सहायक हो। उन्होंने कहा कि ने कहा कि 1950 से 2017 की जन संघ से भारतीय जनता पार्टी की यात्रा अंत्योदय, एकात्म मानववाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की यात्रा रही है और यही हमारे मूल सिद्धांत हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से हुई थी, भारत को फिर से विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित कर देश के खोये हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए हुई थी। श्री शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के क्या सिद्धांत हैं, कोई नहीं बता सकता क्योंकि कांग्रेस पार्टी की स्थापना सिद्धांत के लिए हुई ही नहीं थी, आजादी प्राप्त करने के लिए हुई थी और इसमें सभी विचारधाराओं के लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भारतीय जन संघ की विचारधारा में एक बड़ा मूल अंतर यह था कि कांग्रेस देश का नवनिर्माण करना चाहती थी जबकि भारतीय जन संघ देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली वैभव के आधार पर देश का पुनर्निर्माण करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है, वह देश का विकास नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि स्थापना से लेकर आज तक हमारे नेतृत्व के जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण राष्ट्र-सेवा के प्रति समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि स्थापना से लेकर आज तक हमने जितने भी कार्यक्रम हाथ में लिए है, वे देश की समस्याओं के समाधान के लिए हैं चाहे वह कश्मीर आन्दोलन हो, कच्छ का सत्याग्रह हो, गोवा मुक्ति संग्राम हो, राम जन्मभूमि आंदोलन हो, भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की यात्रा हो या फिर गौ-हत्या को बंद करने का आंदोलन हो। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे पास हजारों ऐसे कार्यकर्ता हैं जो निस्वार्थ भाव से पार्टी और देश की सेवा में लगे हुए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यदि हम सरकारों का मूल्यांकन करें तो यह पता चलता है कि देश में जब-जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार आती है तो देश का विकास होता है। उन्होंने कहा कि देश ने कांग्रेस की सरकारें भी देखी, कम्युनिस्ट पार्टियों की सरकारें भी देखी, क्षेत्रीय दलों की सरकारें भी देखी और भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य सरकारों को भी देखा, अब वक्त आ गया है कि इन सरकारों के विकास के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन, जीडीपी ग्रोथ, स्वास्थ्य, साक्षरता, ग्रामीण विकास, कृषि विकास, बिजली उत्पादन एवं वितरण और बच्चों एवं माताओं की मृत्यु दर में कमी - इन सभी क्षेत्रों में भाजपा की सरकारें पहले स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि देश के जिन-जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां विकास तेज गति से आगे बढ़ा है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने देश को कांग्रेस के 12 लाख करोड़ रुपये के घपले-घोटाले और भ्रष्टाचार वाली सरकार की जगह एक भ्रष्टाचार-मुक्त, पारदर्शी और निर्णायक सरकार देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आंतरिक लोकतंत्र, पार्टी के सिद्धांत और सत्ता में आने पर सरकार की कार्यपद्धति - इन तीनों मापदंडों पर भारतीय जनता पार्टी जन-अपेक्षाओं पर खड़ी उतरी है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया यह मानने लगी है कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे चल पड़ा है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक अर्थव्यवस्था बनी है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार करोड़ से अधिक शौचालय का निर्माण कर महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया गया है और लगभग 29 करोड़ लोगों के बैंक अकाउंट खोल कर उन्हें देश के अर्थतंत्र की मुख्यधारा में जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के कारण लाभार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक अकाउंट में जाती है, इससे लगभग 59,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का भ्रष्टाचार कम हुआ है। उन्होंने कहा कि मुद्रा बैंक योजना के माध्यम से देश के करोड़ों गरीब युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गए हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी के रूप में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ का स्वप्न साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी बिजली से वंचित देश के 18 हजार से अधिक गाँवों में से 13 हजार से अधिक गाँवों में बिजली पहुंचाने का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि 2018 तक हर गाँव में और 2022 तक देश के हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर केंद्र की यूपीए सरकार तक देश में लगभग 12.5 करोड़ गैस सिलिंडर ही बांटे गए थे जिसमें से 11.80 करोड़ कनेक्शन शहरी क्षेत्रों में बांटे गए थे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने तीन सालों में देश के पांच करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन देने का निर्णय लिया है जिसमें से देश के 2.80 करोड़ गरीब महिलाओं के घर में गैस सिलिंडर पहुंचाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने देश के सोचने के स्केल को बदलने का काम किया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने कहा कि 104 उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर भारत अंतरिक्ष के अंदर दुनिया की एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि 40 वर्षों से लंबित भूतपूर्व सैनिकों की ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की मांग को एक ही साल में पूरा करके मोदी सरकार ने पूर्व सैनिकों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से दुनिया का देश को देखने के नजरिये में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी, इसलिए दुश्मनों को उसी की भाषा में जवाब देने के फैसले नहीं लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक करके अमेरिका के बाद ऐसा साहस दिखाने का काम हिन्दुस्तान ने करके दिखाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने तीन सालों में देश की अर्थव्यवस्था में से काले धन के दुष्प्रभाव को काफी हद तक दूर करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी, राजनीतिक चंदे में कैश के रूप में मिलने वाली रकम को 2,000 रुपये तक सीमित करने की नीति, दो लाख शेल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन को ख़त्म करने की कार्रवाई, बेनामी संपत्ति पर नकेल और मॉरीशस-साइप्रस-सिंगापुर रूट को बंद करके मोदी सरकार ने काले धन पर कठोर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा, स्वायल हेल्थ कार्ड, नीम कोटेड यूरिया, सिंचाई योजना, ई-मंडी जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय को 2022 तक दुगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेज गति से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘भीम' एप से डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाई, स्टैंट एवं कृत्रिम घुटनों के प्रत्यारोपण मूल्य में भारी कमी से देश के गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचा है। श्री शाह ने कहा कि 1955 से लंबित ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता देने की मांग को पूरा करने का प्रयास भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दोहरे रवैये के कारण ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता देने का विधेयक राज्य सभा से पास नहीं हो पाया। उन्होंने देश की जनता को विश्वास दिलाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी पिछड़े वर्ग को यह सम्मान दिलाने के लिए कटिबद्ध है, कुछ ही समय में हम इस विधेयक को राज्य सभा से पारित करा कर ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता देने का कार्य पूरा कर लेंगे। उन्होंने कहा कि निष्ठा और लगन के साथ अनवरत रूप से जब देश के विकास के लिए योजनाओं को इम्प्लीमेंट किया जाता है तब जाकर तीन साल में इतने काम होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने देश से परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति को ख़त्म करके पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस के एक नए युग की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने रिफॉर्म्स से भी दो कदम आगे बढ़ कर ट्रांसफॉर्मेशन अर्थात सम्पूर्ण परिवर्तन की दिशा में देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने झारखंड के विकास के लिए कई कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार ने झारखंड को शेयर इन सेन्ट्रल टैक्स में 42,847 करोड़ रुपये राशि आवंटित की जबकि 14वें वित्त आयोग में मोदी सरकार ने झारखंड के 1,24,408 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है जो 13वें वित्त आयोग के मुकाबले लगभग तीन गुनी अधिक है। उन्होंने कहा कि ग्रांट-इन ऐड को भी 6087 से बढ़ा कर 9469 करोड़ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस सरकार ने 2014-15 में लोकल बॉडीज ग्रांट में जहां महज 1891 करोड़ रुपये दिए थे जबकि 14वें वित्त आयोग में मोदी सरकार ने केवल दो वर्षों (2015-16 aur 2016-17) में झारखंड को 7961 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। उन्होंने कहा कि स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड को भी 1075 करोड़ से बढ़ाकर 1507 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन सभी क्षेत्रों में कुल मिलाकर पिछली कांग्रेस की यूपीए सरकार के 55,253 करोड़ की तुलना में झारखंड को 1,43,345 करोड़ रुपये दिया है, इसके अतिरिक्त राज्य में 13,937 करोड़ रुपये का निवेश आया है, खदानों की नीलामी से झारखंड को 1,17,000 करोड़ रुपये अधिक आय होगी एवं उदय डिस्कॉम योजना के अंतर्गत भी झारखंड को लगभग 53,00 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। श्री शाह ने कहा कि झारखंड में रघुबर दास जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार राज्य के विकास के लिए अहर्निश काम कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास की गति पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में स्थिरता एवं पारदर्शिता के साथ-साथ एक निर्णायक सरकार देने का काम किया है।
 (महेंद्र पांडेय) कार्यालय सचिव

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

श्रीकृष्ण जलवा पूजन : डोल ग्यारस






डोल ग्यारस : श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजेंगी 'डोल' में
श्रीकृष्ण जन्म के 18 वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था। इसी दिन को 'डोल ग्यारस' के रूप में मनाया जाता है। जलवा पूजन के बाद ही संस्कारों की शुरुआत होती है। जलवा पूजन को कुआं पूजन भी कहा जाता है। इस ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी, जयझूलनी एकादशी, वामन एकादशी आदि के नाम से भी जाना जाता है।
'डोल ग्यारस' के अवसर पर कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है। भगवान कृष्ण की मूर्ति को 'डोल' में विराजमान कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाती है।
इस अवसर पर कई शहरों में मेले, चल समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। इसके साथ ही डोल ग्यारस पर भगवान राधा-कृष्ण के एक से बढ़कर एक नयनाभिराम विद्युत सज्जित डोल निकाले जाते हैं। इसमें साथ चल रहे अखाड़ों के उस्ताद व खलीफा तथा कलाकार अपने हैरतअंगेज प्रदर्शन से भक्तों को रोमांचित करते हैं।
ग्यारस का महत्व : शुक्ल-कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को चंद्रमा की ग्यारह कलाओं का प्रभाव जीवों पर पड़ता है। फलत: शरीर की अस्वस्थता और मन की चंचलता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इसी कारण उपवास द्वारा शरीर को संभालना और इष्टपूजन द्वारा मन को नियंत्रण में रखना एकादशी व्रत विधान का मुख्य रहस्य है।
इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। जो मनुष्य भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं।
एकादशी तिथि (ग्यारस) का वैसे भी सनातन धर्म में बहुत महत्‍व माना गया है। ऐसी मान्‍यता है, कि डोल ग्‍यारस का व्रत रखे बगैर जन्‍माष्‍टमी का व्रत पूर्ण नहीं होता। एकादशी तिथि में भी शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रेष्ठ माना गया है। शुक्ल पक्षों में भी पद्मीनी एकादशी का पुराणों में बहुत महत्व बताया गया है।
एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान कृष्ण की भक्ति करने का विधान है। इस व्रत में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस व्रत को करने से सभी तरह की कामना पूर्ण होती है तथा रोग और शोक मिट जाते हैं।

डोल ग्यारस

डोल ग्यारस हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसीलिए यह 'परिवर्तनी एकादशी' भी कही जाती है। इसके अतिरिक्त यह एकादशी 'पद्मा एकादशी' और 'जलझूलनी एकादशी' के नाम से भी जानी जाती है। इस तिथि को व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।

महत्त्व
इस तिथि पर भगवान विष्णु के वामन अवतार कि पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सुख, सौभाग्य में बढोतरी होती है। डोल ग्यारस के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण के वस्त्र धोये थे। इसी कारण से इस एकादशी को 'जलझूलनी एकादशी' भी कहा जाता है। मंदिरों में इस दिन भगवान विष्णु को पालकी में बिठाकर शोभा यात्रा निकाली जाती है। भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है। इस अवसर पर भगवान के दर्शन करने के लिये लोग सैलाब की तरह उमड़ पड़ते हैं। इस एकादशी के दिन व्रत कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

लाभ

इस तिथि को व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। पापियों के पाप नाश के लिए इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक पूज्य होते हैं। इस व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर से कहा है कि- "जो इस दिन कमल नयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।" इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको 'परिवर्तिनी एकादशी' भी कहा जाता है।

मेले का आयोजन

'डोल ग्यारस' को राजस्थान में 'जलझूलनी एकादशी' कहा जाता है। इस अवसर पर यहाँ परगणपति पूजा, गौरी स्थापना की जाती है। इस शुभ तिथि पर यहाँ पर कई मेलों का आयोजन भी किया जाता है। मेले में ढोलक और मंजीरों का एक साथ बजना समां बांध देता है। इस अवसर पर देवी-देवताओं को नदी-तालाब के किनारे ले जाकर इनकी पूजा की जाती है। सांय काल में इन मूर्तियों को वापस ले आया जाता है। अलग-अलग शोभा यात्राएँ निकाली जाती है, जिसमें भक्तजन भजन, कीर्तन, गीत गाते हुए प्रसन्न मुद्रा में खुशी मनाते है।
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डोल ग्यारस हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसीलिए यह 'परिवर्तनी एकादशी' भी कही जाती है। इसके अतिरिक्त यह एकादशी 'पद्मा एकादशी' और 'जलझूलनी एकादशी' के नाम से भी जानी जाती है। इस दिन को व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।  

भारत नव निर्माण ‘संकल्प से सिद्धि’ - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



भारत नव निर्माण
2017 से 2022 तक, ये 5 वर्ष ‘संकल्प से सिद्धि’ के वर्ष हैं: लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
August 09, 2017

* हमारी आजादी न केवल हमारे देश के लिए थी बल्कि इससे विश्व के अन्य भागों में भी उपनिवेशवाद का अंत करने की प्रेरणा मिली: पीएम मोदी
* भ्रष्टाचार रुपी दीमक ने हमारे देश की विकास यात्रा पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है: प्रधानमंत्री मोदी
* गरीबी, अशिक्षा और कुपोषण आज हमारे देश के सामने बड़ी चुनौतियां, हमें इसमें सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता: पीएम मोदी
* 1942 में गाँधी जी का आह्वान था - ‘करेंगे या मरेंगे’ और आज की जरुरत है - ‘करेंगे और कर के रहेंगे’: प्रधानमंत्री मोदी
* 2017 से 2022 तक, ये 5 वर्ष ‘संकल्प से सिद्धि’ के वर्ष हैं: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


आदरणीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपका और सदन के सभी आदरणीय सदस्‍यों का आभार भी व्‍यक्‍त करता हूं और हम सब आज गौरव भी महसूस कर रहे हैं कि अगस्त क्रांति का, उन्‍हें स्मरण करने का, इस सदन के पवित्र स्थान पर हम लोगों को सौभाग्य मिला है। हम में से बहुत लोग हैं जिन्हें शायद अगस्त क्रांति, 9 अगस्‍त, उन घटनाओं का स्मरण होगा। लेकिन उसके बाद भी हम लोगों के लिए भी पुन: स्मरण प्रेरणा का कारण बनता है और तमाम जीवन में ऐसी महत्वपूर्ण घटनाओं का बार-बार स्मरण, जीवन की भी अच्छी घटनाओं का बार-बार स्मरण जीवन को एक नई ताकत देता है; राष्ट्र-जीवन को भी नई ताकत देता है। उसी प्रकार से हमारी जो नई पीढ़ी है, उन तक भी ये बात पहुंचाना हम लोगों का कर्तव्य रहता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इतिहास के एक स्‍वर्णिम पृष्ठों को, उस समय के माहौल को, उस समय के हमारे महापुरुषों के बलिदान को, कर्तव्य को, सामर्थ्य को, आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी हर पीढ़ी का दायित्व रहता है।

जब अगस्त क्रांति के 25 साल हुए, 50 साल हुए, देश के सभी लोगों ने उन घटनाओं का स्मरण किया था। आज 75 साल हो रहे हैं, और मैं इसे बड़ा महत्वपूर्ण मानता हूं। और इसलिए मैं अध्यक्ष महोदया जी का आभारी हूं कि आज हमें ये अवसर मिला है।

देश के स्वतंत्रता आंदोलन में 9 अगस्त एक ऐसी अवस्था में है, इतना व्यापक, इतना तीव्र आंदोलन, अंग्रेजों ने भी कल्पना नहीं की थी।

महात्मा गांधी, वरिष्ठ नेता, सब जेल चले गए। और वही पल था कि अनेक नए नेतृत्व ने जन्म लिया। लाल बहादुर शास्त्री, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कई अनेक youth युवा उस समय उस जो खाली जगह थी उसको भरा और आंदोलन को आगे बढ़ाया। इतिहास की ये घटनाएं हम लोगों के लिए एक नई प्रेरणा, नया सामर्थ्य, नया संकल्प, नया कृतत्व जगाने के लिए किस प्रकार से अवसर बने, ये हम लोगों का निरंतर प्रयास रहना चाहिए।

1947 में देश आजाद हुआ। एक प्रकार से 1857 से ले करके 1947 तक, आजादी के आंदोलन के अलग-अलग पड़ाव आए, अलग-अलग पराक्रम हुए, अलग-अलग बलिदान हुए; उतार-चढ़ाव भी आए। अलग-अलग मोड़ पर से ये आंदोलन गुजरा, लेकिन सैं‍तालिस की आजादी के पहले बयालिस की घटना एक प्रकार से अंतिम व्यापक आंदोलन था, अंतिम व्यापक जन-संघर्ष था और उस जन-संघर्ष ने आजादी के लिए देशवासियों को सिर्फ समय का ही इंतजार था, वो स्थिति पैदा कर दी थी। और जब हम आजादी के इस आंदोलन की ओर देखते हैं, तो nineteen forty two (1942) एक ऐसी पीठिका तैयार हुई थी, 1857 का स्वतंत्रता संग्राम, एक साथ देश के हर कोने में आजादी का बिगुल बजा था। और उसके बाद महात्मा गांधी का विदेश से लौटना, लोकमान्य तिलक का पूर्ण स्वराज्य और ‘’स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है’’ उस भाव को प्रकट करना, 1930 में महात्मा गांधी की डांडी मार्च, नेताजी सुभाष बोस द्वारा आजाद हिंद फौज की स्थापना, अनेक youth वीर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, चंद्रशेखर आजाद, चाफेकर बंधु, अनगिनत अपने-अपने समय पर बलिदान देते रहे। ये सारा ने एक पीठिका तैयार की और उस पीठिका का परिणाम था कि बयालिस में देश को एक उस छोर पर लाकर रख दिया कि अब नहीं तो कभी नहीं। आज नहीं होगा तो फिर कभी नहीं होगा, ये मिजाज देशवासियों का बन गया था। और इसके कारण उस आंदोलन में इस देश का छोटा-मोटा हर व्यक्ति जुड़ गया था। कभी लगता था राजाजी का आंदोलन elite class के द्वारा चल रहा है, लेकिन बयालिस की घटना, देश का कोई कोना ऐसा नहीं था, देश का कोई वर्ग ऐसा नहीं था, देश की कोई सामाजिक अवस्था ऐसी नहीं थी, कि जिसे इसे अपना न माना हो। और गांधी के शब्दों को ले करके वो चल पड़े थे। यही तो आंदोलन था, जब अंतिम स्वर में बात आई भारत छोड़ो। और सबसे बड़ी बात है महात्मा गांधी के पूरे आंदोलन में जो भाव कभी प्रकट नहीं हो सकता था, पूरे गांधी के चिंतन-मनन और विचार और आचार को देखें, उससे हट करके घटना घटी। इस महापुरुष ने कहा, करेंगे या मरेंगे। गांधी के मुंह से करेंगे या मरेंगे, शब्द देश के लिए अजूबा था। और इसलिए गांधी को भी उस समय कहना पड़ा था, और उन्होंने शब्‍द कहा था, ‘’आज से आप में हर एक को स्वयं को एक स्वतंत्र महिला या पुरुष समझना चाहिए और इस प्रकार काम करना चाहिए, मानों आप स्वतंत्र हैं। मैं पूर्ण स्वतंत्रता से कम किसी भी चीज पर संतुष्‍ट होने वाला नहीं हूं। ‘हम करेंगे या मरेंगे।’ ये बापू के शब्‍द थे और बापू ने स्पष्ट भी किया था कि मैंने मेरे अहिंसा के मार्ग को छोड़ा नहीं है। लेकिन आज स्थिति ऐसी और वो समय जन- सामान्य का दबाव ऐसा था कि बापू के लिए भी उसका नेतृत्व संभालते हुए उन जन-भावनाओं के अनुकूल इन शब्द प्रयोगों को करना हुआ था।

मैं समझता हूं कि उस समय समाज के जब सभी वर्ग जुड़ गए, गांव हो, किसान हो, मजदूर हो, टीचर हो, स्‍टूडेंट हो हर कोई इस आंदोलन के साथ जुड़ गए और करेंगे या मरेंगे और बापू तो यहां तक कहते थे कि अंग्रेजों की हिंसा के कारण कोई भी शहीद होता है तो उसके शरीर पर एक पट्टी लिखनी चाहिए करेंगे या मरेंगे और वो इस आजादी का आंदोलन का शहीद है। इस प्रकार की ऊंचाई तक इस आंदोलन को बापू ने ले जाने का प्रयास किया था और उसी का परिणाम था कि भारत गुलामी की जंजीरो से मुक्त हुआ। देश उस मुक्ति के लिए छटपटा रहा था नेता हो या नागरिक किसी की इस भावना की तीव्रता में कसु भर भी अंतर नहीं था और मैं समझता हूं देश जब उठ खड़ा होता है सामूहिकता की जब शक्ति पैदा होती है, लक्ष्य निर्धारित होता है और निर्धारित लक्ष्य  पर चलने के लिए लोग कृतसंगत होकर के चल पड़ते हैं तो 42 से 47 पांच साल के भीतर-भीतर बेडि़या चुर-चुर हो जाती हैं और मां भारती आजाद हो जाती है और इसलिए और उस समय रामवृक्ष बेनीपुरी उन्होंने एक किताब लिखी है जंजीरें और दीवारें और उस प्रस्तुति का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा है “एक अद्भुत वातावरण पूरे देश में बन गया। हर व्यक्ति नेता बन गया और देश का प्रत्येक चौराहा करो या मरो आंदोलन का दफ्तर बन गया। देश ने स्वयं को क्रांति के हवन कुंड में झोंक दिया। क्रांति की ज्वाला देश भर में धू-धू कर जल रही थी। बम्बई ने रास्ता दिखा दिया। आवागमन के सारे साधन ठप हो चुके थे। कचहरियां विरान हो चली थीं। भारत के लोगों की वीरता और ब्रिटिश सरकार की नृशंसता की खबरें पहुंच रही थी। जनता ने करो या मरो के गांधीवादी मंत्र को अच्छी तरह से दिल में बैठा लिया था”।

उस समय का ये वर्णन उस किताब जब ये पढ़ते है तो चलता है कि किस प्रकार का माहौल होगा और एक वो समय था कि ये घटना ने ये बात सही है कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद जो था इसका आरंभ हिन्दुस्तान में हुआ और इस घटना के बाद उसका अंत भी हिन्दुस्तान से हुआ था।  भारत आजाद होना सिर्फ भारत की आजादी नहीं थी 1942 के बाद विश्व के जिन-जिन भू-भाग में अफ्रीका में एशिया में इस उपनिवेशवाद के खिलाफ एक ज्वाला भड़की उसकी प्रेरणा केंद्र भारत बन गया था। और इसलिए भारत सिर्फ भारत की आजादी नहीं एक आजादी की ललक विश्व के कई भागों में फैलाने में भारत के जनसामान्य का संकल्प और कतृत्वय कारण बन गया था और कोई भी भारतीय इस बात के लिए गर्व कर सकता है और उसको हमने देखा कि एक बार भारत आजाद हुआ उसके बाद एक के बाद एक उपनिवेशवाद के सारे लोगों के झंडे ढ़हते गए और आजादी सब युग तक पहुंचने लगी। कुछ ही वर्षों में दुनिया के सारे देशों में आजादी प्राप्त हो गर्इ और ये काम बताता है कि ये भारत की इच्छाशक्ति का प्रबल इच्छाशक्ति का एक उत्तमोत्तम परिणाम था, हमारे लिए सबक यही है कि जब हम एक मन करके संकल्प लेकर के पूरे सामर्थ्य के साथ निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जुड़ जाते हैं तो ये देश की ताकत है कि हम देश को संकटों से बाहर निकाल देते हैं, देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकाल सकते हैं, देश को नए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तैयार कर सकते हैं, ये इतिहास ने बताया है और इसलिए उस समय इस पूरे आंदोलन को और पूज्य बापू के व्यक्तित्व को लगते हुए राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की जो कविता है बापू का सामर्थ्य क्‍या है उसको प्रकट करती है। कविता में उन्होंने कहा था

चल पड़े जिधर दो डग, मग में
चल पड़े कोटि पग उसी ओर
गड़ गई जिधर भी एक दृष्टि
गड़ गए कोटि दृग उसी ओर

जिस तरफ गांधी के दो कदम चले थे उस तरफ अपने-आप करोड़ो लोग चल पड़ते थे, जिधर गांधी जी की दृष्टि टिक जाती थी उधर करोड़ो करोड़ आंखें देखने लग जाती थी और इसलिए इस महान व्यक्तित्व ने लेकिन आज जब हम 2017 में हैं हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि आज हमारे पास गांधी नहीं है आज हमारे पास उस समय जो ऊंचाई वाला नेतृत्व था वो आज हमारे पास नहीं है लेकिन सवा सौ करोड़ देशवासियों के विश्वास के साथ बैठे हुए हम सब लोग मिलकर के उन सपनों को पूरा करने का प्रयास करें तो मैं मानता हूं कि गांधी के सपनों को उन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करना मुश्किल काम नहीं है और आज आज का ये अवसर किसी बात के लिए हमें उस समय भी जो वैश्विक हालात थे 1942 में भारत की आजादी के लिए बहुत अनुकूल माहौल थे जो भी इतिहास से परिचित है उसे मालूम है मैं समझता हूं आज फिर से एक बार 2017 में जबकि Quit India Movement हम 75 साल मना रहे है उस समय विश्व में वो अनुकूलता है जो भारत के लिए बहुत सहानुकूल है और अनुकूल व्यवस्था का फायदा हम जितना जल्दी उठा दें जैसे उस समय विश्व के कई देशों के लिए हम प्रेरणा का कारण बने थे अगर आज हम मौका ले लें तो आज फिर से एक बार हम विश्व के कई देशों के लिए उपयोगी हो सकते हैं प्रेरणा का कारण बन सकते हैं, ऐसे मोड़ पर आज हम खड़े हैं 1942 & 2017 इस दोनों में वैश्विक परिवेश में भारत का महात्मय, भारत के लिए अवसर समान रूप से खड़ें हैं और उस समय हम इस बात को कैसे लें, हम उसकी जिम्मेवारी कैसे लें मैं मानता हूं इतिहास के इन प्रकरणों से सामर्थ्य से प्रेरणा लेकर के हमारे लिए दल से बड़ा देश होता है राजनीति से ऊपर राष्ट्नीति होती है मेरे अपने ऊपर सवा सौ करोड़ देशवासी होते हैं अगर उस भाव को लेकर के हम उड़ चले हम सब मिलकर के आगे बढ़ें तो हम इन समस्याओं के खिलाफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं हम इस बात से इंकार कैसे कर सकते हैं कि भ्रष्‍टाचार रूपी दीमक ने देश को कैसे तबाह करके रखा हुआ है। राजनीतिक भ्रष्टाचार हो, सामाजिक भ्रष्टाचार हो या व्यक्तिगत भ्रष्टाचार हो कल क्या हुआ कब किसने किया उसके लिए विवाद के लिए समय बहुत होते हैं लेकिन आज पवित्र पल हम आगे तो ईमानदारी का उत्सव मना सकते हैं ईमानदारी का संकल्प लेकर के देश का नेतृत्व कर सकते हैं क्या देश को ले जा सकते हैं ये समय की मांग है देश के सामान्य मानवीकी की मांग है, गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा ये हमारे सामने चुनौतियां हैं इन चुनौतियों को हम सरकार की चुनौतियां न माने वो चुनौतिया देश की है देश की गरीब  के सामने संकट भरे सवाल खड़े हैं और इसलिए देश के लिए जीने मरने वाले देश के लिए संकल्प करने वाले हम सब लोगों का दायित्व बनता है इसको पूरा करने के लिए हम कुछ मुद्दों पर 1942 में भी अलग-अलग धारा के लोग थे। हिंसा में विश्वास करने वाले भी लोग थे नेता जी सुभाष बाबू की सोच अलग थी लेकिन 1942 में सबने एक स्वर से कह दिया था आपको गांधी के नेतृत्व में Quit India यही हमारा मार्ग है। हमारे भी लालन-पालन विचारधारा अलग-अलग रही होगी। लेकिन ये समय की मांग है कि हम कुछ बिंदुओं से देश को मुक्त कराने के लिए संकल्प का अवसर लेकर के चले चाहे गरीबी हो, भूखमरी हो, अशिक्षा हो अंत स्‍वत: हो। महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज का सपना कितना पीछे छूट गया क्या कारण है कि गांव लोग छोड़ छोड़ कर के शहरो की ओर बस रहे है। गांव की उस चिंता को गांधी के मन में जो गांव था क्या हम हमारे भीतर उसको पुर्नजीवित कर सकते हैं क्या गांव गरीब किसान दलित पीढ़ी शोषित वंचित उसके जीवन के लिए अगर हम कुछ कर सकते हैं मिलकर के करना हैं ये सवाल मेरा और तेरा नहीं है ये सवाल इस पार और उस पार का नहीं है ये हम सबका है सवा सौ करोड़़ देशवासियों का है। सवा सौ करोड़़ देशवासी के जन‍प्रतिनिधि का है और यही तो समय होता है जब वो प्रेरणा हम लोगों को कुछ कर लेने की शक्ति देती है और उसको लेकर के हम आगे चल सकते हैं हम ये भी जानते हैं देश में जाने अनजाने में अधिकार भाव प्रबल होता चला गया, कर्तव्य भाव लुप्त होता गया। राष्ट्रजीवन के अंदर, समाज जीवन के अंदर अधिकार भाव का महात्म्य उतना ही रहते हुए भी अगर कर्तव्य भाव को थोड़ा सा भी हम कम आंकने लगेगे तो समाज जीवन में कितनी बड़ी मुसीबते होती हैं और दुर्भाग्य से हम लोगों का way of life हमारे चरित्र में कुछ चीजें घुस गई हैं जिसमें हमें बुराई नहीं लगता है मैं गलत कर रहा हूं अगर मैं चौराहे पर red light cross करके निकल जाता हूं तो मुझे लगता ही नहीं कि मैं कानून तोड़ रहा हूं मैं कहीं पर थूक देता हूं गंदगी करता हूं हमें लगता ही नहीं कि मैं गलत कर रहा हूं हम अपने कर्तव्य भाव से एक प्रकार से हमारे जहन में हमारे way of life में इस प्रकार के नियमों को तोड़ना कानूनों को तोड़ना ये स्वभाव बनता चला गया। छोटी-छोटी घटनाएं हिंसा की ओर ले जा रही हैं अस्पताल में किसी डाक्टर के द्वारा कुछ पेशेन्ट का कुछ हुआ डाक्टर दोषी है नहीं है, अस्पताल दोषी हैं नहीं हैं, रिश्तेदार जाते हैं अस्पताल को आग लगा देते हैं। डाक्टर को मारते हैं पीटते हैं हर छोटी-मोटी घटना अगर एक्सीडेन्ट हो गया हम कार को जला देते हैं ड्राइवर को मार देते हैं। ये जो चला है ये हम law of abiding citizen  के नाते हमारा कर्तव्य होना चाहिए हम मानने लगे हैं कि हमारे से कुछ छूट गया है। हमारी way of life में कुछ ऐसी चीजें घुस गई हैं जैसे हमें लगता ही नहीं है कि हम कानून तोड़ रहे हैं और इसलिए ये leadership की जिम्मेवारी होती है कि समाज के अंदर हम सबकी जिम्मेवारी होती है कि हम समाज के अंदर इन दोषों से मुक्ति दिलाकर के समाज के अंदर कर्तव्य भाव को जगाए!

शौचालय स्वच्छता ये विषय मजाक के नहीं हैं उन मां बहनों की परेशानी समझो तब पता चलता है कि जब शौचालय नहीं होता तो रात के अंधेरे का इंतजार का समय दिन कैसे बिताना पड़ता है और इसलिए शौचालय बनाना एक काम है लेकिन समाज की मानसिकता बदल कर के शौचालय का उपयोग करना ये जनसामान्य की शिक्षा के लिए आवश्यक है इस बात को हमें जगाना होगा और ये भाव कानूनों से नहीं होता है, कानून बनाने से नहीं होता है कानून सिर्फ मदद कर सकता है लेकिन कर्तव्य भाव जगाने से ज्यादा हो सकता है और इसलिए हम लोगों को करना होगा। हमारे देश की माताएं बहनें देश के अंदर कम से कम देश पर जो उनका बोझ है।

देश को कम से कम जिनका बोझ सहना पडता है, वो अगर कोई वर्ग है तो इस देश की माताएं, बहनें हैं, महिलाएं हैं। उनका सामर्थ्य हमें कितनी ताकत दे सकता है, उनकी भागीदारी हमारे विकास के अंदर हमें कितना बल दे सकती है। पूरे आजादी के आंदोलन में देखिए महात्मा गांधी के साथ आंदोलन ये जहां-जहां हुआ, अनेक ऐसी माताएं-बहनें उस आंदोनल का नेतृत्व करती थीं और देश को आजादी दिलाने में भी हमारी माताओं-बहनों का उस युग में भी उतना ही योगदान था। आज भी राष्ट्र के जीवन में उनका उतना ही योगदान है। उसको आगे बढ़ाने की दिशा में हम लोगों ने कर्तव्य से आगे बढ़ना चाहिए।

ये बात सही है कि 1857 से 1942, हमने देखा कि आजादी का आंदोलन अलग-अलग पड़ाव से गुजरा, उतार-चढ़ाव आए, अलग-अलग मोड़ आए, नेतृत्व नए-नए आते गए, कभी क्रांति का पक्ष ऊपर हो गया तो कभी अहिंसा का पक्ष ऊपर हो गया। कभी दोनों धाराओं के बीच टकराव का भी माहौल रहा, कभी दोनों धाराएं एक-दूसरे को पूरक भी हुईं। लेकिन हमने देखा है, लेकिन ये सारा 1857 से 1942 का कालखंड हम देखें, एक प्रकार से incremental था। धीरे-धीरे बढ़ रहा था, धीरे-धीरे फैल रहा था, धीरे-धीरे लोग जुड़ रहे थे। लेकिन Nineteen Forty Two to Nineteen Forty Seven, वो incremental change नहीं था। एक disruption का environment था और उसने सारे समीकरणों को खत्म करके आजादी देने के लिए अंग्रेजों को मजबूर कर दिया, जाने के लिए मजबूर कर दिया। 1857 से 1942, धीरे-धीरे कुछ होता रहता था, चलता रहता था, लेकिन Forty Two से Forty Seven, वो स्थिति नहीं थी।

हम भी देखें, समाज जीवन में हम पिछले 100, 200 साल का इतिहास देखें तो विकास की यात्रा एक incremental रही थी। धीरे-धीरे दुनिया आगे बढ़ रही थी, धीरे-धीरे दुनिया अपने-आपको बदल रही थी। लेकिन पिछले 30-40 साल में दुनिया में अचानक बदलाव आया, जीवन में अचानक बदलाव आया और technology ने बहुत बड़ा roll play किया। कोई कल्पना नहीं कर सकता जो इस 30-40 साल में दुनिया में जो बदलाव आया है, व्यक्ति के जीवन में, मानव-जीवन में, सोच में जो बदलाव आया है; 30-40 साल पहले हमें नजर भी नहीं आता था। एक disruption वाला एक positive change हम अनुभव करते हैं।

जिस प्रकार से Incremental से बाहर निकल करके एकदम से एक high jump की तरफ चले गए, मैं समझता हूं 2017 - 2022, Quit India के 75 साल और आजादी के 75 साल के बीच का पांच साल, Forty Two to Forty Seven का जो मिजाज था, वही मिजाज अगर हम दोबारा देश में पैदा करें Two Thousand Seventeen to Two Thousand Twenty Two, आजादी के 75 साल मनाएंगे तब, तब हम देश के, हमारे आजादी के वीरों की जो कामनाएं थीं, उन सपनों को पूरा करने के लिए हम अपने-आपको खपाएंगे। हम अपने संकल्प को ले करके आगे चलेंगे। मुझे विश्वास है न सिर्फ हमारे देश का ही भला होगा, लेकिन जैसे Forty two to Forty seven की सफलता के कारण दुनिया के अनेक देशों को लाभ मिला, आजादी की ललक पैदा हुई, ताकत मिली, भारत को आज दुनिया के कई देश, एक भाग ऐसा है जो भारत को उस रूप में देख रहा है। अगर हम भारत को Two thousand Seventeen to Two thousand Twenty Two, जो कि हम लोगों की जिम्‍मेवारी का कालखंड है, अगर हम विश्व के सामने भारत को उस ऊंचाई पर लेके जाते हैं तो विश्व का एक बहुत बड़ा समुदाय है, जो कि नेतृत्व की तलाश में, मदद की तलाश में है, किसी के प्रयोगों से सीखना चाहता है; भारत उस पूर्ति के लिए सामर्थ्यवान है; अगर उसको करने के लिए हम कोशिश करें, मैं समझता हूं देश की बहुत बड़ी सेवा होगी। और इसलिए एक सामूहिक इच्छा-शक्ति जगाना, देश को संकल्पबद्ध करना, देश के लोगों को साथ जोड़ करके चलना और इन पांच वर्ष के महत्व को हम अगर आगे बढ़ाएंगे तो मुझे विश्वास है कि हम कुछ मुद्दों पर सहमति बना करके बहुत बड़ा काम कर सकते हैं।

हमने अभी-अभी देखा जीएसटी, और ये मैं बार-बार कहता हूं ये मेरा सिर्फ राजनीतिक statement नहीं है, ये मेरा conviction है। जीएसटी की सफलता किसी सरकार की सफलता नहीं है, जीएसटी की सफलता किसी दल की सफलता नहीं है। जीएसटी की सफलता इस सदन में बैठे हुए लोगों की इच्छाशक्ति का परिणाम है। चाहे यहां बैठे हों, चाहे वहां बैठे हों, ये सबको जाता है, राज्यों को जाता है, देश के सामान्य व्यापारी को जाता है; और उसी के कारण ये संभव हुआ है। जो देश के राजनीतिक नेतृत्व  अपनी प्रतिबद्धता के कारण इतना बड़ा काम कर लेती है, दुनिया के लिए अजूबा है। जीएसटी विश्व के लिए बहुत बड़ा अजूबा है, उसके Scale को देख करके हुए, अगर ये देश ये कर सकता है, तो और भी सारे निर्णय ये देख मिल-बैठ करके कर सकता है। और सवा सौ करोड़ देशवासियों के प्रतिनिधि के रूप में, सवा सौ करोड़ देशवासियों को साथ ले करके 2022 को संकल्प ले करके अगर हम चलेंगे, मुझे विश्वास है कि जो परिणाम हमें लाना है, और वो परिणाम हम लाके रहेंगे।

महात्मा गांधी ने नारा दिया था करो या मरो, उस समय का सूत्र था, करेंगे या मरेंगे। आज 2017 में 2022 को भारत कैसे हो, ये संकल्प ले करके अगर चलना है, तो हम लोगों को भी हम सब मिल करके देश से भ्रष्टाचार दूर करेंगे और करके रहेंगे। हम सभी मिलकर गरीबों को उनका अधिकार दिलाएंगे, और दिलाकर रहेंगे। हम सभी मिलकर नौजवानों को स्वरोजगार के और अवसर देंगे और देकर रहेंगे। हम सभी मिलकर देश से कुपोषण की समस्या को खत्म करेंगे और करके रहेंगे। हम सभी मिलकर महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने वाली बेड़ियों को खत्म करेंगे और करके रहेंगे। हम सभी मिलकर देश से अशिक्षा खत्म करेंगे और करके रहेंगे। और कोई भी बहुत विषय हो सकते हैं, लेकिन अगर उस समय का मंत्र था करेंगे या मरेंगे, तो आजाद हिन्दुस्तान में 75 साल बाद आजादी का पर्व मनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं तब करेंगे और करके रहेंगे, इस संकल्प को ले करके हम आगे बढ़ेंगे। ये संकल्प किसी दल का नहीं, ये संकल्प किसी सरकार का नहीं, ये संकल्प सवा सौ करोड़ देशवासी, सवा सौ करोड़ देशवासियों के जन-प्रतिनिधि, इन सबका मिल करके जब संकल्प बनेगा तो मुझे विश्वास है संकल्प से सिद्धि के ये पांच साल, 2017 से 2022, आजादी के 75 साल, आजादी के दीवानों को सपना पूरा करने का सामर्थ्यवान समय, इसको हम प्रेरणा का कारण बनाएं। आज अगस्त क्रांति दिवस पर उन महापुरुषों का स्मरण करते हुए, उनके त्याग, तपस्या, बलिदान का स्मरण करते हुए, उस पुण्य  स्मरण से आशीर्वाद मांगते हुए, हम सब मिल करके, कुछ बातों पर सहमति बना करके देश का नेतृत्व दें, देश को समस्याओं से मुक्त करें। सपने, सामर्थ्य, शक्ति और लक्ष्य की पूर्ति के लिए आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ मैं फिर एक बार अध्यक्ष महोदया जी, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं और आजादी के दीवानों को नमन करता हूं।