बुधवार, 18 जनवरी 2017

श्रीमती वसुंधरा राजे सरकार, जो अपना रिपोर्टकार्ड हर साल पेश कर रही है - अरविन्द सिसोदिया


श्रीमती वसुंधरा राजे सरकार, पहली सरकार है जो अपना रिपोर्टकार्ड हर साल पेश  कर रही है - अरविन्द सिसोदिया
जब कांग्रेस को कुशासन के कारण जनता ने सत्ता से हटाया था , तब ढाई लाख करोड के लगभग का कर्जा राजस्थान पर था!  राजस्थान की कल्याणकारी मुख्यमंत्री सम्मानीय श्रीमती वसुंधरा राजे जी के नेतृत्व में कुशल  वित्तीय प्रबंधन के द्वारा, प्रदेश के हालात सुधारे और तेज गति का विकास राजस्थान को दिया। यह पहली सरकार जो अपना रिपोर्टकार्ड हर साल पेश कर रही है। चुनाव घोषणपत्र के कामों को पूरा करने में लगी हुई है। तीन साल में ही 80 फीसदी काम पूरा कर चुकी है। हर जिले में जिला मुख्यालय पर जा कर जनता के बीच बिना लाग लपेट के गर्व से अपनी बात रख रही है। सरकार बता रही है कि तीन साल में कितना खर्च कर दिया और क्या - क्या काम किये और आगे क्या करने जा रही है। 24 घंटे जनता के लिये जागने वाली सरकार का नाम वसुंधरा राजे सरकार है। हम उनकी मेहनत को, उनके जज्बे को, उनके हौंसले को सलाम करते हे। उनके कुशल प्रबंधन में राजस्थान पूरे देश  में गर्व सिर ऊंचा किये हुये है। इसके लिये मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी को धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित करते हैं। जय जय राजस्थान !

                                                                भवदीय
                                         अरविन्द सिसोदिया,भाजपा जिला महामंत्री ,
                                        कोटा शहर जिला      9414180151   / 9509559131






तीन साल में दिखा जमीन-आसमान का फर्क


मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि राज्य सरकार ने समाज के हर वर्ग तक विकास पहुंचाया है। विरासत में मिले करीब ढाई लाख करोड़ के कर्जे के बावजूद कुशल वित्तीय प्रबंधन के बल पर प्रदेश आज विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास के मामले में केवल 3 साल की अवधि में ही जमीन और आसमान का फर्क ला दिया है। इसी गति से काम करते हुए आने वाले 2 साल में प्रदेश को देश का सबसे खुशहाल राज्य बनाएंगे।

श्रीमती राजे राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को सीकर में करीब 280 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के बाद जनसभा को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि तीन सालों में कई बड़ी चुनौतियों के बावजूद हमने विकास के कीर्तिमान कायम किए हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, स्किल डवलपमेंट, भामाशाह योजना, स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण, कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने सहित कई क्षेत्रों में हम पूरे देश में नम्बर वन हैं। जनता के विश्वास और प्यार के बलबूते हम हर चुनौती का डटकर मुकाबला करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है और सुराज संकल्प के सभी वादे जरूर पूरे होंगे। राजस्थान को हम हर हाल में देश का नम्बर वन राज्य बनाकर रहेंगे।

झुंझुनू और सीकर के 1100 गांवों की बुझाएंगे प्यास
मुख्यमंत्री ने सभा में घोषणा की कि कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना के तहत सीकर जिले के 865 गांवों और 6 कस्बों तथा झुंझुनू जिले के 321 गांवों तथा 6 कस्बों की पेयजल योजना की डीपीआर बनाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस स्वीकृति से इन दोनों जिलों की यह लम्बे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी।

सीकर में 3 साल में 2 हजार 636 करोड़ के विकास कार्य
श्रीमती राजे ने कहा कि सीकर वह मिट्टी है जिसने हमें देश पर मिटने वाले जांबाज़ सैनिक दिए हैं। शेखावाटी क्षेत्र में सबसे ज्यादा सैनिक पैदा होते हैं। सीकर में पिछले 3 सालों में कुल 2 हजार 636 करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं। जिनमें करीब 91 करोड़ रुपये के ग्रामीण गौरव पथ, करीब 30 करोड़ रुपये के 24 नये 33 केवी जीएसएस, करीब 12 करोड़ रुपये से फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़-धोद तथा दातारामगढ़ के गांवों में आरओ प्लांट, 58 करोड़ रुपये के नीमकाथाना क्षेत्र में ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं, स्वास्थ्य भवनों के निर्माण तथा विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं पर 92 करोड़ रुपये, आरएसएचडीपी (एडीबी) के 317 करोड़ तथा आरएसआरडीसी के 125 करोड़ रुपये के काम शामिल हैं।

पहली सरकार जिसने जिलों में जाकर दिखाया अपना रिपोर्ट कार्ड
श्रीमती राजे ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में यह पहली सरकार है, जो अपने काम का रिपोर्ट कार्ड हर जिले में जाकर दे रही है। उन्होंने कहा कि यूं तो विकास के लिए 3 साल की अवधि बहुत कम होती है, लेकिन हमने इतने कम समय में भी प्रदेश का समग्र रूप से विकास करने का प्रयास किया है।

जल स्वावलम्बन अभियान के लिए 1 करोड़ से अधिक का सहयोग
कार्यक्रम में श्रीमती राजे को मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के द्वितीय चरण के लिए खाटूश्याम जी मंदिर ट्रस्ट की ओर से 21 लाख रुपये, मुम्बई प्रवासी उद्योगपति श्री मूलचंद कुमावत ने 11 लाख रुपये के चैक भेंट किए तथा डीएस ग्रुप फाउण्डेशन नई दिल्ली द्वारा 21 लाख रुपये और अजीतगढ़ क्षेत्र उद्यमी संघ की ओर से 51 लाख रुपये का सहयोग देने की घोषणा की गई।

शहीद वीरांगना को 19 लाख का पैकेज
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने श्रीमाधोपुर तहसील के दादिया रामपुरा निवासी शहीद नाथूराम महला की वीरांगना को राज्य सरकार की ओर से 19 लाख रुपये की सहायता राशि का पैकेज भेंट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को शहीद नाथूराम महला की शहादत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के परिवारों को पूरा सम्बल देगी।

प्रदर्शनी और रोजगार मेले का उद्घाटन
श्रीमती राजे ने राज्य सरकार की 3 साल की उपलब्धियों पर आधारित जिला स्तरीय प्रदर्शनी, रोजगार एवं आरोग्य मेला, कैंसर जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर का शुभारम्भ कर अवलोकन किया। उन्होंने इस अवसर पर सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि वितरित की और जिले की प्रतिभाओं को सम्मानित किया।

इन विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास
  लोकार्पण/उद्घाटन लागत              कुल 280.20 Cr.
1. सीवरेज प्रोजेक्ट, फतेहपुर 57.16 Cr.
2. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान, फतेहपुर 12.07 Cr.
3. स्मृति वन, सीकर 7.83 Cr.
4. उपखण्ड अधिकारी कार्यालय, खण्डेला 2.00 Cr.
5. उपखण्ड अधिकारी, रामगढ़ शेखावाटी 2.00 Cr.
6. उप तहसील, नेछवा 1.75 Cr.
7. उप तहसील, लोसल 1.75 Cr.
8. सदर थाना, नीमकाथाना 1.68 Cr.
9. इको टूरिज्म प्रोजेक्ट, हर्षनाथ प्रथम चरण 1.00 Cr.
10. एनयूएलएम अन्तर्गत रैन बसैरा निर्माण 0.36 Cr.

शिलान्यास
1. 132 केवी ग्रिड सब स्टेशन वाटर वर्क्स, सांवली रोड, सीकर 14.74 Cr.
2. जिले की 9 नगर पालिकाओं में शहरी गौरव पथ 9ग2.5 करोड़ प्रत्येक नगर पालिका 22.50 Cr.
3. पूर्ण गठित शहरी जल योजना 26.00 Cr.
4. सीवरेज योजना में 2 एमएलडी एसटीपी का निर्माण (अमृत योजना) सीवरेज कार्य कुल 120.81 Cr.
5. प्याज मण्डी रसीदपुरा 4.80 Cr.
6. उपखण्ड अधिकारी कार्यालय, धोद 2.00 Cr.
7. तहसील धोद 1.75 Cr.

इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री श्री कालीचरण सराफ, देवस्थान राज्यमंत्री श्री राजकुमार रिणवा, चिकित्सा राज्यमंत्री श्री बंशीधर खण्डेला, सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रेमसिंह बाजौर, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती सुमन शर्मा, भूदान बोर्ड अध्यक्ष श्री रामनारायण नागवा, माटी कला बोर्ड अध्यक्ष श्री हरीश कुमावत, सांसद श्री सुमेधानन्द, विधायक श्री गोरधन वर्मा, श्री रतनलाल जलधारी, श्री झाबरसिंह खर्रा, श्री रामलाल शर्मा, जिला प्रमुख सुश्री अपर्णा रोलन, यूआईटी चेयरमैन श्री हरिराम रिणवा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

जयपुर, 18 जनवरी 2017

राष्ट्रीय विचारों का डिजिटाईजेशन आवश्यक : संघ








राष्ट्रीय विचारों की मजबूती के लिए राष्ट्रीय साहित्य का डिजिटाईजेशन आवश्यक : जे. नंद कुमार

नई दिल्ली, 12 जनवरी (इंविसंके). इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र तथा नेशनल बुक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पुस्तक मेले में आज राष्ट्रीय साहित्य एवं डिजिटल मीडिया विषय पर विचार गोष्टी आयोजित की गयी. इस अवसर पर सुरुचि प्रकाशन द्वारा 'कल्पवृक्ष' नाम से पुस्तक का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री जे. नन्द कुमार द्वारा किया गया. श्री नन्द कुमार ने इस विषय पर कहा कि राष्ट्र क्या है, राष्ट्रीय क्या है, यह चर्चा बहुत सालों से भारत में चल रही है. देश में कुछ लोगों के विचार में राष्ट्र जैसी कोई चीज नहीं है, ऐसे विचार रखने वाले इंटैलैक्चुअल, तथाकथित लेखकों की लिखी हुई पुस्तकें भी हमें मिलती हैं.
उन्होंने बताया कि भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र है, हिमालय से समुद्र तक का भाग एक राष्ट्र है. इस राष्ट्र की कल्पना वेदकाल से ही यहां मौजूद है. यह कोई नया या बनावटी विचार नहीं है. यह राष्ट्र राजनीतिक अथवा मिलिट्री के आधार के बिना भी एक ही है. कश्मीर ये लेकर कन्याकुमारी तक एक विचार, एक आदर्श से यह एक राष्ट्र है. राष्ट्रीय साहित्य के संदर्भ में इस विचार को समाज के अन्दर पहुंचाने के लिए पहले जो साहित्य निर्माण होता रहता था, उस साहित्य के प्रचार के बारे में हमें सोचना होगा. उस तरह के साहित्य से मिले विचार से ही पूर्व में यह राष्ट्र शक्तिशाली बना था. इसको ध्यान में रखते हुए ही प्राचीन काल में ही यहां रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों का तमिल, तेलगु, मलयालम आदि विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ और इन ग्रंथों के विचार एवं  आदर्श जन-जन के हृदय तक पहुंचे.

श्री नंद कुमार ने चिता जताई कि भारत में उभरे तथाकथित नवराष्ट्रवादी, वामपंथी सोच वाले कहते हैं कि संस्कृत आर्यों की भाषा है और वह यहां बाहर से आए थे. यह उनका अराष्ट्रीय दृष्टिकोण है. भारत में साहित्य अनेक भाषाओं में लिखा गया है, लेकिन उसमें विचार एक ही है. पूरे भारत को जोड़कर रखने वाला साहित्य, भारत को एक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले साहित्य को ज्यादा प्रचार गत कुछ सालों से नहीं मिल रहा है. इसके लिए भारत में ब्रिटिश काल से ही सक्रिय कछ तथाकथित शैक्षणिक संस्थाएं दोषी हैं. आजादी के बाद यहां उनसे निकले इंटेलैक्चुअल सक्रिय हो गए. ऐसे लोगों ने एक विस्मृति हमारे ऊपर थोप दी है. इनके कारण से राष्ट्रीय साहित्य का प्रचार कम हो गया. उसकी जगह पर नवराष्ट्रवाद या बहुराष्ट्रवाद अथवा अराष्ट्रवाद को मानने वाले लोगों के साहित्य का ज्यादा प्रचार हुआ. उनके विचार में राष्ट्र नहीं है इसलिए राष्ट्र के टुकड़ करने के लिए यह लोग आगे निकलते हैं. ‘भारत के टुकड़े होंगे,ऐसे नारे लगाने वाले लोगों की संख्या इसी अराष्ट्रीय साहित्य से निकले विचार के कारण बढ़ रही है.
उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में माना जा रहा है कि पुस्तक पड़ना कम हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. आज भी प्रकाशन संस्थाओं की संख्या बढ़ रही है, इससे पता चलता है कि लोग पुस्तकें खरीद कर पढ़ रहे हैं. पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा पुस्तकें खरीदना इसका प्रमाण है. आजकल पुस्तकों के क्षेत्र में बढ़ रहा डिजिटाइजेशन अच्छी बात है. राष्ट्रीय साहित्य की भी बड़ी संख्या में डिजिटाइजेशन और पुस्तक मेलों की जरूरत है. ईबुक्स का वितरण अपेक्षानुरूप नहीं हो रहा है, इसे भी बढ़ाने की जरूरत है. भारत कथा वाचन का बहुत बड़ा स्थान है, इस तरह की पुस्तकें, संस्कृति-राष्ट्र से सम्बन्धित, इस राष्ट्र को प्रेरणा देने वाली पुस्तकों की निर्मिति हार्डकॉपी के साथ-साथ सॉफ्ट कॉपी के रूप में भी पूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है. आज मोबाइल में लोग पुस्तके पढ़ते हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा इस तरह की पुस्तकें आने की जरूरत है. पुस्तकों के विषय के साथ-साथ भाषा की शुद्धता के बारे में भी सोचने की आवश्यकता है.
श्री नंद कुमार आह्वान किया कि साहित्य के द्वारा राष्ट्रीय विचार के प्रचार दोनो प्रकार के क्षेत्र पर हम सबको काम करने की जरूरत है. यह केवल कुछ पब्लिशिंग हाउसेज का काम नहीं है, व्यक्ति भी अपने तरफ से कर सकते हैं. व्यक्ति स्वयं पुस्तक का लेखक, प्रकाशत तथा वितरण भी बन सकता है. इसके लिए आज हम सोशल मीडिया का सपोर्ट ले सकते हैं.
आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने बताया कि डिजिटल मीडिया विचारों के प्रचार के लिए आज एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरा है. भारत के विषय में जो भी चर्चा चली है, जिसमें चाहे जम्मू-कश्मीर, गोहत्या पर प्रतिबन्ध, भारत की सांस्कृतिक विरासत का विषय हो. इन सारे विषयों पर हमें यह दिखता है, कि एक काउंटर व्यू डिजिटल मीडिया में अचानक प्रमाणिक तथ्यों, संदर्भ सहित आता है और इलैक्ट्रानिक मीडिया के साथ-साथ प्रिंट मीडिया को भी उसका सहारा लेना पड़ता है. उदाहरण के लिए औरंगजेब रोड़ के नाम परिर्वतन का विषय आया. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर उस मार्ग का नाम क्यों न हो, स्वाभावतः 70-80 के दशक की तरह इस विषय को ले जाने की कोशिशें होने लगीं कि क्या सेकुलर है और क्या कम्युनल. वो दौर होता तो औरंगजेब कितना सेकुलर था, कितना अच्छा प्रशासक था, कितना श्रेष्ठ था यह बताने का बहुत प्रयास होता. ऐसी स्थिति में शायद कुछ निर्णय भी नहीं होता. लेकिन डिजिटल मीडिया का प्लेटफार्म था जिसने यह विषय पकड़ा, उस पर चर्चाएं कीं, उस पर साहित्य से संदर्भ भी निकाले, नया साहित्य भी डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत हुआ और चर्चा इस दिशा में गई कि बिना कुछ समय गंवाए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर उस रास्ते का नामांतरण हुआ. डिजिटल मीडिया के महत्व को देखते हुए इसके गलत इस्तेमाल भी किया जा रहा है, जिससे पूरा विश्व चिंतित है. इसके लिए डिजिटल स्पेस पर वैधानिक नियंत्रण कैसे रखें इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. साइबर आक्रमण के माध्यम से देश के विरुद्ध हो रहे दुष्प्रचार से बचाव के लिए हमें अपनी व्यवस्थाएं दुरस्त करने की जरूरत है.
श्री केतकर ने बताया की समाज को हम सही तरीके से इसका प्रयोग करने के लिए तैयार करते हैं तो आने वाले समय में प्रिंट मीडिया भी डिजिटल मीडिया के साथ राष्ट्रीय विचारों का प्रभावी वाहक बनने के लिए बाध्य हो जाएगा और धीरे-धीरे इलैक्ट्रानिक मीडिया को भी वह राह पकड़नी होगी, ऐसी स्थिति के लिए हम डिजिटल मीडिया का सकारात्मक प्रयोग करें, प्रयोगशीलता से लोगों को ट्रेंड करें, उनकी मानसिकता बनाएं, सोच बनाएं, स्किल्स बढ़ाएं. इस सोच के साथ हम आगे बढ़ते हैं तो मुझे लगता है कि ऐसी संगोष्ठी का सही मायने में उपयोग होगा और डिजिटल मीडिया एक सेमी इंटरटेनमेंट माध्यम न रहते हुए प्रभावी, वैचारिक, चिंतन और मंथन का साधन बन पाएगा.
सुप्रसिद्ध हिन्दी ब्लागर श्री नलिन चौहान ने इस विषय पर कहा कि आज प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया को फाॅलो कर रहा है. यूनिकोड के आने से अब हम अपने विचार डिजिटल मीडिया द्वारा सुगमता से सबको बता सकते हैं. हाल ही में फेसबुक ने जो नया फीचर इंस्टेंट लाइव शुरु किया है, इसके माध्यम से हम अपने विचार इलैक्ट्रानिक मीडिया की तरह को तत्काल जन-जन तक पहुंचा सकते हैं. डिजिटल मीडिया की जब हम बात करते हैं तो हमको कुछ लोग ऐसे तैयार करने होंगे जो भाषा और उसके व्याकरण पर मूल रूप से काम करें. क्योंकि उदाहरण के लिए जैसे सेकुलर शब्द की अवधारणा जो चर्च और स्टेट से निकली थी. हमारे यहां भारतीय संदर्भ उसका बहुत भिन्न हो गया. इस अवसर पर मंच संचलन इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण आनंद ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुरुचि प्रकाशन के प्रबंधक गौतम सपरा द्वारा प्रस्तुत किया गया.

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विचारों की मजबूती के लिए साहित्य का डिजिटलाइजेशन जरूरी : जे. नंद कुमार
By  Publish Date:Thu, 12 Jan 2017
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली :
http://www.jagran.com
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नन्द कुमार ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक विचार, एक आदर्श से यह एक राष्ट्र है। राष्ट्रीय साहित्य के संदर्भ में इस विचार को समाज के अन्दर पहुंचाने के लिए पहले जो साहित्य निर्माण होता रहता था, उस साहित्य के प्रचार के बारे में हमें सोचना होगा। उस तरह के साहित्य से मिले विचार से ही पूर्व में यह राष्ट्र शक्तिशाली बना था।
इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र तथा नेशनल बुक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पुस्तक मेले में आज राष्ट्रीय साहित्य एवं डिजिटल मीडिया विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर सुरुचि प्रकाशन द्वारा 'कल्पवृक्ष' नाम से पुस्तक का विमोचन संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नन्द कुमार द्वारा किया गया।
कुमार ने कहा कि भारत में साहित्य अनेक भाषाओं में लिखा गया है, लेकिन उसमें विचार एक ही है। पूरे भारत को जोड़कर रखने वाला साहित्य, भारत को एक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले साहित्य को ज्यादा प्रचार गत कुछ सालों से नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में माना जा रहा है कि पुस्तक पढ़ना कम हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। आज भी प्रकाशन संस्थाओं की संख्या बढ़ रही है, इससे पता चलता है कि लोग पुस्तकें खरीद कर पढ़ रहे हैं। पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा पुस्तकें खरीदना इसका प्रमाण है।
आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने बताया कि डिजिटल मीडिया विचारों के प्रचार के लिए आज एक वैकल्पिक स्त्रोत के रूप में उभरा है। भारत के विषय में जो भी चर्चा चली है, जिसमें चाहे जम्मू-कश्मीर, गोहत्या पर प्रतिबन्ध, भारत की सास्कृतिक विरासत का विषय हो, इन सारे विषयों पर हमें यह दिखता है कि एक काउंटर व्यू डिजिटल मीडिया में अचानक प्रमाणिक तथ्यों, संदर्भ सहित आता है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ प्रिंट मीडिया को भी उसका सहारा लेना पड़ता है। उदाहरण के लिए औरंगजेब रोड के नाम परिर्वतन का विषय आया। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर उस मार्ग का नाम क्यों न हो, स्वभावत: 70-80 के दशक की तरह इस विषय को ले जाने की कोशिशें होने लगीं कि क्या सेकुलर है और क्या कम्यूनल। वो दौर होता तो औरंगजेब कितना सेकुलर था, कितना अच्छा प्रशासक था, कितना श्रेष्ठ था यह बताने का बहुत प्रयास होता। ऐसी स्थिति में शायद कुछ निर्णय भी नहीं होता। लेकिन डिजिटल मीडिया का प्लेटफार्म था जिसने यह विषय पकड़ा, उस पर चर्चाएं कीं। उस पर साहित्य से संदर्भ भी निकाले, नया साहित्य भी डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत हुआ और चर्चा इस दिशा में गई कि बिना कुछ समय गंवाए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर उस रास्ते का नामातरण हुआ।
हिन्दी ब्लॉगर नलिन चौहान ने कहा कि आज प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया को फॉलो कर रहा है। यूनिकोड के आने से अब हम अपने विचार डिजिटल मीडिया द्वारा सुगमता से सबको बता सकते हैं।

संघ पर समाज का भरोसा, संघ के नित्य कार्यों के कारण हैं - डॉ. मोहनराव भागवत जी




राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संग्रहणीय विशेषांकों का लोकार्पण

संघ पर भरोसा समाज को प्रचार के कारण नहीं है. भरोसा संघ के नित्य कार्यों के कारण हैं - डॉ. मोहनराव भागवत जी

नई दिल्ली (इंविसंके). संघ पर भरोसा समाज को प्रचार के कारण नहीं है. भरोसा संघ के नित्य कार्यों के कारण हैं. संघ की निष्ठा सत्य है. तभी इतने वर्षों में इसका अंत न होकर बल्कि निरंतर आगे बढ़ता ही रहा है और आज 90 वर्षों का सफर तय करके सबसे आगे है. संघ की जानकारी और जिज्ञासा को बढ़ाने वाला यह अंक भारत प्रकाशन (दिल्ली) लिमिटेड ने संघ के कार्यों को कालखण्डों में बाँट कर प्रकाशित किया है. जो एक सराहनीय कार्य है. उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संग्रहणीय विशेषांकों के लोकार्पण कार्यक्रम में कहा.
उन्होंने कहा कि संघ की ये पद्धति नहीं रही है कि भारतवासियों तुम आश्वत हो जाओ कि तुम्हें कुछ नहीं करना है हम सारे कार्य कर देंगें. बल्कि, संघ की पद्धति रही है और है कि हम सब मिलकर कार्य करेंगे. सबको साथ लेकर चलना ही संघ का आचरण और कर्तव्य है.
संघ क्या है? इसके लिए प्रमाणिक जिज्ञासा उत्पन्न करना है तो स्वयंसेवकों को अपने आत्मीयता का अनुभव करना होगा. तभी हम संघ के बारे में समाज को बता सकते है.
आगे कहा कि संघ की लत जब किसी को एक बार लग जाती है तो वो ताउम्र नहीं छूटती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसके अंतःकरण में सामाजिक भावना मानवता के लिए बैठ जाती है. ऐसा इसलिए कि संघ एक विचार है. लेकिन, वो विचार क्या है? उसमें कुछ नया है क्या? अपने देश के उत्थान के लिए काम करेने वालों के मन में जो एक अलग-अलग विचार था या है, उन सभी को साथ लेकर चलना और उसके अन्दर से रचनात्मक विचार पर कार्य करना और उस पर चलना ही संघ का विचार है. वो रचनातमक विचार है क्या? वो विविधता में एकता सिखाने वाली हमारी सनातना काल से चलते आई सम्पदा (परंपरा) है.
आगे कहा कि जब हम अपने देश की विविधताओं में पाए जाने वाली एकता को जब विश्व को बताते है. तो वो कहते हैं, ये हिन्दू विचार है. इसलिए मैं मनाता हूँ कि इस विश्व में समस्याओं का जड़ विचारों का है. विचारों के समस्याओं का निदान बंधुत्व भाव से ही हो सकता है जिसे संघ 90 वर्षों से निरंतर करते चला आ रहा है.
संघ का कार्य हिन्दू समाज को अपने मूल जड़ से जोड़ने का भी है. संघ के कार्यों का दायरा संकुचित नहीं है. बल्कि, समूचे विश्व को बंधुत्व भाव से ओत-प्रोत करके समाज से जोड़ने का है.
हिन्दू समाज को अपने अन्दर के बुराईयों और अहंकार को त्यागना होगा. तभी हम विश्व और विश्व में मौजूद सभी धर्म-सम्प्रदायों को बंधुत्व भाव से जोड़ पाएंगे.
अंग्रेजों ने अपने निहित स्वार्थ के लिए हिन्दू शब्द की एक अलग परिभाषा गढ़वाई, जिसके कारण आज समाज के अन्दर अलग-अलग प्रकार के भ्रम पैदा हो चुकी है और होती भी है. जबकि, सभी भारतीय हिन्दू हैं. यह सोच और विचार का ही अंतर है.
आगे कहा कि आदमी क्या है? इसपर ध्यान देने से पहले खुद पर ध्यान देना होगा, खुद पर साधना करना होगा. ऐसा इसलिए, जब आदमी खुद पर ध्यान देगा, साधना करेगा तो वो खुद के अन्दर एक इंसान का निर्माण करेगा. तभी जाकर वो समाज का निर्माण कर सकता है और यही कार्य संघ करता है अपने शाखा के माध्यम से. संघ समाज निर्माण अर्थात व्यक्तित्व निर्माण का कार्य करता है. कार्य करने का तरीका और पद्धति भारतीय है.
संघ कुछ नहीं करता है, स्वयंसेवक सबकुछ करते हैं. इसलिए संघ के इतर और उतर भी लोगों को संघ को समझने का प्रयास करना पड़ता है. इसके समानान्तर दुनिया में कोई संगठन नहीं है जो इसके स्तर को छू सके. ये मैं तो मनाता हूँ, सभी स्वयंसेवक बन्धु भी मानते हैं. लेकिन दुनिया इसे मान भी रही है और समय-समय पर कह भी रही है.
उन्होंने कानपुर में हुए रेल दुर्घटना का जिक्र करते हुए बताया कि राहत कार्य के लिए सबसे पहले संघ के स्वयंसेवक ही पहुंचे और लोग भी पहुंचे थे. उसी दौरान ये सुनने में आया था कि वहां पर कुछ ऐसे भी तत्व पहुंचे हैं सेवा और सहायता के नाम पर दुर्घटना में मारे गए लोगों के कीमती सामानों की चोरी कर रहे हैं. तो रेलवे के वरिष्ठ अधिकारीयों ने तत्काल निर्णय लिया और वहां पर प्रशासन को आदेश दिया कि संघ के स्वयसेवकों को छोड़कर किसी भी संस्था के कार्यकर्ता या सहायता करने वालों को वहां पर रोक लगा दिया जाए. ऐसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिए कि संघ के स्वयंसेवक ईमानदार और कर्तव्य निष्ठ होते हैं. यह बताता है कि समाज में संघ का प्रभाव कैसा है, संघ और संघ के स्वयंसेवकों के प्रति समाज में किस कदर विश्वास और किस प्रकार की छवि बनी हुई है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संग्रहणीय विशेषांको के लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी, विशिष्ट अतिथि डिक्की के संस्थापक व उद्योगपति मिलिंद काम्बले थे. इनके अलावा मंचासिन रहे - भारत प्रकाशन के एमडी व दिल्ली प्रान्त के सह संघचालक श्री आलोक कुमार, भारत प्रकाशन के समूह संपादक जगदीश उपासने, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर और ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर. कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश भैय्याजी जोशी, सह सरकार्यवाह – डॉ. कृष्ण गोपाल जी, श्री भगैया जी, श्री सुरेश सोनी जी, उत्तर क्षेत्र के प्रचार प्रमुख श्री नरेंद्र ठाकुर जी, दिल्ली प्रान्त के संघचालक कुलभूषण आहूजा जी, दिल्ली प्रांत कार्यवाह भारत भूषण जी, दिल्ली प्रान्त प्रचार प्रमुख राजीव तुली जी के अलावा संघ के राष्ट्र, क्षेत्र, प्रान्त और विभाग स्तर के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे. भारत सरकार के मौजूदा मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद के अलावा बीजेपी के तमाम सांसद भी मौजूद रहें.